कविता - सतर्क भारत – अजय भारत”- अरविन्द सिसोदिया




कविता -“ मोदी युग का सतर्क भारत – अजय भारत”
- अरविन्द सिसोदिया
(ओजस्वी राष्ट्रकाव्य)

यह पहली बार हुआ है, आतंकी दुश्मन रंगे हाथ धरा गया है,
उनका मकसद फैल किया है, 
देश को बड़े खून खराबे से बचा लिया है।
यह मोदीयुग की सुरक्षा, यह मोदी युग की सतर्कता ,
जहरीले साँपो का फन कुचल दिया है।
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जो छिपे अंधेरों में बारूद लेकर आए,
उन्हें वे आज उजालों में पकड़े गए हैं।
जो जहर बनाकर हवाओं में घोला करते थे,
वे खुद अपने मंसूबों में फँसे गए हैं।

ये वही धरती है जहाँ से आवाज़ उठती है —
"भारत किसी से झुके नहीं,
शांति चाहो तो साथ रहो,
वरना हर वार का जवाब मिलेगा यहीं!"

दिल्ली के कण-कण में चेतना जागी है,
हर नागरिक प्रहरी बन भागी है।
अब हर गली हर चौक कहे —
"संदेह दिखे तो राष्ट्र कहे!"

नहीँ अब डर, नहीँ अब भ्रम,
भारत का मन हुआ है दृढ़तम।
अब दुश्मन का हर छल विफल होगा,
हर षड्यंत्र भस्म होकर पल होगा।

सीमा से लेकर चौक-चौराहों तक,
जाग्रत हैं सैनिक और नागरिक सब।
सत्य की मशाल लिए चलता भारत,
अब नहीं रुकेगा, नहीं झुकेगा —
क्योंकि यह मोदी का युग है,
सतर्कता और सुरक्षा का युग है।
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