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पूर्व जन्मों की यादें

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पुर्न जन्म की यादें http://www.khaskhabar.com ईश्वरीय करिश्मा, हत्यारे के घर ही लिया जन्म चंडीगढ। समय से पहले मिली मौत के निशान दूसरे जन्म में मिले शरीर को दाग दे जाते हैं। पीजीआई के न्यूरोलॉजी विभाग की स्टडी कहती है कि अगर व्यक्ति अप्राकृतिक मौत का शिकार (हत्या, डूबना, स़डक हादसा या दुर्घटना) होता है तो आखिरी समय में वह जो भी कष्ट सहता है, वह बर्थ मार्क के रूप में अगले जन्म तक साथ नहीं छोडता। स्टडी पिछले जन्मों के ऎसे कई राज खोलती है, जिसमें मौत के दो साल बाद व्यक्ति का पुर्न जन्म हुआ और उसे अपने पिछले जन्म के हर रिश्ते की याद थी। न्यूरोलॉजी विभाग पुर्न जन्म की थ्यौरी को सुलझाने के लिए 20 सालों से काम कर रहा है। एक मामूली सी चोट पर जोर-जोर से चिल्लाने वाले 5 साल के धु्रव (बदला नाम) को जब दिमागी रोग समझ बलटाना से पीजीआई इलाज को लाया गया तब पता चला कि धु्रव की यादों में मौजूदा नहीं पिछले जन्म का डर था। धु्रव की टांग में लगी चोट को जब मां दुपट्टे से बांधने लगी तो धु्रव ने मां को धक्का देकर कहा दूर हो जाओ तुम मेरा गला दबा दोगी। धु्रव ने पिता को बताया कि उसका घर दूसरा है जहां उ

बच्चे को याद है पिछला जन्म

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7 साल के बच्चे को याद है पिछला जन्म, पत्नी को पहचाना अंकुर अवस्थी|Jul 16, 2014 http://www.bhaskar.com (स्कूल में टीचर्स के साथ रजनीश।) अलवर. कुंडलका गांव का सात साल का रजनीश अचानक अपने आपको सवाईमाधोपुर के शेरपुर गांव का केदार कुम्हार बताने लगा और कहने लगा कि वहां पर मेरी पत्नी है, बच्चे है तो सब आश्चर्यचकित हो गए। रजनीश ने यह बात घर पर पिता और स्कूल में क्लास टीचर को बताई। बात बढ़ी तो गांव वालों ने शेरपुर में भी संपर्क किया। वहां से भी लोग आए, उन्होंने दावा किया कि बच्चा जो भी बात बता रहा है वह सच है। उसने अपनी पत्नी कैलाशी और अन्य लोगों को भी पहचान लिया और उनसे बातें की। जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर भर्तृहरि के समीप कुंडलका निवासी रामकरण गुर्जर का बेटा रजनीश गुर्जर खुद को पिछले जन्म का केदार बताता है जो कि सवाईमाधोपुर के शेरपुर रहता था परिजनों का कहना है कि दो साल की उम्र से ही रजनीश पिछले जन्म की बातें बताई पर किसी को यकीन नहीं हुआ और टाल गए। पिछले दिनों जब बालक ने अपने गांव जाने की जिद की तो परिजनों ने शेरपुर गांव से जानकारी हासिल की। बालक द्वारा बताए गए तथ्यों

सावन और महादेव की महिमा

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सावन, सोमवार, शिवलिंग और महादेव की अनंत महिमा Sanjeev Kumar Dubey Tuesday, July 15, 2014 संजीव कुमार दुबे http://zeenews.india.com सावन का महीना और भगवान शंकर यानी भक्ति की ऐसी अविरल धारा जहां हर हर महादेव और बम बम भोल की गूंज से कष्टों का निवारण होता है, मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। यूं तो भगवान शंकर की पूजा के लिए सोमवार का दिन पुराणों में निर्धारित किया गया है। लेकिन पौराणिक मान्यताओं में भगवान शंकर की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन महाशिवरात्रि, उसके बाद सावन के महीने में आनेवाला प्रत्येक सोमवार, फिर हर महीने आनेवाली शिवरात्रि और सोमवार का महत्व है। लेकिन भगवान को सावन यानी श्रावण का महीना बेहद प्रिय है जिसमें वह अपने भक्तों पर अतिशय कृपा बरसाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस महीने में खासकर सोमवार के दिन व्रत-उपवास और पूजा पाठ (रुद्राभिषेक,कवच पाठ,जाप इत्यादि) का विशेष लाभ होता है। सनातन धर्म में यह महीना बेहद पवित्र माना जाता है यही वजह है कि मांसाहार करने वाले लोग भी इस मास में मांस का परित्याग कर देते है। सावन के महीने में सोमवार महत्वपूर्ण होता है। सोमवार का अंक 2

प्रजा-पालक रामराज्य के मूल भूत सिद्धांत

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  प्रजा-पालक रामराज्य  11/3/2012  भ्रष्टाचार , हिंसा , असुरक्षा से जूझ रहे भारत की प्रेरणा और प्रकाश स्तंभ है  प्रजा-पालक रामराज्य दैहिक दैविक भौतिक तापा। रामराज काहुहिं नहिं व्यापा।। सब नर करंहि परस्पर प्रीति। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीति।। (उत्तरकांड 20:1) इस प्रकार मध्य युग में घोर अत्याचारी और निरंकुश विधर्मी/विदेशी शासकों की दासता में पिस रही भारत की जनता को संत कवि तुलसीदास ने रामराज्य और श्रीराम के जीवन का परिचय देकर प्रजा सुख के लिए सत्ता सुख का त्याग और आतताई शक्तियों के संगठित प्रतिकार का पाठ पढ़ाया। रामभक्ति की इस लहर में से छत्रपति शिवाजी और गुरु गोविंद सिंह जैसे राष्ट्रभक्त योद्धा उत्पन्न हुए। वास्तव में त्रेतायुग में अवतरित हुए श्रीराम द्वारा स्थापित रामराज्य की आदर्श व्यवस्था प्रत्येक युग में शासकों और प्रजा के लिए मार्गदर्शक रही है।  युगानुकूल राज्यव्यवस्था आज के संदर्भ में देखा जाए तो अपने देश की सरकार और प्रजा दोनों के लिए रामराज्य की अवधारणा प्रकाश स्तंभ का काम कर सकती है। भ्रष्ट और सत्ता केन्द्रित शासकों क