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Death is only of the body मृत्यु तो शरीर की ही होती है ...

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- Arvind Sisodia  Kota Rajasthan. 9414180151   मृत्यु.......... मृत्यु तो शरीर की ही होती है, जिस तरह हम पुराना स्कूटर बेंच कर नई बाईक खरीद ते हैं, जिस तरह पुराने कपडेे को बदल कर नया पहनते हैं, ईश्वर की व्यवस्था भी, जर्जर होने पर नया प्रदान करती है। आत्मा अजर अमर है अविनाशी है, क्यों की उसकी आयु ईश्वर के साथ है। जब तक ईश्वर तत्व है तब तक यह आत्मा भी है, तब तक यह बृम्हाण्ड भी है। death......... Death is only of the body, The way we buy new bikes by selling old scooters, Just like changing old clothes and wearing new ones,God's law, too, provides a new one when it is dilapidated. The soul is immortal, imperishable, because its age is with God. As long as there is God element, it is also soul, so long it is also the universe.   हिन्दू दर्शन में आत्मा को तीन शरीरों में निवास कर्ता बताया गया है। In Hindu philosophy, the soul is said to reside in three bodies. प्रथम सूक्ष्म शरीर अर्थात पूरी तरह खाली साफटवेयर स्वरूप First subtle body i.e. completely empty software form दूसरा सूक...

महान धर्मरक्षक आदि शंकराचार्य का जन्म

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 Birth of the great Dharmarakshak Adi Shankaracharya महान धर्मरक्षक आदि शंकराचार्य का जन्म (साभार) पुस्तक - शंकराचार्य लेखक - उमादत्त शर्मा शास्त्रों में कहा गया है कि सब जन्मों में नर - जन्म ही श्रेष्ठ है । क्योंकि और जन्म तो केवल तुच्छ भोग - वासनाओं की तृप्ति के लिये हैं और मनुष्य जन्म है , मोक्ष प्राप्ति के लिये । भोग दो भागों में संघटित होता है । एक अनुकूल वेदना जनित सुख भोग , दूसरा प्रतिफूल वेदना जनित दुःख भोग । जन्म ग्रहण करने अथवा देह धारण करने पर इन दोनों प्रकार के भोगों मे से एक प्रकार के भोग को तो भोगना ही पड़ता है । इनसे कोई भी परित्राण नहीं पा सकता । जीव नर - देह धारण करके सुख - दुःख  से परित्राण पा सकता है । मुक्ति हो सकती है । परन्तु इसका एक मात्र माग है , धर्म-साधना । शास्त्रों मे लिखा है कि आहार , निद्रा , भय , मैथुन आदि की नीच प्रकृति , पशुओं की तरहसे मनुष्यों मे भी रहती है । परन्तु धर्म के कारण ही मनुष्य , पशु की अपेक्षा श्रेष्ठ है । इसी धर्म - साधना द्वारा मनुष्य देवत्त्व लाभ कर सकता है , त्रिविध दुःखों से उद्धार पाकर महा निर्वाण और निःश्रेयस का अधिकारी हो स...