कविता - सत्य सनातन नित्य नूतन की जननी, भारतमाता की जय हो



🌺 सत्य सनातन नित्य नूतन की जननी, भारत माता की जय हो 

जय जय भाव भारती भारत माता की जय हो
जय जय वातसल्य भारती, भारत माता की जय हो।
सत्य सनातन नित्य नूतन की जननी, भारत माता की जय हो ॥
===1===
वेदों की शाश्वत धारा यह, ऋषियों की तपोभूमि यह,
जिसकी ज्ञान ज्योति से जग में उजियारा,
करुणा की अनुपम कोख भूमि यह ॥
जय जय भाव भारती, भारत माता की जय हो॥
===2===
ब्रह्मा विष्णु महेश की धारण धरा यह,
दुर्गा काली लक्ष्मी सरस्वती, स्वरूपा अनंतशक्ति धरा यह ॥
करुणा, दया भक्ति शक्ति और ममता की छाया,
जय जय भाव भारती, भारत माता की जय हो॥
===3===
श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम, कृष्ण प्रेम रसधारी,
नृसिंह बन अधर्म हर, बुद्ध करुणा अपारी ।
महावीर सत्य पथिक, जग को दिखलाया,
जय जय भाव भारती, भारत माता की जय हो॥
===4===
अयोध्या मथुरा काशी द्वारका, पुरी, रामेश्वर धाम,
केदार बद्री कैलास बसे, शंकर नगरी का मान ॥
गंगा यमुना गोदावरी , चरणों को नहलाएँ,
हिमगिरि मुकुट सुशोभित, सागर शीश झुकाएँ॥
जय जय भाव भारती, भारत माता की जय हो॥
===5===
धर्म ध्वजा नभ में फहराए, गूँजे हरि हर नाम,
यज्ञ हवन आरती गूँजे, पावन हो हर धाम॥
वीर प्रसूता मातृभूमि यह, त्याग तपस्या शौर्य की खान,
माँ तेरी शरण जो आए, पाए भव से त्राण॥
जय जय भाव भारती, भारत माता की जय हो॥
===6===
भक्ति शक्ति विवेक की माता, सद्गुणों करती दान,
तेरी कृपा से हो जग में, शांति समृद्धि महान॥
जय जय भाव भारती, भारत माता की जय हो॥
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