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मकर संक्रांति : उत्तरायण प्रारंभ : अंधकार घटने और प्रकाश बढ़ने का दिन...

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  15 जनवरी को मनाई जायेगी मकर संक्रांती  आकाश के दक्षिण हिस्से से सूर्य का रथ उत्तरी हिस्से की और बढ़ रहा है। 14 जनवरी की मध्य रात्रि को सूर्यदेव का रथ उत्तरायण होगा। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही संक्रांति का पुण्यकाल भी शुरू हो जाएगा। स्नान-दान की मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। उदयतिथि के सिद्धांत के अनुसार, मकर संक्रांति इस बार 15 जनवरी 2024 को मनाई जाएगी. इस दिन सूर्य रात 2 बजकर 54 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे.    क्या होता है सूर्य का उत्तरायण होना आकाश की 12 राशियों में सूर्य के भ्रमण से ऋतु चक्र पूरा होता है। एक राशि से दूसरी राशि में सूर्य के संक्रमण को ही संक्रांति कहते हैं। सूर्य की मकर से मिथुन राशि में रहने तक 6 महीने की अवधि उत्तरायण कही जाती है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक यह देवों का प्रभात काल होती है। कर्क से धनु राशि में सूर्य के रहने के 6 महीने को दक्षिणायन कहते हैं। इसे आसुरी काल भी कहते हैं। ------------- मकर संक्रांति : अंधकार घटने और प्रकाश में बढ़ोतरी का दिन... 1- महाभारत युद्ध में अर्जुन के बाणों से बिंधे शर शय्या म...

मकर संक्रांति हिन्दू संस्कृति के गहन अंतरिक्ष ज्ञान का प्रमाण है - अरविन्द सिसौदिया Makar Sankranti Hindu culture

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  मकर संक्रांति हिन्दू संस्कृति के गहन अंतरिक्ष ज्ञान का प्रमाण है - अरविन्द सिसौदिया Makar Sankranti is the proof of deep space knowledge of Hindu culture - Arvind Sisodia भारतीय संस्कृति अत्यंत प्राचीन एवं अत्याधिक अनुंधानों से युक्त है। इसका प्रमाण भारत का अंतरिक्ष ज्ञान है। जिसनें पृथ्वी , सौर ,अयन, आकाश गंगा एवं कालगणना जैसे गूढ़ विषयों पर अनुंसधान किया और सटीक पंचांग का निर्माण किया है। Indian culture is very ancient and rich in research. The proof of this is India's space knowledge. Those who have done research on esoteric subjects like Earth, Solar, Ion, Akash Ganga and Kalgana and have created accurate almanac. पृथ्वी के अपनी कक्षा में घूमनें, घूमते हुये विभिन्न नक्षत्रों के क्षेत्र से गुजरना और उसका दक्षिण अयन एवं उत्तर अयन में होना अदि की गहन गूढ़तम जानकारियां हिन्दू ऋषियों नें अर्जित कीं और उनके आधार एवं प्रभाव पर हमारे व्रत तिथि, पर्व तिथि एवं त्यौहारों का निर्धारण किया गया।  इसी तरह का एक अंतरिक्ष पर्व हमारा मकर संक्रांती पर्व है। Hindu sages acquired deep and myst...

सूर्यनारायण का पर्व मकर संक्रांति Makar Sankranti

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                                       🌷 *मकर संक्रांति* 🌷  आत्मोद्धारक व जीवन-पथ प्रकाशक पर्व  – मकर संक्रांति (15 जनवरी 2023 रविवार को पुण्यकाल सूर्योदय से सूर्यास्त तक 🌞 *जिस दिन भगवान सूर्यनारायण उत्तर दिशा की तरफ प्रयाण करते हैं, उस दिन उतरायण (मकर संक्रांति) का पर्व मनाया जाता है | इस दिन से अंधकारमयी रात्रि कम होती जाती है और प्रकाशमय दिवस बढ़ता जाता है | उत्तरायण का वाच्यार्थ है कि सूर्य उत्तर की तरफ, लक्ष्यार्थ है आकाश के देवता की कृपा से ह्दय में भी अनासक्ति करनी है | नीचे के केन्द्रों में वासनाएँ, आकर्षण होता है व ऊपर के केन्द्रों में निष्कामता, प्रीति और आनंद होता है | संक्रांति रास्ता बदलने की सम्यक सुव्यवस्था है | इस दिन आप सोच व कर्म की दिशा बदलें | जैसी सोच होगी वैसा विचार होगा, जैसा विचार होगा वैसा कर्म होगा | हाड-मांस के शरीर को सुविधाएँ दे के विकार भोगकर सुखी होने की प...

भीष्म पितामह के स्वर्गारोहण की तिथि है मकर संक्रांति Makar Sankranti

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भीष्म पितामह के स्वर्गारोहण की तिथि है मकर संक्रांति यह सर्वविदित तथ्य है कि ऋतु परिवर्तन का पर्व मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव उतरायण में प्रवेश करते हैं और सूर्य के उत्तर की ओर उदय होने की अवधि अर्थात उत्तरायण में दिन बढ़ता जाता है और रात्रि घटती जाती है। सूर्य की मकर राशि की संक्रांति से अर्थात उत्तरायण में सूर्य के प्रकाश की अधिकता के कारण इसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। और यही कारण है कि देश में मकर संक्रांति के दिन को अधिक महत्व दिया जाता है। सूर्य देव के उत्तरायण में प्रवेश करने के पर्व मकर संक्रांति की महिमा का वर्णन संस्कृत साहित्य में वेद से लेकर पुराण तथा आधुनिक ग्रंथों में विशेष रूप से की गई है। वैदिक ग्रंथों में उत्तरायण को देवयान कहा गया है। हमारी संस्कृति का मुख्य ध्येय तमसो मा ज्योतिर्गमय की भावना है। अर्थात अंधकार से प्रकाश की ओर चलें। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में उत्तरायण के प्रथम या आरम्भ के दिन को अत्यधिक महत्व दिया जाता है और प्राचीन काल से ही इस दिवस को एक पर्व के रूप में मनाये जाने की परिपाटी है। मकर सक्रांति दिवस से पूर्व शीतकाल पूर्ण यौवन पर ह...