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VB-G RAM G मनरेगा का अपडेट स्वरूप है वीबी -जी रामजी, इसे ठीक से समझें

VB-G RAM G (Viksit Bharat - Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission - Gramin) एक नया कानून है जिसे भारत सरकार ने 2025 के अंत में मनरेगा (MGNREGA) की जगह लेने के लिए पेश किया है। यह योजना ग्रामीण भारत को 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य से जोड़ने के लिए तैयार की गई है।  इस योजना का पूरा विवरण नीचे दिया गया है: 1. पूरा नाम (Full Form) VB: विकसित भारत (Viksit Bharat) G: गारंटी (Guarantee) R: रोजगार (Rozgar) A: आजीविका (Ajeevika) M: मिशन (Mission) G: ग्रामीण (Gramin)  2. मुख्य प्रावधान और बदलाव रोजगार के दिनों में वृद्धि: मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिनों के रोजगार को बढ़ाकर अब प्रति ग्रामीण परिवार 125 दिन कर दिया गया है। साप्ताहिक भुगतान: मजदूरी का भुगतान अब 15 दिनों के बजाय साप्ताहिक आधार (Weekly) पर किया जाएगा। कृषि अवकाश: खेती के मुख्य सीजन (Peak Season) के दौरान काम को अस्थायी रूप से रोकने का प्रावधान है ताकि कृषि कार्यों के लिए मजदूरों की कमी न हो। फंडिंग का ढांचा: यह अब एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच खर्च का बँवारा 60...

मनरेगा के अपडेट स्वरूप " वीबी-जी रामजी " में श्रम दिवस बढ़े, भुगतान टाइमिंग तय हुई , कांग्रेस का बचाओ बचाओ सिर्फ झूठ है – अरविन्द सिसोदिया

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मनरेगा के अपडेट स्वरूप " वीबी-जी रामजी " में श्रम दिवस बढ़े, भुगतान टाइमिंग तय हुई , कांग्रेस का बचाओ बचाओ सिर्फ झूठ है – अरविन्द सिसोदिया 14 जनवरी, कोटा। भाजपा राजस्थान के मीडिया संपर्क विभाग के प्रदेश सह संयोजक अरविन्द सिसोदिया ने “मनरेगा बचाओ” के नाम से कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे अभियान को पूरी तरह भ्रामक और झूठ का पुलिंदा बताया है। " उन्होंने कहा कि ' कांग्रेस जानबूझकर झूठ बोल कर, भ्रम फैला कर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में मनरेगा योजना को भ्रष्टाचार मुक्त और अधिक मजबूत किया गया है। " सिसोदिया नें बताया कि " वीबी-जी रामजी योजना अर्थात विकसित भारत गारंटी – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) मनरेगा का ही परिवर्तित और सशक्त नाम और स्वरूप है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को मज़बूत बनाकर 2047 तक “विकसित भारत” के लक्ष्य को हासिल करना है। यह योजना रोजगार के साथ आजीविका के स्थायी अवसर पैदा कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने का माध्यम बनेगी, जिससे गांवों में पलायन...

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान प्रधानमंत्री मोदीजी का संबोधन

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गुजरात में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान प्रधानमंत्री का संबोधन 11 Jan, 2026 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी का संबोधन..... गुजरात में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान प्रधानमंत्री का संबोधन जय सोमनाथ।  जय सोमनाथ।  गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल, ऊर्जावान युवा उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी जी, गुजरात सरकार में मंत्री जीतू भाई वाघाणी, अर्जून भाई मोढवाड़िया, डॉ प्रद्युम्न वाजा, कौशिक भाई वेकरिया, सांसद राजेश भाई, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों। आज देश के कोने-कोने से लाखों लोग जुड़े हमारे साथ, उनको भी मेरी तरफ से जय सोमनाथ।    साथियों, ये समय अद्भुत है, ये वातावरण अद्भुत है, ये उत्सव अद्भुत है, एक ओर स्वयं देवाधिदेव महादेव, दूसरी ओर समुद्र की विशाल लहरें, सूर्य की ये किरणें, मंत्रों की ये गूंज, आस्था का ये उफान और इस दिव्य वातावरण में, भगवान सोमनाथ के आप सब भक्तों की उपस्थिति, ये इस अवसर को दिव्य बना रही है, भव्य बना रही है। और मैं इसे अपना बहुत बड़ा सौभाग्य मानता हूं, कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में, मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व...

आपातकाल बंदीयों की पेंशन, अन्य मुकदमेँ होनें पर miss & dir

राजस्थान उच्च न्यायालय - जोधपुर उद्धरण और संदर्भ9 उद्धरण | 0 द्वारा उद्धृत एआई टैग, शोध नोट्स, संरचनात्मक अंकन उपकरण और प्राथमिकता विश्लेषक ▶संरचनात्मक अंकन उपकरण सोभ सिंह बनाम राजस्थान राज्य... 26 नवंबर, 2025 को लेखिका: नूपुर भाटी बेंच: नूपुर भाटी [2025:आरजे-जेडी:51342]       राजस्थान उच्च न्यायालय मे ,जोधपुर      एसबी सिविल रिट याचिका संख्या 7071/2025 श्री भीम सिंह के पुत्र सोभ सिंह, लगभग 89 वर्ष की आयु के थे। निवासी ग्राम- हरसाणी (तनु रावजी), तहसील- गडरा रोड, जिला- बाड़मेर (राजस्थान)।                                                                      ----याचिकाकर्ता                                      बनाम 1. राजस्थान राज्य, सचिव विभाग के माध्यम से          सामा...

टैरिफ़ वार में आंतरिक मजबूती ही रामबाण उपाय – अरविन्द सिसोदिया

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टैरिफ़ वार में आंतरिक मजबूती ही रामबाण उपाय – अरविन्द सिसोदिया कोटा, 9 जनवरी। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्याशी एवं भारत–तिब्बत सहयोग मंच के प्रांतीय महामंत्री अरविन्द सिसोदिया ने अमरीकी टैरिफ़ वार और उसके द्वारा अपनाई जा रही स्वघोषित तानाशाही प्रवृत्तियों के संदर्भ में भारत की आंतरिक एकता और राष्ट्रीय मजबूती पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि " वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में देश के नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी की सरकार के साथ एकजुट होकर खड़े रहना ही समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।" सिसोदिया ने कहा कि " देश, काल और परिस्थितियों के मद्देनजर हमें समसामयिक चुनौतियों की विशिष्टताओं को समझते हुए अपने कदम तय करने होंगे। " उन्होंने कहा कि " केवल बयानबाजी या भावनात्मक प्रतिक्रियाएं किसी भी राष्ट्र को सशक्त नहीं बनातीं। वास्तविक शक्ति वही होती है जो संकट की घड़ी में ठोस निर्णयों, अनुशासित कार्यप्रणाली और राष्ट्रीय हित में उठाए गए व्यावहारिक कदमों से सामने आती है। हमारी असली परीक्षा अनुशासन, साहस और हमारे कार्यों से होती है, न कि...

चार नॉमिनी बनाने की व्यवस्था से झगड़े और बढ़ेंगे - अरविन्द सिसोदिया

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चार नॉमिनी बनाने की व्यवस्था से झगड़े और बढ़ेंगे - अरविन्द सिसोदिया  कोटा 8 जनवरी। सामाजिक समस्याओं के प्रति जागरूक, राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं भारत तिब्बत सहयोग मंच प्रांतीय महामंत्री अरविन्द सिसोदिया नें बैंकिंग व्यवस्था में नॉमिनी बनाने की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त करने की मांग करते हुये कहा है कि " इससे परिवार में धोखाधड़ी और आपराधिक विवाद बड़े हैँ। वास्तविक मालिकों का धन नॉमिनी लूट लेता है और उस धन का उपयोग और उपभोग नॉमिनी करता है वहीं वास्तविक उत्तराधिकारी लंबी अदालती लड़ाई में उलझें रहते हैँ। और बड़ी हानी को प्राप्त होते हैँ।" सिसोदिया नें माननीय प्रधानमंत्री महोदय, माननीय गृह मंत्री , माननीय वित्त मंत्री ,माननीय वाणिज्य मंत्री एवं विधि एवं क़ानून मंत्री भारत सरकार तथा रिजर्व बैंक के गवर्नर को मांगपत्र भेज कर मांग की है कि " नॉमिनी मात्र धन संभालने वाला ट्रस्ट्री होता है, उसे मालिकाना हक प्राप्त नहीं है। नॉमिनी को बैंक से प्राप्त राशि को वास्तविक उत्तराधिकारीयों को संभलाना होता है। इस प्रकार एक की जगह चार नॉमिनी तक़ बढ़ा...

अंग्रेजों का षड्यंत्रकारी गठजोड़, भारत को सावचेतना रहना बेहद ज़रूरी है - अरविन्द सिसोदिया

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 अंग्रेजों का षड्यंत्रकारी गठजोड़,  भारत को सावचेतना रहना बेहद ज़रूरी है - अरविन्द सिसोदिया  आलेख – अरविन्द सिसोदिया (वरिष्ठ लेखक एवं विश्लेषक) पिछले एक दशक में भारत की राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक स्थिति में उल्लेखनीय सकारात्मक वृद्धि के साथ पोजोटिव परिवर्तन आया है। आज भारत केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर निर्णायक भूमिका निभाने वाला परमाणुशक्ति सम्पन्न राष्ट्र भी है। किंतु इतिहास साक्षी है कि जब भी कोई राष्ट्र सशक्त होता है, तो उसके विरुद्ध प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों प्रकार की चुनौतियाँ भी अन्य दुराग्रही ताकतों के कारण जन्म लेती हैं। वर्तमान परिदृश्य में भारत को ऐसी ही चुनौतियों का सामना अंतरराष्ट्रीय प्रभाव रखने वाले समूहों, सांम्प्रदायिक विस्तारवादियों, वैचारिक नेटवर्कों और आर्थिक दबावों के रूप में करना पड़ रहा है। भारत को उदीयमान गति देनें वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी और भाजपा को रोकने और प्रभावहीन करने के सेंकड़ों षड्यंत्र चल रहे हैँ, जो मूलतः भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और संविधानत्व को प्रभावित करते हैँ। अमेरिका और यूरोप म...

कविता - कैसा राष्ट्र बना अमरीका,जहां तेल वहाँ टपकी लार है

कविता -  कैसा राष्ट्र बना अमरीका,जहां तेल वहाँ टपकी लार है  अमरीका ने फिर से अत्याचार ढ़हाया है। स्वतंत्र राष्ट्र पर जुल्म और प्रहार दोहराया है। तानाशाह बनकर मानवता रौंदी गई, कार्यवाही की आड़ में डकैती बोई गईं, तेल हड़पने का सारा जाल बिछाया है। अमरीका ने फिर से अत्याचार ढ़हाया है। ===1=== वेनेज़ुएला की संप्रभुता पर, सैन्यशक्ति से किया वार, जोरजबरदस्ती बदला, मतपेटी से चुनी गईं सरकार, जनादेश कुचला, लोकतंत्र की की हत्या, कैसा राष्ट्र बना अमरीका, जहां तेल वहाँ टपकी इसकी लार। ===2=== किस कानून ने दिया दूसरे देश का ताज तय करने का अधिकार ? किस नैतिकता ने दी संप्रभुता कब्जानें का अधिकार ? जो ताक़त से सरकार गिराए, वह मानव नहीं शैतान कहाये। तानाशाही की यह तस्वीर, तुम्हे खलनायक ठहराती है। ===3=== कंपनियों की मेज़ पर जनता का भविष्य लिखा जाता है, दूतावासों के कमरों में सत्ता से षड्यंन्त्रों का दृश्य दिखता है, “स्वतंत्र चुनाव” को प्रभावित करने डालर डलता है। इतना बड़ा शैतान,भगवान बना फिरता है। ===4=== ख़ुफ़िया तंत्र और पूँजी का यहाँ अजब संयोग, अस्थिरता,भय और विघटन को बोया जाता है। दक्षिण एशिया भ...

यूरोप नें अपने हैप्पी न्यू ईयर पर दुनिया को "युद्ध गिफ्ट" किया - ड़ा इन्द्रेश कुमार

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यूरोप नें अपने हैप्पी न्यू ईयर पर दुनिया को "युद्ध गिफ्ट" किया - ड़ा इन्द्रेश कुमार  दिल्ली /कोटा 6 जनवरी। भारत तिब्बत सहयोग मंच की ऑनलाइन राष्ट्रीय वर्चुअल बैठक सोमवार रात्री में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं मंच के मार्गदर्शक ड़ा इन्द्रेश कुमार के मुख्य मार्गदर्शन में सम्पन्न हुई। बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री पंकज गोयल का सानिध्य एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष स्वामी दिव्यानंद महाराज, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामकिशोर पसारी,राष्ट्रीय वरिष्ठ महामंत्री रविंद्र गुप्ता नें संबोधित किया, संचालन राष्ट्रीय महामंत्री राजेंद्र प्रसाद कामदार एवं धन्यवाद राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य श्यामसुंदर मंत्री नें किया। वर्चुअल बैठक में कोटा से चित्तौड़ प्रान्त के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द कौशल, प्रांतीय महामंत्री अरविन्द सिसोदिया सहित प्रांतीय पदाधिकारीयों नें भाग लिया। मंच के मार्गदर्शक ड़ा इन्द्रेश कुमार नें अंग्रेजी नववर्ष के संदर्भ में कहा कि " यूरोप के लोगों नें यूरोपियन कैलेंडर के हैप्पी न्यू ईयर के अवसर पर दुनिया को खुशी, खुशहाली, मानवता, शांति, भाईचारा न देकर, युद्ध गिफ्ट किया है...

कविता - सावधान हो सरकार,सावधान !

कविता - सावधान हो सरकार सावधान ! सावधान हो सरकार सावधान ...! एक विपक्षी नेता विदेश जाता है, देश विरोधी षड्यंत्र वहाँ से लाता है। पूरा मजमा आराजकता का फैलाता है। हर अड़ंगा देश हित के कामों में लगाता है। इसका रखो जम कर ध्यान, सतर्कता से करो समाधान। सावधान हो सरकार सावधान ...!  ==1== जब जब वह विदेश गया, शिकायतें फर्जी साथ ले गया, वहाँ भारत को कटघरे में खड़ा कर, शैतानी तालियों बजबाता है। विदेशी मंचों पर झूठ के आँसू बहाता हैं, देश की बदनामी का शौक इसे कुछ ज्यादा है। सावधान हो सरकार सावधान ...! ==2== अडानी - अंबानी रोज़ चिल्लाता, पर विदेशी व्यापारियों की लूट पर, हमेशा मौन साध जाता है। राफेल पर अड़ंगा, पैगासस पर झूठा तूफान, हिड्नेवर्ग से किया देश का भारी नुकसान। जनता जिन्हे चुनती है, उनके खिलाफ ये षड्यंत्र चलाता है। सावधान हो सरकार सावधान...! ==3== वंशवाद के आधार पर, बिना चुने कुर्सी पाना चाहता है। कुर्सी नहीं मिली तो, देश को जलाना चाहता है। इनके इरादे शत्रुओं जैसे हैँ, शत्रुओं जैसी भाषा बोली इसकी, इनके आराजकतावाद पर, राष्ट्रहित में काबू पाना है। सावधान हो सरकार,सावधान...! ==4== कभी लोकतंत्र...

कविता - राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे

कविता - राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे, थैं बताओ सात महल कसी ठणगी रे। राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे, थैं बताओ सात महल कसी ठणगी रे। ===1=== वोटां मांगै हाथ जोड़ कै, झुक-झुक आयो, गादी मिलती ही नेता जी रंग बदलायो। गांव री गल्ली भूल ग्यो, शहर मं रम ग्यो, जनता रो दुख-दर्द सारा कागजां मं दब ग्यो। राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे, थैं बताओ सात महल कसी ठणगी रे। ===2=== बोलै ही बोलै, सुनै कोय नी रे, गरीब री हांक समझै कोय नी रे। उद्घाटन-भाषण, फीता-फोटो भारी, पांच बरसां मं काम कर्यो बस माइक-मारी। राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे, थैं बताओ सात महल कसी ठणगी रे। ===3=== अब आयो चुनाव, दूरबीन हाथां लई, टोळा-टोळा ढूंढै जनता किणी गई। कार्यकर्ता गायब, नारा नी उठे, जिंदाबाद बोलण वाला कोय नी दिखे। राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे, थैं बताओ सात महल कसी ठणगी रे। ===4=== जनता बोलै अब आंख खुल गी रे, झूठी बातां सूं किस्मत नी धुल गी रे। काम करोगो तो मान-सम्मान मिलसी, नांई तो कुर्सी सपना बन कै रहसी। राशन भाषण चाटन सूं बात न बणगी रे, थैं बताओ सात महल कसी ठणगी रे। ===समाप्त===

कविता - गिरेवान में जब झाँकोंगे तब खुद को पहचानोगे

कविता - गिरेवान में जब झाँकोंगे तब खुद को पहचानोगे  धर्म से देश तोड़ा,जाति से समाज बाँटा, वंश को सत्ता सौंपकर, लोकतंत्र को ठेंगा दिखाया। सभ्यता, संस्कृति और संविधान की उपेक्षा की, स्वतंत्रता के नाम पर, देश को नाकाम किया। गिरेवान में जब झाँकोंगे,तब खुद को पहचानोगे। ===1=== आपातकाल में आज़ादी कुचली, सरकारें गिरा गिरा कर जनादेश को रौंदा, मनचाहों को कुर्सी बाँटकर योग्यता का गला घोंटा। इतना सब करने के बाद भी शर्म नहीं, हर करतूत काली और नैतिकता का पाठ वो पढ़ाते, गिरेवान में जब झाँकोंगे,तब खुद को पहचानोगे। ===2=== अपने इतिहास से मुँह मोड़कर जा नहीं सकते, दुश्मन गठजोड़ की  गुनाहों की लंबी फेहरिस्त लिए फिरते हो, सत्ता गई तो शोर मचाया, लोकतंत्र खतरे में बताया, जब सत्ता थी तब कभी संविधान याद नहीं आया  गिरेवान में जब झाँकोंगे,तब खुद को पहचानोगे। ===3=== अपने ही वतन को दुनिया में नीचा दिखाया, जाती खुद की छिपाई, धर्म खुद का छिपाया, पूरे देश में दशकों तक़ तुष्टिकरण चलाया, गद्दारों से भी बढ़ कर, शत्रुता निभाई, जनमत से चुने हुओं को भी, गालियां दिलवाईं, मत भूलिए आपको समाज भी सजा देगा। गिरेवान...

कविता - लोकतंत्र अब सिर्फ नाम है

कविता - लोकतंत्र अब सिर्फ नाम है  सुख सुविधा में डूबी दुनिया, लोकतंत्र अब सिर्फ नाम है। पूँजीवाद का कब्ज़ा इसपे, गरीब दर्शक मात्र है। ==1== सपनों की भी कीमत लगती, इंसान अब इक माल है। सच बिकता है बोली में, झूठ यहाँ बेमिसाल है। ==2== सत्ता सुनती कुबेरों की, भूख में कहाँ आवाज़ है । महलों में नीति लिखी जाती, झोपड़ियाँ को बचे खुचे की आस है । ==3== फिर भी उम्मीद साँस लेती है, टूटा नहीं विश्वास है। आज न सही,कल तो बदलेगा, इतिहास इसी का गवाह है। ==समाप्त ==

कविता - मानवता को कर्तव्य पथ बनाएं

कविता - मानवता को कर्तव्य पथ बनाएं बछड़े के हक़ का दूध पीते, गौ को माता कहते हैं, कैसे हैं निर्लज्ज हम, पापकर्म को जीते हैं, और धर्म–धर्म कहते हैं, अधर्म को ही पीते हैँ। ==1== सच यही है कि हम अपने स्वार्थ को जीते हैं, भगवान से भी, मनोरथ-पूर्ति का काम लेते हैं। जग को उजाला देते फिरते, पर अंतर्मन को खोते हैँ। बाहर दीप जलाते हैं हम, पर मन का अँधियारा जीते हैँ। ==2== सुविधाओं की पूजा में डूबकर, संवेदना को मार देते हैं, संपत्ति को हड़पने में, न्याय को भी ताड़ देते हैँ। अपने ही हाथों से हम, मानवता को हार देते हैं। धर्म से कर्तव्य को खाली कर, हम स्वार्थ की महामारी हैँ। ==3== अरे ईश्वर कहता है, पुरुषार्थ करो, इतिहास रचो, दया-करुणा को जगाओ, ईश्वर की असली इच्छा, प्रेम को अपनी पूँजी बनाओ। ईश्वर तो हर पीड़ा में दर्द हरता, हर भूखे की आवाज़ आश बनता, जिस दिन यह समझ लिया हमने, उस दिन वह हर इंसान, इंसान है। ==4== आओ अब तो जाग जगाएं, यह प्रण लें, स्वार्थ से हट जाएँ , दया, करुणा और प्रेम से, मानवता को कर्तव्य पथ बनाएं , अपना धर्म बनाएं  अपना मर्म बनाएं। == समाप्त==

कविता - राजनीती बेजार, निर्लज्जता की हदें पार

कविता - राजनीती बेजार, निर्लज्जता की हदें पार - अरविन्द सिसोदिया  क्या बीमारी आई है, राजनेताओं में अय्याशी छाई है, पहले भी थे गुण और दोष पर , मगर अब निर्लज्जता आई है। ===1=== अमरीका में खूब फ़ज़ीहत, मी-टू की है सख़्त ज़रूरत, निर्लज्जता भी हदें पार, बड़े बड़े बेशर्म और बेज़ार..! ===2=== अब सच के पन्ने खुलते जाते, पाखंड के चेहरे उजागर आते, गुनाह जो दबे थे ताक़त से, न्याय की मेघा में बेनक़ाब सारे। ===3=== सोचो कैसा शर्म का दौर था, जहाँ इज़्ज़त पर थी राजनीती की खार, जोर जबरदस्ती की इच्छा से, अपराधी दिख रही थी सरकार ! ===4=== पर आँखों से पर्दा हटा है, सच का सूरज रोशन खड़ा है, जिन्हें था भरोसा अँधेरे पर, उन्हें उजाले ने जा पकड़ा है। ===5=== ये मी-टू का साहस था, जिससे आग भड़कनी थी, साहस की चट्टानों नें  शोषण की अति खोली थी। ===6=== चुप्पी के मुंह से ताले टूटे, अपराधी जंजीरों में जकडे, कानून सही जागा मगर, बचे हुये अनेकों हैँ। ===7=== समाज उन्हें पहचानें, जो रिश्वत में इज्जत देतें हैँ, मनमाफिक पद पानें को, बेटियों को बेंच देते हैँ। इतिहास तुम्हारी कालिख को, भूल नहीं सकता ! काला नाम तुम्...

2025 में जब जब दुनिया डगमगाई, मोदी ने आगे बढ़कर संभाल लिया

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2025 में जब जब दुनिया डगमगाई, मोदी ने आगे बढ़कर संभाल लिया वर्ष 2025 भारतीय राजनैतिक और कूटनीतिक इतिहास के लिहाज़ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में निश्चिन्तता का वर्ष रहा है। इस वर्ष दुनिया कई बार संकटों से डगमगाई, डिफॉल्टर होने की कगार पर पहुंची, दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं को संकट उत्पन्न हुये, किन्तु मोदीजी के सार्थक प्रयासों से इसे पटरी पर लाने के प्रयास सार्थक रहे है। 2025 में विश्वभर अंदर समस्याओं निवृत्तियों में घिरी - अमेरिका की सत्ता की पार्टी और राष्ट्रपति अस्थायित्व शामिल/ (स्पष्ट) विश्वभर अनेक देशों के लिए यह चुनौती थी। चीन, वैश्विक व्यापार की दिशा बदलने के प्रयास में लगा रहा, रूस ऊर्जा की आपूर्ति को हथियार बनाकर विश्व को धमकाता रहा। ऐसे समय जब दुनिया में अराजकता का दौर अपने निर्णायक चरण में पहुंचा हुआ था — भारत बलपूर्वक अपनी आर्थिक स्थिति और विश्व नेतृत्व को आगे ले जाने की वैज्ञानिक क्षमता से लगातार उन्नति करता रहा। गत वर्षों की भांति वर्ष 2025 में भी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिज्ञा ‘विश्व गुरु’ बनने की दिशा में अडिग रही। जहां दुनिया की...

कविता - जनमत रे तू जाग

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“ जनमत रे तू जाग ”  आसमान पर उगता सूरज कहता, जनमत रे तू जाग। सत्ता का मेला है, लोकतंत्र का खेला है, वादों की दुकानें, झूठ यहाँ पकवान । अधिकारों की थाली में परोसा जाता आसमान । गरीब की शवयात्रा बन गया, पूंजीवाद का शैतान। ===1=== नेता भाषण देता, लंबी लंबी बांहे फैलाये, उपदेशो के ग्रंथ लिए, उपकारों का शास्त्र पढ़ाये। भगवान से भी बढ़ कर अपने को बताये। पर सम्पन्नता के पहाड़ कहां से आये यह नहीं बताय। ===2=== कलम के सौदागर, खबरों का लगाएँ दाम, सच्चाई का गला घोंटें और कहलाएँ महान। कानून की आँखों पर चढ़ा भ्रष्टाचारी चश्मा, गरीब न नज़र आए, अमीर की चले दुकान । ===3=== नेता जी के भाषण में शब्दों की भरमार, सतकर्मों में खाली दफ्तर,आंकड़ों की सरकार। लोकतंत्र की कुर्सी पर बैठे पूंजीवादी परिवार , जनता चुनाव मे,कार्यकर्ता जिंदाबाद में,पर दलाल है खास। ===4=== नौकरशाही की गाड़ी में घूस का पेट्रोल भरा , बिना चढ़ाए तेल,न खिसके एक इंच कागज पड़ा । पूछ रहे कच्चे पक्के निर्माण,कब आएगा सुधार, टेंडरों में रिश्तेदारी, कमीशन ही है असली आधार। ===5=== अन्याय का न्याय मंदिर, तारीख़ों का भंडार, दोषी की मौज, प...

कविता - न्याय क्यों बाज़ार बन गया

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कविता - न्याय क्यों बाज़ार बन गया  (एक विद्रोही कविता-संग्रह में प्रमुख रचना) लेखक: अरविन्द सिंह सिसोदिया  उन सभी आवाज़ों के नाम, जो न्याय माँगते-माँगते ख़ामोश कर दी गईं। भूमिका (Preface) यह कविता उस सत्य की प्रतिध्वनि है जिसे अदालतों ने फाइलों में बंद कर दिया, और सत्ता के गलियारों ने पैसे की बोली में बेच दिया। यह रचना केवल शब्द नहीं — अन्याय के विरुद्ध खड़ी होती जनता की सांस है। कविता - न्याय क्यों बाज़ार बन गया  वह सोचता था, वहाँ न्याय होगा, पर वहाँ तो पग-पग पर पैसों का खेल है, टाइप से लेकर टाइम तक़ रेलमपेल है, झूठ का पहले से लिखा हुआ दस्तावेज है, अड़गों का, तारीखों का, उलझाने का अजीब खेल है। अन्याय का पोषण होता,  जानबूझकर न्याय से धोखा होता। छोटी-छोटी बातों और बकवासों की ओट लेकर, न्याय को अन्याय के साथ दसकों घसीटा जाता  कैसे कहें इसे न्याय का मंदिर, यहाँ तो न्याय को बली पर चढ़ा दिया जाता है। क्या कोई बताएगा,न्याय क्यों बाज़ार बन गया??? ===1=== कमियों का ज़िक्र तो करना पड़ेगा, अन्याय की जवाबदेही तो तय होगी, पर किस अदालत में? किस तारीख़ पर? यह कोई नही...

Justice Delayed Is Justice Denied. मृत्यु के बाद आया अंतिम फैसला, न्याय व्यवस्था पर सवाल

men terminated from job get justice after 34 year not alive to celebrate 1991 में नौकरी गई, 33 साल अदालतों के चक्कर काटने के बाद हुई मौत, 34वें साल 'न्याय' मिल गया साल 1991 में Dinesh Chandra Sharma को नौकरी से निकाला गया. उसी साल उन्होंने Labour Court का दरवाजा खटखटाया. लेबर कोर्ट से मामला High Court की सिंगल बेंच में गया, फिर डबल बेंच और उसके बाद Supreme Court के पास. सुप्रीम कोर्ट में न्याय मिलते मिलते उनकी जिंदगी खत्म हो गई. सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने में डीके शर्मा को 34 साल लग गए.  29 दिसंबर 2025 एक चर्चित कानूनी कहावत है- 'Justice Delayed Is Justice Denied.' इसका अर्थ है कि न्याय मिलने में बहुत देरी होना न्याय नहीं मिलने के बराबर है. यह कहावत सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक हालिया फैसले पर सटीक बैठती है, जिसमें जिंदा रहते याचिकाकर्ता को न्याय नहीं मिला. 34 साल तक अदालतों का चक्कर काटते-काटते उसकी मौत हो गई. लेकिन मौत के साल भर बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला दे दिया. क्या था पूरा मामला? टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1978 में दिनेश चंद...

कविता - चमचावाद के प्रभाव में

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कविता - चमचावाद के प्रभाव में  चमाचावाद के प्रभाव में, नैतिकता के अभाव में, जब-जब कोई संगठन चलेगा, पूछो न पूछो,  उसे डूबने से कौन रोकेगा... ? ===1=== जहाँ सच कहना अपराध बने, झूठ पहरेदार बनें, योग्यता को किनारे धकेल, चाटुकारिता की नाव चले, स्वार्थ के डंके बजें और सच्चाई की कोई न सुने, इस अनचार में, उसे डूबने से कौन रोकेगा ? ===2=== नेताओं के कानों को, सिर्फ़ अपने गुणगान चाहिए, जनता की आवाज़ें कौन सुने, दरवारी चाटुकार चाहिए, आँखों पर चढ़ गईं स्वप्रशंसा की पट्टी, सच कैसे दिखेगा, इस स्वघोषित अंधकार में, उसे डूबने से कौन रोकेगा ? ===3=== जहाँ प्रश्नों पर पहरा हो और विचारों पर लगें ताले, वहाँ पतन निश्चित होता है, फिर भी सब फरेब के मतवाले, स्वार्थ के चरणस्पर्श में,स्वाभिमान कहां टिकगा, झूठ की जाजम पर बैठे को, डूबने से कौन रोकेगा ? ===4=== व्यक्तिगत पूजा की आँधी में, लोकतंत्र खो गया, हक़ की आवाजें थम गईं,आनाचारमय व्यवस्था हो गईं, इतिहास लिखेगा परिणाम,असत्य ही जीत कर आया, अनीति के दृष्टिदोष जिसे ,उसे डूबने से कौन रोकेगा ? ===5=== चमाचावाद के प्रभाव में, नैतिकता के अभाव में,...

राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और आत्मविश्वास से भरा रहा 2025 - नरेन्द्र मोदी

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प्रधानमंत्री मोदीजी के द्वारा 28 दिसंबर 2025 को दिये गये संबोधन का पूरा पाठ भी नीचे दिया गया है, जो हमें बहुत सी महत्वपूर्ण बातों को बताता है...! राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता और आत्मविश्वास से भरा रहा 2025 - नरेन्द्र मोदी 28 दिसंबर 2025 की "मन की बात" में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने पूरे साल की उपलब्धियों, राष्ट्रीय सुरक्षा, खेल, विज्ञान, संस्कृति और युवाओं की भागीदारी पर बात की। उन्होंने "ऑपरेशन सिंदूर" को देश के आत्मसम्मान का प्रतीक बताया और कहा कि भारत अब अपनी सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करता। वहीं प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में 2026 के लिए नए संकल्पों का आह्वान भी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने मन की बात की शुरुआत देशवासियों का अभिवादन किया और कहा कि 2025 की कई यादें उनके मन में हैं, जिन पर हर भारतीय को गर्व है. उनके शब्दों में, "2025 ने हमें ऐसे कई पल दिए, जिन पर हर भारतीय को गर्व हुआ." PM Modi Mann Ki Baat: मन की बात के 129वें एपिसोड में क्या बोले PM मोदी ? राष्ट्रीय सुरक्षा पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ...