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एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कालाधन पकड़ा

कालाधन : एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कालाधन पकड़ा Bhasha ,    जुलाई 16, 2014 नई दिल्ली: सरकार ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की अघोषित आय का पता लगाया है। यह आंकड़ा आयकर विभाग द्वारा इससे पिछले वर्ष कालेधन का पता लगाने के लिए मारे गए छापों के दौरान जब्त राशि के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार आयकर विभाग ने मार्च में समाप्त वित्त वर्ष 2013-14 के दौरान तलाशी अभियान में 10,791.63 करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता लगाया जबकि इसी अवधि में देशभर में सर्वे ऑपरेशन में विभाग को 90,390.71 करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता चला। आयकर विभाग की यह कार्रवाई व्यक्तियों, व्यावसायिक फर्मों, कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों के खिलाफ कर चोरी का पता लगाने के लिए की गई। विभाग की तलाशी और छापे के अभियान तथा सर्वे ऑपरेशन में कुल मिलाकर 1,01,181 करोड़ रुपये के कालेधन का पता लगाया गया। तलाशी अभियान में आयकर विभाग के अधिकारी किसी कंपनी के कार्यस्थल और आवास दोनों जगह छापा मारते हैं, जबकि सर्वे में अधिकारी केवल व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में ही तलाशी लेते है

जहाँ-जहाँ स्वयं प्रगट हुए शिवजी : बारह ज्योतिर्लिंग

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हिन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रगट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। ये संख्या में १२ है। सौराष्ट्र प्रदेश (काठियावाड़) में श्रीसोमनाथ, श्रीशैल पर श्रीमल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (उज्जैन) में श्रीमहाकाल, ॐकारेश्वर अथवा अमलेश्वर, परली में वैद्यनाथ, डाकिनी नामक स्थान में श्रीभीमशङ्कर, सेतुबंध पर श्री रामेश्वर, दारुकावन में श्रीनागेश्वर, वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ, गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री त्र्यम्बकेश्वर, हिमालय पर केदारखंड में श्रीकेदारनाथ और  शिवालय में श्रीघुश्मेश्वर। - हिंदुओं में मान्यता है कि जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिङ्गों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों का किया हुआ पाप इन लिंगों के स्मरण मात्र से मिट जाता है। सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। :उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥1॥ परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।:सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥2॥ वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।:हिमालये तु केदारं घृष्ण

भगवान विष्णु का दशावतार मंदिर : देवगढ़ उत्तर प्रदेश

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भगवान विष्णु का मंदिर दशावतार मंदिर, देवगढ़, उत्तर प्रदेश दशावतार मंदिर उत्तरी भारत का सबसे पुराना जाना माना मंदिर है और यह भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि यह गुप्त काल में बना है। यह मंदिर अब बर्बादी की कगार पर है पर यहाँ आप भगवान विष्णु के दस अवतार के दर्शन कर सकते हैं और यही नहीं मंदिर के दरवाज़े पर आप गंगा और यमुना देवियों की नक्काशी की गयी है और वैष्णव पौराणिक कथाओं की पट्टी पर नक्काशी भी की गयी है। मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ती नर नारायण तपस्या के आकार में है और दूसरी मूर्ती है जिसमें वह एक नाग पर लेटे हैं। यह मंदिर हिन्दू श्रद्धालुओं को पूरे साल खासकर त्यौहार के समय भारी मात्रा में अपनी ओर आकर्षित करता है। उत्तरी भारत में स्थित यह पहला मंदिर है जिसमें शिकारा की सुविधा है जबकि अब काफी कुछ विलुप्त होता जा रहा है। ----------- देवताओं का गढ़ – देवगढ़ (उत्तर प्रदेश) ललितपुर से हमें गाड़ी पकड़नी थी जो पाँच घंटे विलंब से आने वाली थी. वहीं बैठे रहते तो रात आठ बजने वाले थे. हम तो दिन के बारह बजे के पहले ही पहुँच गये थे. हमने सोचा कि अब क्या करें. भला ह