कविता - जीवन गीत
जीवन गीत
जीवन में आए उतार-चढ़ाव,
सिखा जाए हर नया सबक।
बंद घड़ी भी दो बार सही समय बताती,
कभी किसी को हल्का न समझो ।
जो बुराई खोजते हर पल,
जख्मों पर ही बैठते, खो देते वे अपना कल।
गरीबी में टूटते रिश्ते सच्चे,
पैसे में बनते हज़ार दोस्त ऐसे।
संकट में जो साथ खड़ा
वह ईश्वर से भी बड़ा।
मुस्कान से खिल उठे जहां,
भीगी पलकों से धुंधला वहां।
जल्दी मिली चीजें जल्दी छूट जाएँ,
धीरे मिली चीजें उम्र भर निभाएँ।
बीमारी आए खरगोश की चाल,
जाती है कछुए की चाल ।
पैसा आए कछुए की चाल,
खरगोश बनकर चला जाए ।
धन है तो उसे संभाल,
जीवन भर वही करता कमाल।
छोटी खुशियों में खोजो आनंद,
बड़ी खुशियाँ होती हैँ बहुत कम,
ईश्वर वही देता जो सही है,
मांगना नहीं, समझना ही है सच्चाई।
असफलता से कभी न हारो,
आखिरी चाबी ताला खोल दे बार-बार।
एक अकेला सूरज सबको रोशन करे,
अकेलेपन भी शक्ति भर दे अपार ।
रिश्तों को मत तोड़ो, भले वे स्वार्थी हों,
आग बुझा सकते, प्यास नहीं कभी हों।
शब्द न आए तो मौन रहो,
माँ समझती हर बात, यही है भरो।
शर्म की अमीरी से, इज्जत की गरीबी बेहतर,
उतार-चढ़ाव जीवन को बनाते मजबूत हर कदम।
अच्छाई की तलाश मत करो, खुद अच्छे बनो,
किसी की तलब वहीं पूरी हो जाएगी मन-मन।
🌹 जय श्री सीताराम 🌹
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