कविता - सिफ़ारिशों के आधार पर मिलता है पुरुस्कार



कविता

सिफ़ारिशों के आधार पर मिलता है पुरुस्कार और सम्मान,
जिला हो, संभाग हो या राज की राजधानी, सब तरफ वही व्यवधानी,
योग्यता रह जाती है कोने में धरी खोकर अपना स्थान।
किसी की डिज़ायर,किसी के लेटरपैड,से चढ़ती सफलता की सीढ़ी,
आखिर क्यों इतना गिर गया निज़ाम,
न बचा कोई धर्म,न बचा कोई ईमान।

===1===

मेहनत यहाँ मौन खड़ी, देखती है तमाशा चुपचाप,
जहाँ काबिल हाथ खाली हैं, और अयोग्य ताज के पास।
योग्यता की हार बनती है सिफ़ारिश,
सच की आवाज़ दब जाती है हर बार।
यह सिर्फ़ अन्याय के समान नहीं,
यह अन्याय का सबसे कुरूप अवतार।
जब रिश्ते बिकते हैं अंकों से महंगे,
और ईमान सस्ता हो जाता है,
तब समाज की नींव हिलती है,
और भविष्य अंधेरों में खो जाता है।
कब टूटेगा यह झूठा तंत्र,
कब मिलेगा मेहनत को अधिकार?
जब सिफ़ारिश नहीं, योग्यता बोलेगी,
तभी आएगा सच में उजाला हर बार।


टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

क्रन्तिकारी तात्याटोपे को फांसी नहीं लगी थी

Creation, Consciousness, and Reincarnation: An Integrated Philosophical-Scientific Hypothesis

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

राजा मान सिंह का पुनर्जन्म

हिन्दु भूमि की हम संतान नित्य करेंगे उसका ध्यान

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

ईश्वरीय डिजिटलाइजेशन ही वास्तविक सृजन है - अरविन्द सिसोदिया

भगवान विष्णु का वराह अवतार god vishnu god varah