स्वामी विवेकानंद - विश्व में गूंजे हमारी भारती Swami Vivekanand Ji
विश्व में गूंजे हमारी भारती -बल्देव भाई शर्मा स्वामी विवेकानंद का स्मरण हृदय में रोमांच भर देता है, उनके शब्द पढ़-सुनकर भुजाएं फड़कने लगती हैं और मन में उदात्त भावों को जगाता आनंद का उत्स फूट पड़ता है। मानो ऊर्जा का विस्फोट हैं विवेकानंद। नरेन्द्र नाथ दत्त से स्वामी विवेकानंद बनने तक की उनकी यात्रा न केवल मानवीय दुर्बलताओं पर विजय है, बल्कि अनंत आस्था के प्रवाह में अवगाहन है, राष्ट्र- धर्म- संस्कृति के उन्नयन का मंत्र भी। निराशा, आत्मबोधहीनता और अज्ञान से निकलकर किस तरह जिजीविषा के साथ निर्भय होकर अमरत्व की ओर बढ़ें, हिन्दू चिंतन, विशेषकर उपनिषदों के आह्वान को बोधगम्य बनाकर जब उन्होंने प्रस्तुत किया, तो न केवल ईसाइयत की श्रेष्ठता के अहंकार पर चढ़कर आई साम्राज्यवादी निरंकुशता का दंभ चूर-चूर हो गया, बल्कि यूरोप और अमरीकावासी तो उन्मत्त होकर उनके पीछे दौड़ने लगे मानो उन्हें कोई त्राता मिल गया हो। उनके विदेश प्रवास काल में घटित ऐसे अनेक प्रसंग और वहां के समाचार पत्रों में प्रकाशित स्वामी जी के चुम्बकीय आकर्षण की यशोगाथा वहां उनका जादू छा जाने के साक्षी हैं। प्रेम, सेवा औ...