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प्रथम गुरु हमेशा ही माता होती है

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प्रथम गुरु हमेशा ही माता होती है ! कुछ परिस्थितों में पालनहार भी प्रथम गुरु होता है !! माता-पिता हमारे सर्वप्रथम गुरु हैं विष्णु महाराज   शास्त्र कहते हैं कि गुरु वह है, जो हमें अंधेरे से उजाले की ओर ले जाए। जो हमें रोशनी प्रदान करे। तो सबसे पहले ऐसा कौन करता है? सबसे पहले यह रोशनी हमें माँ दिखाती है। उसके बाद पिता। वही हमारे प्रथम गुरु हैं। इसीलिए शास्त्रों में यह भी लिखा है कि माता-पिता का यथायोग्य सम्मान करना चाहिए। जरा सोचो कि अगर हमें हमारे माता-पिता द्वारा कुछ भी सिखाया न जाता तो हमारी क्या स्थिति होती। क्या हम ढंग से चल पाते, बात कर पाते, लिख पाते, व्यवसाय कर पाते! यहाँ तक कि हम अपने जीवन और इस शरीर की रक्षा कैसे करना है, यह भी नहीं जान पाते। मान-अपमान, प्यार और अहंकार जैसी मूल वृत्तियों को पहचानना भी हमें वही सिखाते हैं। लेकिन जब हम यौवन और सार्मथ्य प्राप्त कर लेते हैं, तब अपने उन्हीं माता-पिता को हम तिरस्कार की निगाहों से देखते हैं। कई महानुभाव तो यह भी सोचते हैं कि अब हमें इनकी क्या आवश्यकता है। बूढ़े माता-पिता यदि किसी कारणवश अस्वस्थ हो जाएं तो वे

भगवान दत्तात्रेय और चौबीस गुरु

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| | भगवान दत्तात्रेय और चौबीस गुरुओं | | त्रिशक्तियों का समन्वय हैं भगवान दत्तात्रेय दत्तात्रेय को शिव का अवतार माना जाता है, लेकिन वैष्णवजन उन्हें विष्णु के अंशावतार के रूप में मानते हैं। उनके शिष्यों में भगवान परशुराम का भी नाम लिया जाता है। तीन धर्म (वैष्णव, शैव और शाक्त) के संगम स्थल के रूप में त्रिपुरा में उन्होंने लोगों को शिक्षा-दीक्षा दी। तंत्र से जुड़े होने के कारण दत्तात्रेय को नाथ परंपरा और संप्रदाय का अग्रज माना जाता है। इस नाथ संप्रदाय की भविष्य में अनेक शाखाएं निर्मित हुईं। भगवान दत्तात्रेय नवनाथ संप्रदाय से संबोधित किया गया है। भगवान दत्तात्रेय की जयंती मार्गशीर्ष माह में मनाई जाती है। दत्तात्रेय में ईश्वर और गुरु दोनों रूप समाहित हैं इसीलिए, उन्हें परब्रह्ममूर्ति सद्गुरु और श्रीगुरुदेवदत्त भी कहा जाता है। उन्हें गुरु वंश का प्रथम गुरु, साधक, योगी और वैज्ञानिक माना जाता है। हिंदू धर्म के त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश की प्रचलित विचारधारा के विलय के लिए ही भगवान दत्तात्रेय ने जन्म लिया था, इसीलिए उन्हें त्रिदेव का स्वरूप भी कहा जाता है। दत्तात्रेय को शैवपंथी

गुरु पूर्णिमा : 10 महान गुरु - नीना शर्मा

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विश्व गुरु स्वामी विवेकानंद जी   स्वामी विवेकानंद जी  के गुरु स्वामी रामकृष्ण परम हंस  12/07/ 2014 गुरू-पूर्णिमा-  नीना शर्मा https://www.facebook.com/neena.sharma प्राचीनकाल में जब विद्यार्थी गुरु के आश्रम में निःशुल्क शिक्षा ग्रहण करता था तो इसी दिन श्रद्धा भाव से प्रेरित होकर अपने गुरु का पूजन करके उन्हें अपनी शक्ति सामर्थ्यानुसार दक्षिणा देकर कृतकृत्य होता था। देवताओं के गुरु थे बृहस्पति और असुरों के गुरु थे शुक्राचार्य। भारतीय इतिहास में एक से बढ़कर एक महान गुरु-शिक्षक रहे हैं। ऐसे गुरु हुए हैं जिनके आशीर्वाद और शिक्षा के कारण इस देश को महान युग नायक मिले। कण्व, भारद्वाज, वेदव्यास, अत्रि से लेकर गुरुनानक और गुरु गोविंदसिंहजी तक लाखों गुरुओं की लिस्ट है। हमें मालूम है कि वल्लभाचार्य, गोविंदाचार्य, कबीर, सांईं बाबा, गजानन महाराज, तुकाराम, ज्ञानेश्वर आदि सभी अपने काल के महान गुरु थे और ओशो भी। आइए जानते हैं दस महान गुरुओं का संक्षिप्त परिचय... गुरु पूर्णिमा : 10 महान गुरु Share on facebookShare on twitterMore Sharing Services 1. गुरु वशिष्ठ राजा दशरथ के कुलगुरु