राजस्थान फिर शर्म सार, नहीं थम रहे महिलाओं पर अत्याचार - अरविन्द सिसौदिया bjp rajasthan


राजस्थान फिर शर्म सार, नहीं थम रहे महिलाओं पर अत्याचार - अरविन्द सिसौदिया 

नोखा में नाबालिग से गैंगरेप, कानून व्यवस्था में विफल सरकार बदलेगा राजस्थान - अरविन्द सिसौदिया 

कोटा 5 नवम्बर । 

भारतीय जनता पार्टी राजस्थान प्रदेश के मीडिया संपर्क विभाग के प्रदेश से संयोजक अरविंद सिसोदिया ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नोखा में नाबालिग बच्ची से गेंग रेप की घटना होना और उसमें पुलिस कार्यवाही को सौदेबाजी में विलम्बित करनें की निंदा की है। उन्होनें कहा सरकार का भय समाप्त हो चुका है। जमीनीस्तर पर कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची है। राजस्थान के रोम रोम में भ्रष्टाचार और कुशासन घर कर गया है। गहलोत हटी बच्चे की तरह सिर्फ कुर्सी के पैरों से झूमे हुये हैं, उनका हाई कमान उन्हे हटानें में लगा हुआ है। पूरे पांच साल से चल रहे इस ड्रामें में राजस्थान की कानून व्यवस्था अपराधियों दुराचारियों के हवाले हो कर रह गई है। 

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वीरांगनाओं का राजस्थान बनाना है

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सीसौदिया नें आरोप लगाया है कि राजस्थान सरकार का योगी जी की तरह भय होता तो नोखा में गैंगरेप की घटना नहीं होती, किन्तु मुख्यमंत्री की जान कुर्सी में अटकी होनें से राजस्थान में महिला अत्याचारों का क्रम थम नहीं रहा, राजस्थान मां बहन बेटियां सुरक्षित नहीं है। 

सिसोदिया ने कहा कि अभी तक राजस्थान में 35000 से अधिक दुष्कर्म की घटनाएं संपन्न हुई है इनमें से लगभग आदि 15000 से अधिक दुष्कर्म की घटना छोटी नन्ही बच्चियों के साथ हुई है जो की अत्यंत पीड़ा दायक और हृदय को झकझोर देने वाली है । राजस्थान नें इस तरह का गिरा हुआ शासन कभी नहीं देखा ।

 उन्होनें कहा महिला अत्याचार की हृदय विदारक हिंसा को देखते हुए गहलोत सरकार को शर्म आनी चाहिए कि कहीं बच्ची से दुष्कर्म करके उसके टुकड़े-टुकड़े करके भट्टी में जला दिए जाते ह,ैं कहीं गैंगरेप करके उसे पर तेजाब डालकर जला दिया जाता है, कहीं निरवस्त्र करके घुमाया जाता है , कही दिव्यांग बच्चियों के साथ तक वीभत्स दुष्कर्म हो जाता है। गहलोत साहब सिर्फ अपनी कुर्सी बचाए रखने और मुख्यमंत्री पद बनाए रखने में व्यस्त राजस्थान की शासन व्यवस्था की उपेक्षा किये हुये हैं, इसी से इस तरह की घटनाओं को वे रोक नहीं पा रहे हैं।

राजस्थान में नाकारा काँग्रेस सरकार के पाँच साल 

महिला अत्याचार

जिस राजस्थान में महिलाएँ पहले केसरिया बाना पहनें सुरमा सर कटवा लिया करती थी। आज इस राजस्थान में कांग्रेस के कुराज में अपनी आबरू को बचाने के लिये अपने आत्म सम्मान के लिये राजस्थान की वीरधरा की बेटियां सिसक रही है। 

कुशासन और सुशासन में क्या फर्क होता है इसी से पता चलता है कि देश के कुछ ऐसे राज्य जिनका अतीत कानून व्यवस्था महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर बदरंग रहा है। वहां आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार मजबूत इच्छा शक्ति के साथ जनहित में कार्य कर रही है जिसके कारण पटरी से उतरी हुई कानून व्यवस्था आज ठीक हो रही है वहीं दूसरी ओर राजस्थान जैसे शालिन, शांत और मानी प्रदेश जिसका अतीत महिलाओं के प्रति सम्मान में उनकी सुरक्षा और स्वाभिमान के लिए बड़ा ही समृद्ध रहा है वही आज कांग्रेस पार्टी के कुशासन में हर गांव हर शहर में बेटियों की चीख-पुखार सुनाई देती है।

कौन मानेगा की बीकानेर के खाजूवाला में 20 साल की एक दलित छात्रा के साथ पुलिसकर्मी ही अपहरण कर दुष्कर्म करते हैं, और फिर उसकी हत्या कर दी जाती है। सरकार तीन दिनों तक ऐसे दरिंदों को बचाने में लगी हुई थी।

इस गौरवशाली अतीत वाले राजस्थान में आज हालात ऐसे हैं की प्रतिदिन 19 बेटियों के साथ दुष्कर्म और उनमें से कुछ बेटियों के की हत्या जैसे जगन ने अपराध हो रहे हैं

35000 दुष्कर्म की घटनाएं जिनमें 15000 से अधिक दुष्कर्म की घटना छोटी बच्चियों के साथ हुए हैं।

मीरा और पन्ना  के यह राजस्थान आज दुष्कर्म के मामले में देश में नंबर वन पर है आज यहां की बेटियां दुष्कर्म के बाद कहीं तेज आपसे जलाई जा रही है कहीं टुकड़े-टुकड़े कर आज की भट्टी में जला दी जाती है कहीं दुष्कर्म के बाद मार कर कुएं में फेंकी जा रही है तो कहीं जिंदा ही जला दी जा रही है अपराधी बेकोफ है  5 सालों से सरकार नींद में है जिन पर बेटियों की रक्षा की जिम्मेदारी है वे रक्षक ही कहीं पर भक्षक बन गए हैं।

राजस्थान के बारे में समाचार पत्रों में जब छपता है.. 

बाड़मेर में एक महिला के साथ दुष्कर्म करके उसको जिंदा जला दिया गया।

जोधपुर में पूरे परिवार की गला काटकर हत्या कर दी गई।

सांचौर से दो नाबालिग बहनों को घर से उठा कर ले जाया गया और दुष्कर्म किया।

नागौर में 7 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म कर दिया जाता है। 

सिरोही में 8 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी जाती है।

अलवर में 15 साल की दिव्यांग बालिका के साथ दुष्कर्म कर उसे बीच सड़क पर पटक कर चले जाते हैं। 

बीकानेर के खाजूवाला में कोचिंग जा रही दलित बच्ची का पुलिसकर्मी अपरण कर दुष्कर्म करते हैं और फिर उसकी हत्या कर देते हैं। 

भीलवाड़ा के कोटड़ी में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसके टुकडे टुकडे़ कर भट्टी में फैंक दिया।

दौसा में ही एक आदिवासी बहन का अपहरण कर गैंगरेप किया जाता है फिर तेजाब डालकर जला दिया जाता है। 

प्रतापगढ़ के धरियाबाद में एक आदिवासी बेटी को निर्वस्त्र कर घुमाया जाता है, दो दिन तक सरकार सोती रहती है। 


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