भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 12 फरवरी, 2026 को लोकसभा में कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एक सारगर्भित प्रस्ताव (Substantive Motion) पेश किया है।
निशिकांत दुबे का प्रस्ताव
इस प्रस्ताव के माध्यम से निशिकांत दुबे ने निम्नलिखित मुख्य मांगें की हैं:
- सदस्यता रद्दीकरण: राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता तुरंत समाप्त की जाए।
- चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध: उन पर आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध (Lifetime Ban) लगाया जाए।
- जांच समिति का गठन: राहुल गांधी के "अनैतिक आचरण" और देश को अस्थिर करने के कथित प्रयासों की जांच के लिए एक विशेष संसदीय जांच समिति बनाई जाए।
राहुल गांधी पर लगाए गए प्रमुख आरोप
निशिकांत दुबे ने अपने नोटिस और बयानों में राहुल गांधी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
- राष्ट्र विरोधी ताकतों से मिलीभगत: दुबे का आरोप है कि राहुल गांधी जॉर्ज सोरोस (George Soros) की संस्था, फोर्ड फाउंडेशन और USAID जैसे विदेशी संगठनों के साथ मिलकर देश को "तोड़ने" या "विभाजित" करने की साजिश कर रहे हैं।
- विदेशी दौरों पर सवाल: उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी थाईलैंड, वियतनाम, कंबोडिया और अमेरिका जैसे देशों की यात्राओं के दौरान भारत विरोधी तत्वों के साथ संपर्क करते हैं।
- देश को गुमराह करना: बजट सत्र (2026) के दौरान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर राहुल गांधी के भाषण को दुबे ने "झूठा" और "देश को गुमराह करने वाला" बताया।
- संवैधानिक संस्थाओं पर हमला: दुबे के अनुसार, राहुल गांधी चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और लोकसभा अध्यक्ष जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर आधारहीन आरोप लगाकर उनकी गरिमा को ठेस पहुँचाते हैं।
- अर्बन नक्सल जैसा व्यवहार: सदन में चर्चा के दौरान दुबे ने राहुल गांधी के व्यवहार को "अर्बन नक्सल" (Urban Naxal) की तरह बताया।
- सेना का अपमान: दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक का हवाला देकर भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय को बदनाम करने की कोशिश की है।
ताजा स्थिति: सरकार ने निशिकांत दुबे के इस निजी प्रस्ताव के बाद राहुल गांधी के खिलाफ अपना 'विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव' फिलहाल टाल दिया है और अब दुबे के प्रस्ताव को विशेषाधिकार समिति या नैतिकता समिति के पास भेजने पर विचार किया जा रहा है।
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🔹 सारगर्भित प्रस्ताव (Substantive Motion) क्या होता है?
लोकसभा में सारगर्भित प्रस्ताव ऐसा प्रस्ताव होता है जिसके माध्यम से किसी सांसद के विरुद्ध प्रत्यक्ष कार्रवाई की मांग की जाती है — जैसे निलंबन, निष्कासन, जांच समिति बनाना या निंदा प्रस्ताव पारित करना।
यह सामान्य प्रश्न या चर्चा से अलग होता है क्योंकि इसमें:
आरोप स्पष्ट रूप से दर्ज होते हैं
सदन से ठोस निर्णय की अपेक्षा की जाती है
🧑⚖️ प्रस्ताव पेश करने वाले सांसद
निशिकांत दुबे (बीजेपी सांसद)
प्रस्ताव का लक्ष्य: राहुल गांधी (लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष)
1️⃣ सदस्यता रद्द करने की मांग
क्या मतलब है?
यदि किसी सांसद पर यह सिद्ध हो जाए कि उसने:
संविधान के विरुद्ध कार्य किया है
देश की संप्रभुता व अखंडता को नुकसान पहुँचाया है
गंभीर अनैतिक आचरण किया है
तो लोकसभा के पास उसकी सदस्यता समाप्त करने का अधिकार होता है।
व्यवहारिक स्थिति
पहले आरोपों की जांच होती है
रिपोर्ट सदन में रखी जाती है
बहुमत से प्रस्ताव पारित होना आवश्यक
👉 सीधे सदस्यता रद्द होना अत्यंत दुर्लभ और असाधारण परिस्थिति में ही संभव है।
2️⃣ आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध
संवैधानिक पक्ष
आज भारत के कानूनों में आजीवन प्रतिबंध का प्रावधान नहीं है।
अधिकतम स्थिति:
अदालत द्वारा दोषसिद्धि पर 6 वर्ष तक प्रतिबंध
या संसद द्वारा विशेष कानून बनाया जाए
अतः यह मांग राजनीतिक दबाव और नैतिक निंदा के रूप में अधिक देखी जा रही है।
3️⃣ विशेष संसदीय जांच समिति का गठन
समिति क्या करेगी?
आरोपों की सत्यता की जांच
गवाह बुलाना
दस्तावेज मांगना
रिपोर्ट प्रस्तुत करना
यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो समिति दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है।
4️⃣ राष्ट्र विरोधी ताकतों से मिलीभगत का आरोप
निशिकांत दुबे का कहना है कि राहुल गांधी ने:
George Soros
Ford Foundation
USAID
जैसे विदेशी संगठनों से जुड़े लोगों के साथ संपर्क कर भारत की राजनीतिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास किया।
विवाद का आधार
विपक्ष का कहना: यह आरोप निराधार
सत्तापक्ष का कहना: विदेशी फंडिंग से राजनीतिक हस्तक्षेप का संदेह
5️⃣ विदेशी दौरों पर सवाल
आरोप है कि राहुल गांधी:
थाईलैंड
वियतनाम
कंबोडिया
अमेरिका
जैसे देशों में भारत-विरोधी समूहों से बातचीत करते हैं।
👉 इस पर अब तक कोई न्यायिक रूप से सिद्ध प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
6️⃣ भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भाषण
बजट सत्र 2026 में राहुल गांधी ने कथित रूप से कहा कि:
समझौता भारत के हितों के खिलाफ है
घरेलू उद्योग को नुकसान होगा
दुबे के अनुसार यह:
तथ्यात्मक रूप से गलत
निवेशकों को भ्रमित करने वाला
है।
7️⃣ संवैधानिक संस्थाओं पर हमला
दुबे का आरोप है कि राहुल गांधी लगातार:
Election Commission of India
Supreme Court of India
लोकसभा अध्यक्ष
पर पक्षपात के आरोप लगाते हैं, जिससे संस्थाओं की साख गिरती है।
8️⃣ "अर्बन नक्सल" जैसा व्यवहार
राजनीतिक शब्दावली में इसका अर्थ है:
संवैधानिक ढांचे के भीतर रहते हुए व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश
युवाओं को भड़काने का प्रयास
यह एक राजनीतिक आरोप है, कानूनी श्रेणी नहीं।
9️⃣ सेना का अपमान करने का आरोप
दुबे का कहना है कि राहुल गांधी ने:
General Manoj Mukund Naravane की अप्रकाशित पुस्तक का हवाला देकर:
सेना की निर्णय प्रक्रिया
रक्षा मंत्रालय
पर सवाल खड़े किए।
सरकार का कहना है कि इससे सेना का मनोबल गिरता है।
🔟 ताजा स्थिति
सरकार ने फिलहाल अपना विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव रोका है
निशिकांत दुबे का प्रस्ताव भेजा जा सकता है:
विशेषाधिकार समिति
नैतिकता समिति
वहीं समिति तय करेगी कि:
जांच होगी या नहीं
और आगे क्या कार्रवाई बनती है
⚖️ निष्कर्ष
यह प्रस्ताव:
अधिकतर राजनीतिक दबाव और नैतिक निंदा का माध्यम है
कानूनी रूप से राहुल गांधी की सदस्यता तुरंत खत्म होना या आजीवन प्रतिबंध लगना अत्यंत कठिन है
अंतिम निर्णय संसद की समितियों और बहुमत पर निर्भर करेगा
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निशिकांत दुबे द्वारा लगाए गए आरोप मुख्यतः राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर न तो किसी अदालत की मुहर लगी है और न ही किसी संसदीय समिति की अंतिम रिपोर्ट आई है।
इसलिए नीचे मैं दो हिस्सों में जानकारी दे रहा हूँ:
बीजेपी सांसदों द्वारा लगाए गए आरोप
राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण
🧑⚖️ जिन पर आरोप लगे
राहुल गांधी
1️⃣ United States (अमेरिका)
🔴 आरोप
राहुल गांधी ने अमेरिका में कुछ कार्यक्रमों और बंद दरवाज़े वाली बैठकों में कहा कि
भारत में लोकतंत्र खतरे में है
संवैधानिक संस्थाएँ स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहीं
दुबे का दावा है कि राहुल ने वहाँ भारत सरकार के खिलाफ माहौल बनाया।
🟢 राहुल गांधी का पक्ष
राहुल ने कहा कि वे विदेशों में वही बातें रखते हैं जो भारत में सार्वजनिक मंचों से कहते हैं।
उनका दावा: यह “देश विरोध” नहीं बल्कि “लोकतंत्र की रक्षा” के लिए आवाज़ उठाना है।
2️⃣ Thailand (थाईलैंड)
🔴 आरोप
दुबे का आरोप है कि राहुल गांधी थाईलैंड में भारत-विरोधी विचारधारा वाले व्यक्तियों से मिलते हैं।
यह भी कहा गया कि ये दौरे “निजी” बताए जाते हैं लेकिन राजनीतिक संपर्क होते हैं।
🟢 राहुल गांधी का पक्ष
कांग्रेस के अनुसार, ये यात्राएँ निजी या अध्ययन-आधारित होती हैं।
किसी साजिश या राजनीतिक फंडिंग से इनकार किया गया है।
3️⃣ Vietnam (वियतनाम)
🔴 आरोप
भारत की आंतरिक राजनीति पर विदेशी मंच से टिप्पणी करने का आरोप।
🟢 पक्ष
कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी ने वहाँ कोई भारत-विरोधी बयान नहीं दिया, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर चर्चाओं में हिस्सा लिया।
4️⃣ Cambodia (कंबोडिया)
🔴 आरोप
भारत को “कमज़ोर दिखाने” वाली बातचीत का आरोप।
🟢 पक्ष
कोई आधिकारिक दस्तावेज़ या रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं है जो इस आरोप की पुष्टि करे।
5️⃣ विदेशी संगठनों से कथित संपर्क
दुबे का आरोप है कि राहुल गांधी:
George Soros
Ford Foundation
USAID
से जुड़े नेटवर्क के लोगों के संपर्क में हैं।
राहुल पक्ष
राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी ने इन संगठनों से किसी “साजिश” या “देश विरोधी एजेंडे” से जुड़ाव से साफ इनकार किया है।
उनका कहना है कि लोकतंत्र, मानवाधिकार और संस्थागत मजबूती पर चर्चा करना अपराध नहीं है।
⚖️ कानूनी स्थिति अभी क्या है?
अभी तक:
कोई FIR
कोई चार्जशीट
कोई अदालत का फैसला
ऐसा कुछ सामने नहीं आया है जो यह साबित करे कि राहुल गांधी ने विदेश में जाकर भारत के खिलाफ अवैध गतिविधि की हो।
✅ निष्कर्ष
👉 अभी की स्थिति में यह कहा जा सकता है कि:
दूसरे देशों से “जोड़ने” का मामला आरोपों तक सीमित है।
राहुल गांधी की ओर से कहा गया है कि उन्होंने केवल लोकतांत्रिक मुद्दों पर राय रखी है।
अंतिम सच तभी सामने आएगा जब कोई संसदीय समिति या अदालत इन आरोपों की जांच करे।
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निशिकांत दुबे द्वारा राहुल गांधी पर लगाए गए विदेश से संबंधित आरोपों के केंद्र में "विदेशी संस्थाओं के साथ मिलीभगत" और "देश को अस्थिर करने" का दावा है।
इन आरोपों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:-
विदेशी संगठनों के साथ संबंध: दुबे ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी के अरबपति जॉर्ज सोरोस (George Soros) की 'ओपन सोसाइटी फाउंडेशन', फोर्ड फाउंडेशन (Ford Foundation) और USAID जैसी संस्थाओं के साथ गहरे संबंध हैं। उनका दावा है कि ये संस्थाएं भारत विरोधी एजेंडे को बढ़ावा देती हैं और राहुल गांधी इनके साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
रहस्यमयी विदेशी यात्राएं: निशिकांत दुबे ने विशेष रूप से राहुल गांधी की थाईलैंड, वियतनाम, कंबोडिया और अमेरिका की यात्राओं पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इन यात्राओं के दौरान राहुल गांधी ऐसे तत्वों से मिलते हैं जो भारत के हितों के खिलाफ हैं।
सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन: उन्होंने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी अपनी इन गुप्त विदेश यात्राओं के दौरान भारत सरकार से मिलने वाली सुरक्षा (Security Cover) का उपयोग नहीं करते हैं, जिससे उनकी गतिविधियों और मुलाकातों पर संदेह पैदा होता है।
फंडिंग का आरोप: दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की "शानदार विदेशी यात्राओं" (Lavish travels) के लिए फंड अक्सर फोर्ड फाउंडेशन जैसी विवादित संस्थाओं से आता है।
विदेशी दबाव का दावा: राहुल गांधी द्वारा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की आलोचना को दुबे ने विदेशी शक्तियों के इशारे पर "देश को गुमराह करने वाला" बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी "अर्बन नक्सल" की तरह व्यवहार कर रहे हैं और बाहरी ताकतों के साथ मिलकर देश के विभाजन की योजना बना रहे हैं।
इन आरोपों के आधार पर, निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष से एक संसदीय जांच समिति गठित करने की मांग की है ताकि राहुल गांधी के इन कथित विदेशी संपर्कों और उनके "अनैतिक आचरण" की गहन जांच की जा सके।
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🧑⚖️ वक्ता
राहुल गांधी
🇺🇸 United States – अमेरिका
📍 प्रमुख मंच
विश्वविद्यालयों और प्रवासी भारतीय कार्यक्रम
थिंक टैंक चर्चाएँ
🗣 राहुल गांधी ने क्या कहा?
भारत में:
मीडिया पर दबाव बढ़ा है
विपक्ष की आवाज़ सीमित की जा रही है
चुनाव आयोग और अन्य संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल
एक चर्चित बयान:
“भारत एक लोकतंत्र है, लेकिन यह दबाव में है।”
🏛 सरकार/बीजेपी की प्रतिक्रिया
बीजेपी नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी
विदेश जाकर भारत की छवि खराब कर रहे हैं
देश के आंतरिक मामलों का अंतरराष्ट्रीयकरण कर रहे हैं
सरकार का पक्ष:
भारत मजबूत लोकतंत्र है और ऐसे बयान भ्रामक हैं।
🇬🇧 United Kingdom – ब्रिटेन
📍 कार्यक्रम
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में संवाद
🗣 राहुल गांधी ने क्या कहा?
“लोकतंत्र सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि संस्थाओं की निष्पक्षता है।”
“अगर संस्थाएँ कमजोर हों तो चुनाव का अर्थ खो जाता है।”
🏛 प्रतिक्रिया
बीजेपी: यह भारत के खिलाफ प्रोपेगैंडा है।
कांग्रेस: यह लोकतांत्रिक चेतावनी है, न कि देशद्रोह।
🇹🇭 Thailand – थाईलैंड
🗣 आरोप क्या हैं?
राहुल गांधी ने निजी यात्रा के दौरान कुछ राजनीतिक लोगों से मुलाकात की।
राहुल पक्ष
यह निजी यात्रा थी।
कोई सार्वजनिक भारत-विरोधी भाषण नहीं दिया गया।
सरकार पक्ष
सवाल उठाया गया कि निजी दौरे में राजनीतिक बैठकें क्यों?
🇻🇳 Vietnam – वियतनाम
🗣 राहुल गांधी ने क्या कहा?
वैश्विक अर्थव्यवस्था
सप्लाई चेन
एशिया की भूमिका
प्रतिक्रिया
कोई ठोस भारत-विरोधी बयान रिकॉर्ड पर नहीं।
फिर भी बीजेपी ने कहा कि राहुल “भारत की कमजोर तस्वीर” पेश करते हैं।
🇰🇭 Cambodia – कंबोडिया
स्थिति
किसी औपचारिक भाषण का आधिकारिक ट्रांसक्रिप्ट सार्वजनिक नहीं।
आरोप केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित।
🌐 विदेशी संगठनों से जुड़ा मुद्दा
नाम लिए गए संगठन:
George Soros
Ford Foundation
USAID
राहुल गांधी का पक्ष
उन्होंने कभी इन संगठनों से फंड लेने या भारत विरोधी एजेंडा चलाने की बात स्वीकार नहीं की।
उनका कहना है: लोकतंत्र और मानवाधिकार पर चर्चा करना सामान्य अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया है।
⚖️ कानूनी सच्चाई
अब तक:
कोई FIR नहीं
कोई चार्जशीट नहीं
कोई अदालत का फैसला नहीं
जो यह साबित करे कि राहुल गांधी ने विदेश में जाकर गैरकानूनी या राष्ट्र-विरोधी काम किया.
🔎 निष्कर्ष
👉 राहुल गांधी के विदेशी भाषणों में मुख्य रूप से:
लोकतंत्र
संस्थाओं की स्वतंत्रता
विपक्ष की भूमिका
पर बातें होती हैं।
👉 सरकार और बीजेपी इन्हें देश की छवि खराब करने वाला बताती है, जबकि राहुल गांधी इन्हें लोकतंत्र बचाने की आवाज़ कहते हैं।
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