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क्रांतिपुत्र अमर शहीद मंगल पाण्डे : मे सौ जन्मों तक भारतमाता के लिये अपना बलिदान करता रहूं

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      क्रांतिपुत्र अमर शहीद मंगल पाण्डे :  मे सौ जन्मों तक भारतमाता के लिये अपना बलिदान करता रहूं   अमर शहीद मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा में एक ब्रह्मण परिवार में हुआ. इनके पिता का नाम दिवाकर पांडे और माता का नाम अभय रानी था. हालांकि कई इतिहासकार ने बताया है कि उनका जन्म फैजाबाद जिले की अकबरपुर तहसील के सुरहुरपुर गांव में हुआ. आज (19 जुलाई 2022 ) मंगल पांडे 195वीं जयंती है.   अंग्रेजों के खिलाफ सिर उठाने वाले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले क्रांतिकारी के तौर पर विख्यात मंगल पांडे ने पहली बार 'मारो फिरंगी को' का नारा देकर भारतीयों का हौसला बढ़ाया था. उनके विद्रोह से ही प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत हुई थी. अमर शहीद मंगल पांडे की 195वीं जयंती  अमर शहीद मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा में एक ब्रह्मण परिवार में हुआ. इनके पिता का नाम दिवाकर पांडे और माता का नाम अभय रानी था. हालांकि कई इतिहासकार ने बताया है कि उनका जन्म फैजाबाद जिले की अकबरपुर तहसील के सुरहुरपुर गा...

क्रन्तिकारी तात्याटोपे को फांसी नहीं लगी थी

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                          *** 1857 की क्रांति के महानायक तात्या टोपे *** 1857 की क्रांति के इस महानायक तांत्या टोपे का जन्म, 1814 में हुआ था। बचपन से ही ये अत्यंत सुंदर थे। तांत्या टोपे ने देश की आजादी के लिये हंसते-हंसते प्राणो का त्याग कर दिया। इनका जन्म स्थल नासीक था। इनके बचपन का नाम रघुनाथ पंत था। ये जन्म से ही बुद्धिमान थे। इनके पिता का नाम पांडुरंग पंत था। जब रघुनाथ छोटे थे उस समय मराठों पर पेशवा बाजीराव द्वितीय का शासन था। रघु के पिता बाजी राव के दरबार में कार्यरत थे। कई बार बालक रघु अपने पिता के साथ दरबार में जाते थे। एक बार बाजी राव बालक की बुद्धिमानी देखकर बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने बालक को एक टोपी उपहार में दी और उन्होंने उनको तांत्या टोपे नाम दिया। उसी दिन से लोग इन्हें इसी नाम से पुकारने लगे।   उस समय ब्रितानी भारत में व्यापार करने के लिये आए थे। लेकिन भारत के राजा आपसी फ़ूट के कारण आपस में ही झगड़ा किया करते थे इसलिये फ़िरंगी आसानी से यहां अपने...

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की ऐसी उपेछा ..? शैम - शैम !

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में हर साल 10 मई 1857 की क्रांति में शहीदों को भारत सरकार का श्रद्धांजलि विज्ञापन तलाशता  हूँ ।  इस साल 2014 में भी नहीं मिला। केंद्र की कांग्रेस सरकार कैसे कह सकती है कि वह इस देश की पार्टी है ?  शैम  शैम !!  - अरविन्द सिसोदिया यह वह धरती है जहाँ वीर उगाये  जाते हैं , तलवारों की धारों पर शीश चढ़ाये  जाते हैं |   क्या कोई जीतेगा इसको , यहाँ हार सुलाई जाती है ,  शौर्य - तेज की हर सुबह हुंकार लगाई  जाती है , युद्ध - मृत्यु का सतत मंजर, युग युग से हमनें देखा है , जीवन देकर,राष्ट्र जीवन की अमरता को हमनें साधा है !                                                - अरविन्द सिसोदिया    ऐसा लगता हमारे देश पर फिरसे फिरंगी शासन  हो गया है .., देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 आज के ही दिन 10 मई से प्रारम्भ हुआ  था ! यह दिन उन महा नायकों के प्रति स्मृति ...