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कोटा महानगर में हिन्दू नववर्ष मनाये जानें के लिए 12 नगरीय समितियों का गठन हुआ Hindu Nav Varsh

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कोटा महानगर में हिन्दू नववर्ष मनाये जानें के लिए 12 नगरीय समितियों का गठन हुआ  कोटा 10 मार्च। हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत 2082 के स्वागत अभिनन्दन एवं विविध स्थानीय आयोजनों को लेकर, हिन्दू नववर्ष आयोजन समिति नें कोटा महानगर को 12 नगरों में विभाजित कर 12 नगरस्तरीय आयोजन समितियों का गठन किया है। जिसमें पालक, संयोजक सहसंयोजक एवं सदस्यों की टोली का गठन किया गया है। यह टोलियां हिन्दू नववर्ष के आयोजनों को भव्य और दिव्य बनाने में हिन्दू समाज का सहयोग करेंगी।  समिति के मीडिया संयोजक अरविन्द सिसोदिया नें बताया कि नगरीय आयोजन समितियों को महानगर अध्यक्ष गोविन्द नारायण अग्रवाल एवं महामंत्री छगन माहुर नें अंतिमरूप दिया। जो कि निम्नानुसार होंगी,कोटा महानगर स्थित गणेश नगर हेतु संयोजक राजेंद्र खंडेलवाल, सहसंयोजक मुकेश जोशी,सुभाष अग्रवाल,हेमसिंह हाडा, वहीं विवेकानंद नगर हेतु संयोजक चंद्र प्रकाश नगर सहसंयोजक राजेंद्र मेहरा, महावीर नागर, सतीश गुप्ता, चाणक्य नगर हेतु पालक विकास शर्मा, संयोजक लहरी शंकर गौतम,सहसंयोजक देबू राही, मुकेश नारायण मेघवाल, अनिल ठोरा, विश्वकर्मा नगर हेतु संयोजक हर...

कालजयी संस्कृति को समाप्त करनें का षडयंत्र अब रोकना होगा - अरविन्द सिसौदिया

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कालजयी संस्कृति को समाप्त करनें का षडयंत्र अब रोकना होगा - अरविन्द सिसौदिया सनातन सभ्यता और हिन्दू संस्कृति अनादिकाल से जीवन्त है और उसे समाप्त करनें के लिये , उसके ज्ञान को समाप्त करनें के लिये, उसकी आदर्ष जीवन पद्यती को समाप्त करनें के लिये एक बडा षडयंत्र फिर से सिर उठा रहा है। इसे रोकना और विफल करना प्रत्येक भारत वासी का कर्त्तव्य है , प्रत्येक हिन्दू का सनातन का कर्त्तव्य है। देश की स्वतंत्रता में भारत के हिन्दूंओं से छल किया गया, स्वतंत्रता के बाद लगातार इसे छला गया और यह सब अब भी बडी बेशर्मी से हो रहा है। इस तस्वीर को बदलना होगा , इसके लिये मतशक्ति से सरकारों पर भी दबाव बना होगा । हिन्दुत्व को अक्क्षुण्य रखनें के लिये सब कुछ छोंक देना होगा, पूरी ताकत लगाना होगी, जो धारणा आज हमारे सामनें है, उसे बदलना होगा । इसका नीचे वर्णन है जो कि सोसल मीडिया पर फैली हुई है। इस धारणा को स्विकारना स्वयं आत्म हत्या करना होगा ।फ इसलिये आज से ही हिन्दुत्व को अजर अमर करने में जुट जायें। --------------- *शेर दहाड़ते रह गये, भेड़िए जंगल पर कब्जा बनाकर बैठ चुके हैं!* *हिन्दू एक मरती हुई नस्ल...

हिन्दू एकता क्यों आवश्यक है

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हिन्दू अनादि काल से हिन्दुस्तान के स्वामी हैं, हिन्दुओं को बांट कर ही अभी तक बाहरी हमलावरों और बाहरी व्यक्तियों के द्वारा बनाये गये राजनैतिक दल नें भारत पर राज किया और हिन्दुओं के साथ लगातार छल किया है। हिन्दू अब जाग चुका है, उसे पुनः विभक्त करके बाहरी ताकतें अपने एजेंण्डे पर चलने वाले दलों को सत्ताशीन करना चाहते हैं। इसलिये सनातन हिन्दुओं को पूरी तरह एकजुट होना ही चाहिये। हिन्दू पुरुषार्थ आदित्य है, लगातार 3000 वर्षों से हमारे ऊपर विदेशी आक्रमण हो रहे हैं, हमने जमकर के संघर्ष किया है, अपने बलिदान से, अपने खून से, अपनी बहन बेटियों के जौहर से, इस देश की पवित्र धर्म और संस्कृति को सींचा है, उसकी रक्षा की है। सारी दुनिया को अपने पंथ का गुलाम बनाने वाली ताकतों और उनके विश्व विजयी अभियानों को हिंदू सूरवीरों  नें ही रोका है। ये ताकतें विदेशी धन बल और अपरोक्ष षड्यंन्त्रों के बल पर अब फिर से सिर उठा रहीं हैँ, इन्हे और इनके मंसूबों को जानना, साझना और परास्त करना हमारा कर्तव्य है। यही हमारा राष्ट्रधर्म भी है। हमें सिर्फ देश बचानें के लिए एक जुट रहना है मात्र इतना नहीं है , हमारे देश को अन्दर...

ईश्वर प्रदत्त नववर्ष व्यवस्था है ; हिन्दू संवत्सर : अरविन्द सीसौदिया

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यूं तो भारत ही वह देश,संस्कृति और सभ्यता है जिसनें सब कुछ विश्व को सबसे पहले दिया है। इसमें हमारे ऋषियों नें सबसे पहले अंकों का अविष्कार किया और उससे गणित और गणनाओं को अविष्कृत किया,ज्ञान का समृद्ध किया, जिस पर पूरा विश्व चला।विश्व का पहला पंचांग अर्थात केलेण्डर जो ग्रह नक्षत्रों के प्रभाव से युक्त है। वह मात्र हिन्दू केलेण्डर संवतसर है।  हिन्दू नववर्ष 2081 भारतीय नववर्ष की अनमोल  वैज्ञानिकता - अरविन्द सीसौदिया   भारतीय नववर्ष केलेण्डर, भारत की अत्यंत उच्चकोटि की खगोलीय वैज्ञानिकता - अरविन्द सीसौदिया Indian New Year Calendar, India's very best astronomical science - Arvind Sisodia   ईश्वर प्रदत्त , नववर्ष व्यवस्था है ; भारतीय संवत्सर.....! God-given, New Year's arrangement is there; Indian Samvatsara.....!     जब भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ला एकम की शुभ बेला आती है, तब भारतीय प्रायद्वीप का माहौल आनंदवर्द्धक हो जाता है। प्रातः का सम तापमान सभी ओर नई चेतना, नई शक्ति, नई उर्जा का संचार करता  हेै। ऐसा प्रतीत होता है मानों, एक नया उल्लास, एक नई ललक प्राणी समूह...

कहां गये यहूदी, यह तो दुनिया को बताना ही होगा - अरविन्द सिसोदिया yahudi

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पूरी दुनिया में यहूदी थे, उन्हें चुन चुन कर किसने मारा? कहां गये यहूदी यह सवाल मुस्लिम देशों से भी है? इसी तरह हिन्दुओं को भी खत्म किया गया, यह भारत का 25 वां विभाजन था, कौन लोग थे जिनने हिन्दुओं को खत्म किया, पाकिस्तान से भी पूछा जाना चाहिए कि हिन्दू कहां गए..... पाकिस्तान बनवाने वाली कांग्रेस से भी पूछा जाना चाहिए कि पाकिस्तान और बांग्लादेश देश सहित भारत के ही अनेकों हिस्सों में हिन्दू ही कम क्यों हुआ। क्या आगे हिन्दू कि स्थिति भी यहूदियों जैसी होनें जा रही है... या उससे भी बुरी यह आज का विचरणीय प्रश्न है..... इजरायल ने कल संयुक्त राष्ट्र संघ में ऐसा सवाल पूछा कि पूरे सदन को साँप सूंघ गया। काफी देर तक सन्नाटा पसरा रहा और कुछ क्षणों के लिए अगली कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई। मानों सदन निरुत्तर हो गया हो*। *इजरायल की स्थाई प्रतिनिधि ने पूछा कि मिस्र, लीबिया, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, यमन आदि देशों में रहने वाले लाखों यहूदी कहां गए*?  *इन देशों के एक भी यहूदी ने कभी धर्म नहीं बदला। तो जॉर्डन के दो लाख और मिस्र के एक लाख यहूदी अब कहां हैं? आरोप केवल हिटलर पर मत लगाइए कि उसने चु...

ईश्वर और काल का ज्ञाता हिन्दू ही है - अरविन्द सिसौदिया

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ईश्वर और काल का ज्ञाता हिन्दू ही है - अरविन्द सिसौदिया Hindu is the knower of God and Time - Arvind Sisodia   It is mentioned in Rigveda that once upon a time a golden urn rotating at high speed explodes and it causes swelling of the universe. This illusion is called Big Bang by the people of the western world. From which many galaxies are formed. There are crores of objects in each galaxy. Which we know by the names of Sun, Moon, Stars, Mandakaniyo Niharrikaye, and by attaining a systematic speed, they make up the creation of a very long period of time. ऋगवेद में आता है कि एक समय एक स्वर्ण कलश तेजगति से घूमत हुये विस्फोट होता है और उससे सृष्ट्रि का सुजन होता है। इसी घब्ना को पाश्चात्य जगत के लोग बिगबैंग कहते हैं। जिससे अनेकों आकाशगंगायें बनती हैं। प्रत्येक आकाशगंगा में करोडो पिण्ड होते है। जिन्हे हम सूर्य चन्द्र तारे मंदाकनियों निहररिकायें के नामों से जानते है और ये व्यवस्थित गति प्राप्त कर एक बहुत बडे कालखण्ड की सृष्टि को बनाती है।  This creation keeps expanding over time on...