पैसा जहां से आता है... लूटतंत्र वहीं जाता है
विचार - " पैसा जहां से आता है " उसके इर्द गिर्द घूम रही है पूरी व्यवस्था... न लोकतंत्र है, न न्याय है और नहीं मानवता है... है तो महा भ्रष्टाचार है.....। " यह कथन — "पैसा जहां से आता है उसके इर्द-गिर्द घूम रही है पूरी व्यवस्था... न लोकतंत्र है, न न्याय है और नहीं मानवता है... है तो महा भ्रष्टाचार है..." — भारतीय सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था पर एक कठोर लेकिन यथार्थपरक टिप्पणी है। इस आधार पर भारतीय व्यवस्था का विश्लेषण निम्न बिंदुओं में किया जा सकता है: --- 1. लोकतंत्र की वास्तविकता बनाम दिखावा संविधान में भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य कहा गया है। लेकिन व्यवहार में लोकतंत्र अक्सर केवल चुनावों तक सिमट कर रह गया है। ज्यादातर जनप्रतिनिधि चुनाव जीतते ही... कार्यकर्ताओं से और जनता से मुंह मोड़ लेते हैँ.... फिर उनकी फस्ट चवाइस ठेकेदार, सप्लार, कमीशन देनें वाले अधिकारी हो जाते हैँ। क्योंकि चुनाव खर्च निकलना है और अगले चुनावों का प्रबंध करना है। चुनावी राजनीति में धनबल और बाहुबल का वर्चस्व है। "पैसा जहां से आता है...