कविता - राजनीती में लोफर घुस गये
कविता - राजनीती में लोफर घुस गये
राजनीती में लोफर घुस गये,
क़ानून छोटा पड़गया रै।
सत्ता की ओट में बदमाशन से ,
ईमान बौनो हो गया रै।
जिसने कल तक गली घेर्या,
आज वही विधायक है,
लाठी, डर अर झूठ के दम पे,
राज करै—बस ये ही ताकत है।
कोई कोई जतन करो जी,
अब भी बात संभल जावै,
वरना हुडदंग्या की मर्जी,
कल नै हुकुम बन जावै।
जनता बोली—“सब चालू है”,
चुप्पी ने स्याही मिलगी,
लूट-डकैती फाइल बनगी,
महर सत्ता की लगगी।
आज अगर चुप बैठ्या रह्यो,
कल रोवैगो अकेलो,
जब घर तक आग पहुंच जावै,
तब न काम आवै मेलो।
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