अंग्रेजी नया साल,'डर्टी डांस',३० - ३० युवक एक लड़की के पीछे ..ब्लेक 2012
- अरविन्द सिसोदिया ब्लेक 2012 , एक तरफ चैत्र माह में जब भारतीय नव वर्ष आता है .. मंदिरों में घंटे घड़ियाल बजते हैं .., आरतियाँ होतीं हैं , उगते सूर्य की आराधना होती है , ईश्वर के नाम का गुणगान होता है , मगर यह कैसा सन का आगमन कि ३० - ३० युवक ..वह भी भारतीय ...एक लड़की के पीछे पड़ जाते हैं पागलों की तरह...???? उन युवाओं के नैतिक पतन कि यह वारदात सामान्य नहीं है......केंद्र सरकार को यह जबाव देना होगा कि वह समाज को कहाँ ले जा रही है..??? यह चारित्रिक पतन क्यों कर हुआ..??? स्वतंत्रता और स्वछंदता में कोई तो फर्क होगा ही..भारतीय संविधान कि विधान कि धज्जियां क्यों कर उडीं ...जबाव सरकार को ही देना है...वह देश को कहाँ ले जाकर छोड़ेगी ...??? हमारी शिक्षा प्रणाली और व्यवस्था में कोई गंभीर दोष तो है ही न तब तो यह हुआ... अंग्रेजी नया साल याने अय्याशी , नशाखोरी , आपराधिकता ..भला क्यों ..??? क्यों कि आप इस भटको को रोकना नहीं चाहते..इसलिए !! एक तरफ भारतीय संस्कृति नर से नारायण बनती है तो पाश्चत्य संस्कृति पवित्रता को पशुता में बदल देती है ....