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राजस्थान में परिवर्तन यात्रा का आगाज 2 सितंबर से

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  Rajasthan Assembly Election 2023  राजस्थान में भाजपा का चुनावी आगाज 2 सितंबर से सामूहिक नेतृत्व में निकलेगी भाजपा की परिवर्तन यात्रा यात्रा का रूट तय राजस्थान में निकलने वाली भाजपा की परिवर्तन यात्रा में अब कोई प्रदेश का एक चेहरा नहीं होगा, बल्कि सामूहिक नेतृत्व में ये यात्रा निकाली जाएगी। यह घोषणा भाजपा चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक एवं प्रदेश उपाध्यक्ष नारायण पंचारिया और सह संयोजक व वरिष्ठ भाजपा नेता ओंकार सिंह लखावत ने पत्रकारवार्ता के माध्यम से दी है। राजस्थान में विधानसभा चुनावों से पहले निकाली जाने वाली भाजपा की परिवर्तन यात्राओं का दिन और रूट फाइनल कर दिया गया है। किसी भी एक नेता के नेतृत्व में यह यात्रा नहीं निकाली जाएगी। यात्रा का कोई चेहरा नहीं होगा। सभी यात्राओं में प्रदेश के प्रमुख और वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। चारों दिशाओं से निकलने वाली ये यात्राएं प्रदेश की सभी 200 विधानसभा सीटों को कवर करेंगी। लगभग एक साथ चलने वाली चारों यात्राएं कुल 8,982 किलोमीटर का सफर तय करेंगी। 1- प्रथम यात्रा - 2 सितम्बर को राजस्थान के पूर्व दिशा से, त्...

टूलकिट की हवा निकाली राजस्थान सरकार के कांग्रेस मंत्री राजेन्द्र गुढा नें Rajendra Singh Gudha

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गुढा सच कहने के लिये पहले भी चर्चा में रहे हैं-  नवंबर 2022ः पायलट को सीएम नहीं बनाया तो फॉर्च्यूनर में आ जाएंगे कांग्रेस के विधायक सचिन पायलट को बहुत पहले सीएम बना देना चाहिए था। अब भी पायलट को सीएम बना दिया जाए तो सरकार रिपीट हो सकती है। अगर सचिन पायलट को सीएम नहीं बनाया तो कांग्रेस के इतने ही विधायक रहेंगे कि एक फॉर्च्यूनर में आ जाएंगे। मणीपुर टूलकिट की हवा निकाली राजस्थान सरकार के कांग्रेस मंत्री राजेन्द्र गुढा नें - अरविन्द सिसौदिया कई बार सबूत नहीं होते मगर अन्तआर्त्मा कुछ संदेश देती है कि यह इस तरह से है , यह इस तरह से नहीं है। संसद सत्र के शुभारम्भ के पहले ही दिन क्या होगा , इस बार टूल किट क्या है। गतिरोध के लिये क्या लाया जायेगा ? इस तरह का जागरूक मन विचार कर ही रहा था कि एक स्तब्ध कर देनें वाला विडियो जो करीब करीब दो महीनें पूर्व का था वायरल हुआ ( वायरल किया गया ) और इसके आधार पर वही सब कुछ जिसकी प्रतिक्षा थी, संसद में देखनें को मिला ! क्यों कि जब कोई पार्टी शत्रु राष्ट्र से संधि किये हुये हो और वह विपक्ष में हो तो सहज ही समझ आ जाता है कि दिशा क्या है। वह लगातार सामनें आ ...

विधानसभा अध्यक्ष नैतिकरूप से इस्तीफे वापस नहीं कर सकते - अरविन्द सिसौदिया Congress MLA resignation

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  विधानसभा अध्यक्ष नैतिकरूप से इस्तीफे वापस नहीं कर सकते - अरविन्द सिसौदिया राजस्थान में सचिन पायलेट को मुख्यमंत्री बनाने की कांग्रेस की तत्कालीन हाई कमान श्रीमती सोनिया गांधी की इच्छा को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नें बडी ही चालांकी से विफल किया । उन्होनें न केबल हाईकमान के खिलाफ बगावत करवाई बल्कि पार्टी अनुशासन को ताक पर रख कर अनुशासनहीनता की नई इबारत लिखी । अपने समर्थक विधायकों को प्रेरित कर 91 विधायकों के इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष को दिलवाये। इन इस्तीफों की दम पर लगातार कांग्रेस हाईकमान को वे अपरोक्ष ब्लेकमेल भी करते रहे। यूं तो यह सब अपराधिका ही थी। मगर इस्तीफा देना और लेना प्रक्रिया के तहत था । सो कोई कुछ नहीं कह सकता था। इस सारे घटनाक्रम के दौर में या जोश में यह भूल गये कि त्यागपत्र को वापस नहीं लिया जा सकता । अब सारा विषय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गले की फांस बनता नजर आ रहा है। इससे ज्यादा यह उलझन विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी के लिये भी समस्या बन गई है। पार्टी हित में उन्हे इन इस्तीफों को अस्विकार करना पडेगा । पार्टी हित में और सरकार के हित में विधानसभा के सदन में कांग्रेस के विध...

इस्तीफा देनें वाले विधायक शून्य हैं, न्यायपालिका इन्हे जनता के पास भेजे - अरविन्द सिसोदिया The MLAs who resigned are zero

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इस्तीफा देनें वाले विधायक शून्य हैं, न्यायपालिका इन्हे जनता के पास भेजे - अरविन्द सिसोदिया The MLAs who resigned are zero, the judiciary should send them to the public - Arvind Sisodia   भारत का संविधान एवं परम्परागत परम्परायें यही बताती हैं कि राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष को असीमित अधिकार नहीं हैं। जिन विधायकों ने तीन माह पूर्व स्वैच्छा से इस्तीफे सौंपें थे, वे तत्काल प्रभाव से स्वंय स्वीकृत हैं। उन्हे नैसर्गिक स्विकार्यता प्राप्त है। वे विधि संगत हक त्याग की तरह संविधानसम्मत पद त्याग है, जिसे वापसी की कोई संविधानिक व्यवस्था नहीं है। The Constitution of India and traditional traditions tell that the Speaker of the Rajasthan Legislative Assembly does not have unlimited powers. The MLAs who voluntarily submitted their resignations three months back are automatically accepted with immediate effect. They have natural acceptance. They are relinquishment of office as per law, like relinquishment of legitimate rights, for which there is no constitutional provision for withdrawal. यूं भी ...