कविता - गद्दारी सबसे बड़ी बीमारी

कविता - गद्दारी सबसे बड़ी बीमारी

गद्दारी सबसे बड़ी बीमारी,
रूह को खोखला कर जाती है,
इंसान के वजूद से खेलकर,
उसकी पहचान मिटा जाती है।
ये दुश्मन से भी खतरनाक होती,
क्योंकि अपना बनकर आती है,
पीठ में छुरा, होंठों पर हँसी,
यही इसकी सबसे बड़ी साजिश कहलाती है।

जो खुलकर दुश्मनी निभा जाए,
उससे फिर भी निपट सकते हो,
पर जो गले लगकर ज़हर दे,
उससे बचना ही सबसे बड़ा युद्ध हो।
सबसे पहले गद्दार को पहचानो,
हर मुस्कान को सच मत मानो,
कुछ चेहरे नकाबों में जीते हैं,
उनकी फितरत को तुम जानो।

मीठे बोलों की मिठास में,
कई बार मौत घुली होती है,
जो हर वक्त तुम्हारी खुशहाली से जले,
समझो वही गद्दारी बोती है।
जब तक ऐसे लोग साथ रहेंगे,
हर कदम पर चोट लगेगी भारी,
इन्हें जड़ से उखाड़ फेंको,
क्योंकि गद्दारी सबसे बड़ी बीमारी।

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