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क्या चीन को खुश रखने, न्याय यात्रा में अरुणाचल नहीं है ? - अरविन्द सिसोदिया

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  क्या चीन को खुश रखने के लिए,कांग्रेस की न्याय यात्रा में अरुणाचल प्रदेश नहीं है - अरविन्द सिसोदिया कांग्रेस के राजकुमार राहुल गांधी , अपनी दूसरी राजनैतिक यात्रा भारत न्याय यात्रा पर 14 जनवरी 2024 से निकलने वाले हैं। इससे पहले वे भारत जोडो यात्रा निकाल चुके हैं। जिसमें उन्हें, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा जम्मू और कश्मीर को धारा 370 से मुक्त कर पूरी तरह भारत से जोड़ देने के बाद बर्फबारी का आनन्द लेते हुए भी देखा गया। जबकि यही सब कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार में राहुल - प्रियंका को असंभव था। हालांकि यात्रा के दौरान न भारत को जोड़ा गया न मुहब्बत की दुकान से कोई मुहब्बत उपलब्ध करवाई गई थी, बल्कि सम्बोधन दर सम्बोधन भारत में घृणा परोसी गई । इससे स्पष्ट है कि न्याय यात्रा के नाम पर भी इसी तरीके से अन्याय, अधर्म, अनैतिकता , अपराध और अराजकता आदि सब कुछ वह परोसा जायेगा । जिससे कांग्रेस और कांग्रेस कार्यकर्ता प्रतिदिन भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अनाप शनाप गालियां दे सके,अपमानित कर सकें। देश उनकी बातों को ध्यान देता भी नहीं है। अर्थात यह यात्...

तिब्बत : हिमालय में चीन की सामरिक नीति का आधार BTSM

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  तिब्बत : हिमालय में चीन की सामरिक नीति का आधार जयदेव रानाडे /  5 दिसंबर 2023   साभार  Link...... तिब्बत : हिमालय में चीन की सामरिक नीति का आधार चीन संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में अपनी रणनीतिक नीति के लिए तिब्बत को आधार के रूप में स्थापित कर रहा है, जिससे भारत पर सीधा और प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि बीजिंग ने यह आकलन कर लिया है कि उसने तिब्बत को विदेशी देशों के साथ बातचीत के लिए व्यापक रूप से खोलने में पर्याप्त रूप से सुरक्षित महसूस करने के लिए तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) को पर्याप्त रूप से शांत कर लिया है। चीन की विदेश नीति के उद्देश्यों का उद्देश्य क्षेत्र के हिमालयी राज्यों, जो भारत की उत्तरी परिधि पर हैं, को चीन-प्रभुत्व वाले समूह में शामिल करना है। हालाँकि इसे पारिस्थितिकी और पर्यावरण के संरक्षण की आड़ में लपेटा जाएगा, लेकिन मुख्य उद्देश्य बीजिंग के रणनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाना होगा। टीएआर में हाल की दो घटनाओं और टीएआर पार्टी सचिव की इस महीने की शुरुआत में नेपाल, श्रीलंका और सिंगापुर की यात्रा को इस पृष्ठभूमि में देखने की जरूरत है। ...

चीन के राष्ट्रपति क्या MOU की शर्तो के कारण G-20 में नहीं आ रहे ? - अरविन्द सिसोदिया

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- अरविन्द सिसोदिया 9414180151 चीन के राष्ट्रपति क्या MOU की शर्तो के कारण G-20 में नहीं आ रहे - अरविन्द सिसोदिया खबर आरही है कि चीन के राष्ट्रपति जिंगपिंग भारत में सम्पन्न होनें जा रहे G-20 देशों की बैठक में नहीं आरहे हैं, वे संभवतः अपने प्रधानमंत्री को भेजेंगे, वहीं युक्रेन युद्ध के कारण रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी नहीं आ रहे हैं। विश्व राजनीति के दृष्टिकोण से एक शक्तिकेंद्र अमेरिकी धडा है तो दूसरा चीन - रूस का है। यूँ भी देशों की संख्या की दृष्टि से अमेरिकी धडा बड़ा भी है और शक्तिशाली भी है। किन्तु एशिया महादीप के भौगोलिक समीकरण में चीन - रूस पर बड़ा भूभाग है, इस समय दोनों ही देश विस्तारवाद के कारण बदनाम हैं और इनके पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध भी नहीं हैं। चीन से भारत के संबंध 1962 युद्ध से ही खराब हैं किन्तु भारत में चीन का व्यापार खूब फला फूला इसका कारण 1962 के बाद अधिकांश सरकारें कांग्रेस या कांग्रेस पर निर्भर ही रहीं। चीन नें भारत में अपने व्यापारिक की पकड़ इतनी मज़बूत की कि भारतीय व्यापारियों नें अपने उत्पादन, वस्तु निर्माण बंद कर चीन निर्मित वस्तुओं कि बिक्री ...

विश्व,तिब्बत को अलग देश के रूप में दिखाए - अरविन्द सिसोदिया

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विश्व , तिब्बत को अलग देश के रूप में दिखाए - अरविन्द सिसोदिया चीन लगातार खुराफात पर खुराफात करता जा रहा है, उसकी यह आदत 1950 से लेकर, अभी तक लगातार चल रही है। 2014 में भी जब राष्ट्रपति महोदय अरुणाचल प्रदेश जाना चाहते थे तभ भी चीन ने खुराफात की थी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अरुणाचल प्रदेश जाना चाहते थे, तब भी चीन ने नौटंकी की थी। चीन छल कपट और झूठ के बल पर आस पास के तमाम देशों पर कब्जा करने में कामयाब रहा है। उसका कोई कड़ा प्रतिरोध नहीं हुआ, इस कारण उसके होंसले बड़े हुए हैं, उसे भारत में बैकअप देनें राजनैतिक दलों सहित अनेकों प्रकार की संस्थाओं का लाभ भी प्राप्त होता है। चीन के द्वारा दबाव और न्यूसेंस की नीति लंबे समय से है। यह उसकी आदत में है। उसके न्यूसेंस में फंसे बगैर भारत दृढ़ता पूर्वक उसको लगातार जवाब दे रहा है। वर्तमान में चीन ने जो नया नक्सा जारी किया है उसमें एक दर्जन से ज्यादा देशों और क्षेत्रो पर विवाद उत्पन्न किया है, जिसका विश्व स्तर पर विरोध हो रहा है। भारत नें भी विरोध किया है। यूँ तो कब्जा सच्चा नक्सा झूठा का सिद्धांत ही काम करता है, अरुण...

कैलाश मानसरोवर की मुक्ति के लिए चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करें - BTSM

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कैलाश मानसरोवर की चीन से मुक्ति के लिए चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करें  free kailash mansarovar from china झालावाड़ 9 जुलाई। भारत तिब्बत सहयोग मंच की झालावाड़ जिला इकाई की बैठक बाल जी की छतरी पर रविवार को अपराह्न में संपन्न हुई, जिसमें भारत तिब्बत सहयोग मंच के चित्तोड़ प्रान्त के प्रांतीय अध्यक्ष अरविंद कौशल, राजस्थान क्षेत्रीय के क्षेत्रीय सहसंयोजक राजेन्द्र कामदार, प्रान्त प्रचार प्रमुख अरविंद सिसोदिया ,प्रांतोय महिला महामंत्री मंजू शर्मा,प्रांतीय महिला उपाध्यक्ष दुर्गेश नंदिनी शर्मा अतिथि रहे। जिला इकाई नें साफा पहना कर, शाल श्रीफल भेंट कर स्वागत अभिनन्दन किया। जिलाध्यक्ष सौरभ शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में क्षेत्रीय सह संयोजक राजेन्द्र कामदार ने कहा कि मंच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिब्बत को पूर्व की ही तरह स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की मुहिम चला रहा है। मंच का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव के पवित्र तीर्थंस्थल कैलाश मानसरोवर को चीन से मुक्ति करवाना है। जो कि हिंदुओ की आस्था एवं मान सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने आव्हान किया कि चीन को सबक सिखानें व कैलाश मानसरोवर की मु...

जनता जाये भाड़ में,कांग्रेस को चीन की पडी, क्या तमाशा है - अरविन्द सिसौदिया china soniya gandhi MOU

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  जनता जाये भाड़ में,कांग्रेस को चीन की पडी, क्या तमाशा है  - अरविन्द सिसौदिया संसद के शीतकालीन सत्र में सबसे महत्वपूर्ण मसला चीन में, कोरोना वायरस की नई किस्म से हो रही जनधन की हॉनी एवं हाहाकार का होना चाहिये था। यदि में विपक्ष की किसी भी पार्टी का नेता होता तो सबसे पहले इस मुद्दे पर चर्चा करवानें के लिये तमाम संसदीय प्रक्रिया के उपाय करता । क्यों कि मसला सिर्फ चीन का नहीं बलिक उससे सटे हमारे अपने भारत देश का भी है। यह संक्रमण कब भारत में आ कर हालात बिगाड दे , इसकी कोई भी गांरंटी न थी और न है  । कांग्रेस ने कोरोना का मसला इसलिये नहीं छुआ कि चीन नहीं चाहता उसका सच बाहर जाये । वह सब कुछ छिपाये रखना चाहता है, इसलिये हमारे यहां चीन से एम ओ यू किये हुये मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मसले को छुआ तक नहीं । बल्कि जब यह मामला उनके ही हिमाचल के मुख्यमंत्री सुक्खू के कोरोना पॉजिटिव होनें और कॉरेन्टाईन होने से चिन्ता का विषय बना तो उसे दबानें में पूरी ताकत लगा दी गई। चीन की सीमा पर झडपें होना निश्चित ही एक गंभीर मसला है, अब भारत चीन की सैनाओं को खदेडनें लगा है। पूरी ताकत से प्रतिर...

राहुल गांधी का बयान एमओयू के तहत, वे चीन के अधिवक्ता की तरह बोलते हैं - अरविन्द सिसौदिया china crisis rahul

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  राहुल गांधी का बयान एमओयू के तहत, वे चीन के अधिवक्ता की तरह बोलते हैं - अरविन्द सिसौदिया राहुल गांधी ने भारत यात्रा जोडा के 100 वे दिन पर जयपुर राजस्थान में पत्रकारवार्ता के दौरान बहुत ही शर्मनाक बयान तवांग की घटना को लेकर भारतीय सेना के विरूद्ध दे दिया, जो सत्य के भी विपरीत है !  वे चीनी मामलों में अक्सर वही भाषा बोलते रहे है,जिससे चीन को फायदा हो। हो सकता है कि उनको चीन से संदर्भ ब्रीफिंग आती हो ? क्यों कि उन्होने चीन की सत्तारूढ़ पार्टी के साथ अपना एम ओ यू किया हुआ है।  हस्ताक्षर करते हुये कई तस्वीरें सपरिवार इन्टरनेट पर मौजूद है। वह एम ओ यू आज तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। वे भारत के विरूद्ध क्या क्या संधि करके आये हैं , यह प्रश्न आज भी बना हुआ है। राहुन गांधी का बयान शुद्धरूप से चीन का हित चिन्तन था, चीन की आवाज था । इसी कारण उनके बयान की घोर निंदा हुई है। वे क्षमा मांग भी लें तो भी, कुछ नहीं होना वे चीन को फायदा पहुचानें का काम तो कर चुके हैं। यह दूसरी बात है कि उनकी बात पर कोई भी विश्वास नहीं करता है। राहुल गांधी का बयान इस तरह का जैसे वे वहीं मौजूद थे। जब आपने कुछ भी...

क्या सचमुच चीन में तख्ता पलट हो चुका है...?

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 क्या सचमुच चीन में तख्ता पलट हो चुका है...? xi-jinping-under-house-arrest...?   लगता है कि चीन में सब कुछ ठीक ठाक नहीं है। क्यों कि छोटी छोटी सी बात पर अपनी प्रतिक्रिया देनें वाली चीन की समाचार एजेंसी पूरी तरह खामोश है। वह न तो तख्तापलट का खण्डन कर रही, न पुष्ठि कर रही है। सामान्य सी बात है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शासन में होते तो , इस खबर का तत्काल खण्डन आता । खण्डन नहीं आना ही इस बात का सबूत है कि उनका तख्तापलट हो गया है। चीन की कम्युनिष्ट पार्टी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से नाराज इसलिये है कि वे पूरी दुनिया को चीन का दुष्मन बनाते जा रहे थे । ताईवान और अमेरिका को लेकर जहां चीन की कम्युनिष्ट पार्टी ना खुश थी । वहीं चीन में कोरोना ने हालात खराब की हुई है । मंहगाई और कम आपूर्ति से वहां जनमत भी परेशान है । इन सभी तथ्यों से लगता है कि चीन में तख्ता पलट हो चुका है। नये राष्ट्रपति की घोषणा होते ही सब कुछ सामनें आ जायेगा । तब तक अटकलों के भरोषे ही इंतजार करना होगा। ..... दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने नजरबंद (House Ar...

राहुल गांधी का चीन-गुणगान क्या एम ओ यू के कारण

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राहुल गांधी क्या चीन के किसी षडयंत्र को आगे बडा रहे हैं। राहुल गांधी के मुंह से अक्सर वह बात सामनें आती है, जिसे चीन स्वयं न बोल कर किसी भारतीय के द्वारा बुलवाना चाहता है। साम्यवाद से मोतीलाल जी नेहरू  एवं जवाहरलाल जी नेहरू के भी गहरे सम्बंध रहे है। वे तब सोवियत रूस जाया करते थे। आजादी के बाद जो विश्वस्तरीय सैन्य गुट बना उसमें भी भारत सोवियत रूस गुट में रहा जबकि पाकिस्तान अमेरिका-ब्रिटेन के सैन्य गुट में था। भारत में कांग्रेस सत्ता में रही मगर उसने साम्यवादी विचारधारा एवं इतिहासकारों को बुद्धिजीवियों को लगातार संरक्षण ही दिया है। साम्यवादी चीन से भी जवाहरलाल नेहरू जी के गहरे सम्बंध रहे हैं। सोनिया गांधी जी के बाद कांग्रेस का झुकाव अमेरिका के पक्ष में हुआ और परमाणु समझौते पर कांग्रेस और कम्युनिष्ट आमने सामने भी हुये। लेकिन चीन के साथ हुये राजनैतिक दल के नाते समझौते के बाद कांग्रेस की आवाज चीन प्रेम से ही लबरेज रहती है। जो भी राहुल जी बोलते हैं वह लगभग वही होता है जो चीन की इच्छा है। सवाल यही खडा होता है कि क्या चीन भारत में कोई और बडे षडयंत्र की ओर बड रहा है। जिसके लिये वह कांग्रेस ...

भारत का दृष्टिकोंण सही, रूस को अलग थलग नहीं किया जा सकता - अरविन्द सिसौदिया

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bhaarat ka drshtikonn sahee, roos ko alag thalag nahin kiya ja sakata भारत का दृष्टिकोंण सही, रूस को अलग थलग नहीं किया जा सकता - अरविन्द सिसौदिया India's point of view is correct, Russia cannot be isolated  भारत का दृष्टिकोंण सही, रूस को अलग थलग नहीं किया जा सकता - अरविन्द सिसौदिया भारत ने संयुक्त राष्ट्रसंघ में अमेरिका का साथ न देकर अपने आपको तटस्थ रखा है। चीन, पाकिस्तान , म्यमांर सहित अनेकों एसियाई देशों का भी दृष्टिकोंण अमेरिका एवं यूरोपीय संघ से भिन्न - भिन्न है, तथा एक सामान्य सी बात है कि जो देश विश्व की दूसरे क्रम की महाशक्ति रहा हो , जिस पर 6000 से अधिक परमाणु हथिययार हों, जो सामरिक एवं तकनीकी साजो सामान की आपूर्ती का बडा संस्थान - प्रतिष्ठान हो। उसे आप अचनाक पूरी तरह अलग - थलग कैसे कर सकते है ? व्यापार , आर्थिक एवं आपूर्ती के अनकों मसले इस तरह के होते है। जिनसे वर्षों तो क्या दसकों भी छुटकारा नहीं पाया जा सकता। विशेषकर जब कोई ब्रांडनेम बडी चीज या बडी मशीनों के कलपूर्जों की,बाद में आवश्यक आपूर्तियां का तथ्य हो तो और भी मुश्किल हो जाता है। रूस निर्मित अनेकों सामरिक उपकरण भार...