संदेश

जगजीत सिंह - मेरा गी त अमर कर दो

चित्र
* जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के गंगानगर में हुआ था. पिता सरदार अमर सिंह धमानी भारत सरकार के कर्मचारी थे.जगजीत का परिवार मूलतः पंजाब के रोपड़ ज़िले के दल्ला गांव का रहने वाला है.मां बच्चन कौर पंजाब के ही समरल्ला के उट्टालन गांव की रहने वाली थीं. * लाखों दिलों को अपनी नज्मों और गजलों से छूनेवाले जगजीत सिंह की गायकी में वह जादू था कि दुनिया भर में उनके प्रशंसकों की तादात खासी है.70 साल के जगजीत सिंह अपनी मखमली आवाज और गजलों के लिए जाने जाते थे. उन्होंने कई फ़िल्मों के लिए भी गीत गाए. * पद्मभूषण से सम्मानित गायक एकमात्र ऐसे गायक हैं जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं को अपने दो एल्बम नयी दिशा (1999) और संवेदना (2002) में अपनी आवाज दी. * होठों से छू लो तुम..फिल्म अर्थ में गाया ये गीत लोगों के ज़ेहन से कभी नहीं उतरेगा. * तुमको देखा तो ये ख्याल आया...कोई समझेगा क्या राज़ ए गुलशन..अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें...कल चौदहवीं की रात थी ...होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज़ है ...वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का पानी..... कहां तक गिनाया ज...

राहुल बताओ , कांग्रेस राज में कहा गई भंवरी

चित्र
भवंरी का परिवार पूछे , कहां है भंवरी राहुल बताओ...... कांग्रेस के ड्रामेंबाज महासचिव राहुल गांधी ने राजस्थान के दंगाग्रस्त गोपालगढ में नाटकबाजों की तरह पहुंच कर....कुछ पीडितों को सांत्वना दी...और पुलिस अधिकारी की तरह घटना स्थल का मौका मुआयना किया....मगर बे 1 सितम्बर से गाायब कर संभवतः मार डाली गई भंवरी देवी के बच्चों को सांत्वना देने नहीं गये। क्यों कि उसमें उनकी पार्टी के कददावर नेता तथा केबिनेट मंत्री महीपाल मदेरणा का नाम आ रहा हे। राहुल में वास्तविक साहनुभूती है तो भंवरी के बच्चों के पास पहुच कर उनकी पीडा दूर करें। सुख दुख पूछने में भी राजनैतिक फायदा देखने वाले मात्र अभिनेता या नाटकबाज ही कहलाते हैं। http://www.bhaskar.com बोलेरो मिली, भंवरी के नाम से रजिस्टर्ड पर भंवरी की नहीं! पालनपुर (गुजरात)/जोधपुर/.  एएनएम भंवरी देवी के अपहरण में प्रयुक्त शहाबुद्दीन की बोलेरो गाड़ी गुजरात में अंबाजी के पास काणोदर कस्बे में बरामद की गई है। यह बोलेरो एक माह से मिस्त्री के गैराज में पड़ी थी।  आबूरोड में छिपने के दौरान उसने यह बोलेरो ठीक कराने के बहाने इस गैराज में छोड़ी थी। फिर सा...

चीन से भारत को बहुमुखी खतरे उत्पन्न हो चुके हैं - भगवती प्रकाश शर्मा

चित्र
- अरविन्द सिसोदिया  चीन से भारत को बहुमुखी खतरे उत्पन्न हो चुके हैं - भगवती प्रकाश शर्मा कोटा 8 अक्टूबर। स्वदेशी जागरण मंच कोटा महानगर की ओर ‘भारत के लिए चीन एक सुरक्षा संकट’ विषय पर, शनिवार सायं 5 बजे सूरज भवन कोटा में आयोजित प्रबुद्धजन सम्मेलन को सम्बोधित करते हुये, कार्यक्रम के मुख्यवक्ता स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह संयोजक एवं चीन मामलों विशेषज्ञ लेखक भगवती प्रकाश शर्मा ने कहा चीन भारत के लिए बहुमुखी खतरे उत्पन्न कर चुका है। उसके दुष्कृत्यों के विरूद्ध देश को प्रभावी रूप से जवाबी कार्यवाहियों ओर सजगकताओं के लिए तैयारिया करनी चाहिए। उन्होंने कहा देश के अन्दर नागरिक शक्ति को भी राष्ट्रहित में चीनी माल के बहिष्कार के द्वारा चीन की चुनौतियों को विफल करने हेतु आगे आना चाहिए। शर्मा ने बताया कि चीन ने 1962 में जिस तरह की घुसपैठ, सीमा उल्लघन और युद्ध भारत पर थोपा था, ठीक उसी तरह की गतिविधियां वह वर्तमान में लगातार अनेको वर्षो से कर रहा है। उन्होंने कहा चीन न केवल सामरिक शक्तियों से भारत को खतरा उत्पन्न कर रहा है बल्कि देश के आर्थिक संसाधनों और आन्तिरक शान्ति को भी गंभ...

दहेज़ के लिए दरिंदगी

चित्र
- अरविन्द सिसोदिया   दहेत प्रताड़ना और दहेज़ हत्या की कोशिस का यह मामला , दिल को झकझोर देने वाली हे , कितने ही दवाब आयें पुलिस को कड़ी से कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए ताकि समाज के इन भश्मासुरों में  भय व्याप्त हो... ..उस पिता की आत्मा से पूछो जिसनें इसे बड़े लड़ प्यार से पाल पोसा कर सोंपा था....दरिंदों नें उसे ठगी का सामान बना लिया और उसकी जान पर लेली यह तो इश्वर का ही चमत्कार था जो वह बच गई..अन्यथा झूठे आंसू बहा कर दूसरी किसी कन्या के जीवन से खेलनें ये लग जाते....  डॉ. पत्नी के साथ डॉक्टर पति ने पार कर दी दरिंदगी की सारी हदें http://www.bhaskar.com जयपुर। मेरठ से मुझे दो अक्टूबर की रात को जबरन जयपुर में गोविंदपुरी, रामनगर विस्तार स्थित ससुराल लाया गया। यहां रात एक बजे मेरे पिता को बुलाकर अस्पताल खोलने के लिए 15 लाख रु. मांगे गए। वे सुबह तीन बजे तक दबाव डालते रहे। पिता ने रुपए देने के लिए कुछ समय मांगा। उनके जाने के बाद जबरन सुसाइड नोट लिखवाकर सुबह मुझे दूसरी मंजिल से फेंक दिया गया। नारायण हृदयालया में भर्ती डॉ. स्वाति ने पुलिस को यही बयान दिया है। इस संबंध में वि...

रावण नहीं मरा....

चित्र
- अरविन्द सीसौदिया,  एक व्यंग - रावण नहीं मरा.... आज रावणों को मारा जा रहा है। मगर आज सायंकाल सारे रावण एक साथ अट्हास कर राम को चुनौती दे बैठे....., बहुत हो चुका हमें अब नहीं मरना...... हमें नहीं मरना..........तुम्हे जो करना है करलो ..., तुम हमारे सामने न पिद्दी .., न पिद्दी के शेरबा....!! हमारे सामने तुम लगते कहां हो.....,कहां तुम पांच फिट छै इंच के राम - लक्षमण और कहां मेरा खानदान 80 फीट , 90 फीट और हर साल 5-10 फीट और बड जाता हूं ...तुम त्रेता से अभी तक वहीं के वहीं हो...!! मेरा हर तरह का कद तुम से कई गुणा भारी है। यह तो मेरा ही अहसान था जो में बिना प्रतिरोध जल जाता हूं। ....राम बहुत सकुचाये ....यह कैसी बगावत ....सरे आम तौहीन होगी ...!! उन्होने संकट मोचक हनुमानजी को लगाया...कुछ करो अन्यथा..., अनर्थ हो जायेगा । हनुमानजी ने जाकर रावणों से बात की ...भई तुम्हे हम मारते ही कब हैं बल्की अगले साल आने का नौता ही तो देते हैं। तुम दिखावटी ही तो मरते हो । रावणों ने कहा हमारी भी कोई इज्जत है..! जिन्दा सारे रावण जिन्दा ही घूम रहे हैं माल उडा रहे हैं , शासन चला रहे हैं ...हम मरे हुए रावणों...

आज ही जन्म लिया था: राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने.....

चित्र
- अरविन्द सीसौदिया , कोटा, राजस्थान       राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की उपस्थिति भारतीय समाज के हर क्षेत्र में महसूस की जा सकती है, माना जाता है कि यह विश्व का सबसे बडा स्वंयसेवी संगठन है। जिसकी शुरुआत प्रखर स्वतंत्रता सेनानी डाॅ. केशव बलीराम हेडगेवार ने सन १९२५ में विजया दसमी के दिन की थी। इसके महत्व के उदाहरण के तौर पर, सन १९६२ के भारत-चीन युद्ध में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू संघ की भूमिका से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने संघ को सन १९६३ के गणतंत्र दिवस की परेड में सम्मिलित होने का निमन्त्रण दिया। सिर्फ दो दिनों की पूर्व सूचना पर तीन हजार से भी ज्यादा स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में वहाँ उपस्थित हो गये। मा.माधव सदाशिवराव गोलवलकर अर्थात गुरूजी इस संगठन के दूसरे सरसंघचालक हुये, जिन्हे तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समकक्ष लोकप्रिय, बी बी सी लंदन नें एक सर्वे के उपरांत माना था।       वर्तमान समय में संघ के दर्शन का पालन करने वाले कतिपय लोग देश के सर्वोच्च पदों तक पहुँचने मे भीं सफल रहे हैं। ऐसे प्रमुख व्यक्तियों में उपराष्ट्रपति पद पर स्...

इस वर्ष का दसहरा कांग्रेस नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के अवगुणों को जलाने के लिए

चित्र
- अरविन्द सीसौदिया , कोटा, राजस्थान हलाकि अंहकार के दसों अवगुणों पर विजय के लिए हम प्रतिवर्ष दसहरा पर्व मानते हैं .., रावण अवगुणों का प्रतीक है..., मगर इस वर्ष का दसहरा कांग्रेस  नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के अवगुणों को जलाने के लिए लोक तांत्रिक  तरीके से जन प्रतिरोध के  संकल्प  के साथ  मनाएं...पूरा देश कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार और महंगाई के महा अहंकार में जल रहा है..इससे मुक्ति ही प्रथम आवश्यकता है.... प्रश्न: दशहरा हमारे जीवन में क्या सन्देश लेकर आता है?  -राकेश तिवारी, लखनऊ  http://navbharattimes.indiatimes.com योग गुरु सुरक्षित गोस्वामी: भगवान् श्रीराम द्वारा रावण का वध जिस दिन किया गया उसको दशहरा कहा जाता है! इस दिन रावण का पुतला जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत सिद्ध करते है! लेकिन भारतीय संस्कृति में प्रत्येक त्योहार का आध्यात्मिक अर्थ होता है, इसी को जीवन में लगाना होता है! रावण और कुछ नहीं बल्कि हमारा अहंकार ही है, जब तक ये अहंकार है तब तक हमारे अन्दर अनेक विकार पनपते रहते है ये ही हमारे सारे दुखों की जड़ है, जितना ज्यादा अहंकार होता ह...

किसानों के साथ, साजिस चल रही है

चित्र
- अरविन्द सीसौदिया , कोटा, राजस्थान पूरे देश के साथ, पूरे देश के किसानों के साथ, साजिस चल रही है , ताकि खाद्धन्न कम से कम उत्पन्न हो । इसके लिये डीएपी और अन्य खादों की कीमतों में भारी वृद्धि की गई है। उर्वरक बाजार में मिल नहीं रहे हैं। बिजली की भारी कटौत्री चल रही है। अच्छी वर्षात का लाभ किसान को खाद आपूर्ती नहीं होनें से नहीं मिल पा रहा है। कुल मिला कर किसान के काम में भयानक अडंगे इसलिये सरकार लगा रही है कि उत्पादन कम हो और विदेशों से मंहगे आयात का रास्ता खुले ताकि पाश्चात्य जगत भारत को अधिक से अधिक लूट सके। केन्द्र की कोग्रेस या सोनिया सरकार के इस पाखण्ड के खिलाफ भारी जनजागरण आवश्यक हे।... ------ कोटा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने डीएपी के दामों में हाल में की गई भारी बढ़ोतरी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह केन्द्र का मामला है। कृषि उत्सव में सांसद इज्यराजसिंह ने अपने भाषण में डीएपी के दामों बढ़ोतरी का जिक्र किया तो पाण्डाल में मौजूद किसानों ने दाम घटाने के समर्थन में नारे लगाए। कृषि उत्सव के उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री ने पाण्डाल में किसानों से बातचीत की और उनके ज्ञापन लिए। मुख्यमंत्री...

गरिवों की, मंहगाई की बददुआयें .....

चित्र
- अरविन्द सीसौदिया, कोटा . करोडों देशवासियों के अपरोक्ष हत्यारे...... बुरा न मानें , इस देश की दो अर्थशास्त्रीयों , मोंटेक सिंह और मनमोहनसिंह ने बारा बजा कर रखदी है। गरीबी की परिभाषा का जो सच सामनें आया वह बताता है कि भारत सरकार और योजना आयोग में भारतवासीयों के प्रति कितनी हमदर्दी है या कितनी बेदर्दी है। इतनी शत्रुता तो शायद शत्रु भी नहीं करता। गरीब ही नहीं आम व्यक्ति के मुंह से निवाला छीनने में लगे इन दोनों सुख हन्ता व्यक्तियों के कृत्यों की समीक्षा किसी हत्यारे के रूप में ही इतिहास करेगा। करोडों लोगों को मंहगाई रूपी सुरसा के मंुह में डाल कर देशवासियों को धीमी मौत मारने के लिये , ये दोनों इतिहास में हिटलर और मुसोलिनी की तरह ही दोषी ठहराये जायेंगें। गरीब की उपेक्षा का कारण यह है कि विधायकों और सांसदों को इतनी तनखाह, भत्ते, सुविधायें और सम्मान दे दिया जाता है कि बे भूल जाते हैं कि देश में कोई गरीब भी रहता है और गरीबी नाम की चीज भी हैं । यदि यह तय कर दिया जाये कि प्रत्येक विधायक और सांसद को बी पी एल की आय जितनी तनखाह और सुविधायें ही दीं जायेंगी तो उनको यह सोचने पर निरंतर मजबूर तो होना...

करोडों देशवासियों के अपरोक्ष हत्यारे......

चित्र
- अरविन्द सीसौदिया ,     कोटा, राजस्थान     बुरा न मानें , इस देश की दो अर्थशास्त्रीयों , मोंटेक सिंह और मनमोहनसिंह ने बारा बजा कर रखदी है। गरीबी की परिभाषा का जो सच सामनें आया वह बताता है कि भारत सरकार और योजना आयोग में भारतवासीयों के प्रति कितनी हमदर्दी है या कितनी बेदर्दी है। इतनी शत्रुता तो शायद शत्रु भी नहीं करता। गरीब ही नहीं आम व्यक्ति के मुंह से निवाला छीनने में लगे इन दोनों सुख हन्ता व्यक्तियों के कृत्यों की समीक्षा किसी हत्यारे के रूप में ही इतिहास करेगा। करोडों लोगों को मंहगाई रूपी सुरसा के मंुह में डाल कर देशवासियों को धीमी मौत मारने के लिये , ये दोनों इतिहास में हिटलर और मुसोलिनी की तरह ही दोषी ठहराये जायेंगें।       हलांकी सोमवार को योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह ने एक प्रेस वार्ता में एक मंत्री के साथ बताया कि सर्वे आने के बाद पुनः इस परिभाषा पर विचार होगा । पर यह देखने वाली बात है कि इस योजना आयोग का अध्यक्ष प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह है। यह आयोग सारे मंत्रालयों की सलाह पर देश के विकास की भावी पंच वर्षीय योजना बनाता...

राजस्थान के दागी मंत्री इतिफा दें - अरुण चतुर्वेदी

चित्र
राजस्थान के दागी मंत्री इतिफा दें - अरुण चतुर्वेदी   २ अक्तूबर ,कोटा। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अरू ण चतुर्वेदी ने कहा कि राज्य सरकार के दागी मंत्रियों को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। यदि वे ऎसा नहीं कर रहे हैं तो मुख्यमंत्री को उन्हें पद से हटा देना चाहिए। कोटा में रविवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि भंवरी देवी प्रकरण में न्यायालय ने संगीन आरोपों में जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। इसकी सीबीआई जांच हो रही है, लेकिन मुख्यमंत्री मदेरणा से इस्तीफा लेने के बजाय उन्हें बचाने में लगे हुए हैं। राज्य सरकार ने सीडी की सत्यता की जांच नहीं की है। इसकी असलियत सबके सामने आनी चाहिए। एक माह से ज्यादा समय हो गया, लेकिन अब तक एएनएम का पता नहीं चला है। उन्होंने कहा कि जनता सत्यता जाननी चाहती है कि आखिर ऎसी क्या मजबूरी थी कि भीलवाड़ा में एक मंत्री बिना पोस्टमार्टम कराए शव ले गए। बाद में देर रात प्रशासन पर दबाव डालकर शव का पोस्टमार्टम करवाया। उन्होंने कहका कि प्रदेश के गृहमंत्री और शिक्षामंत्री बदजुबानी के लिए चर्चा में हैं। गोपालगढ़ और अवैध ख...

तो महात्मा गांधी साम्प्रदायिक होते...

चित्र
महात्मा गांधी ने अपने स्वतंत्रता आन्दोलन में, वन्दे मातरम....., रघुपति राघव राजा राम .., वैष्णव जन तो तेने कहिये--- जैसे हिन्दू शब्दों का उपयोग किया ....मगर वह वीर थे उन्होंने सत्य को ही अपनाया ...उन्होंने ढोंग  नहीं किया... आज की कांग्रेस सिर्फ ढोंगी है... गाँधी जी - मैं तो बस प्रार्थना कर रहा हूं और आशा लगाए हूं कि एक नये और मजबूत भारत का उदय होगा। यह भारत पश्चिम की तमाम बीभत्स चीजों का घटिया अनुकरण करने वाला युद्धप्रिय राष्टं नहीं होगा। बल्कि एक ऐसा नूतन भारत होगा जो पश्चिम की अच्छी बातों को सीखने के लिए तत्पर होगा और केवल एशिया तथा अफ्रीका ही नहीं बल्कि समस्त पीडित संसार उसकी ओर आशा की दृष्टि से देखेगा...लेकिन, पश्चिम की तडक-भडक की झूठी नकल और पागलपन के बावजूद, मेरे और मेरे जैसे बहुत-से लोगों के मन में यह आशा बंधी हुई है कि भारत इस सांघातिक नृत्य से उबर जाएगा, और 1915 से लेकर निरंतर अहिंसा का जो प्रशिक्षण लिया है, चाहे वह कितना ही अपरिपक्व हो, उसके बाद वह जिस नैतिक ऊँचाई पर बैठने का अधिकारी है, उस स्थान पर आसीन होगा....... गुजरात के संत कवि नरसी मेहता द्व...

रघुपति राघव राजाराम

चित्र
रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम. सीताराम सीताराम, भज प्यारे तु सीताराम. इश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान जय रघुनंदन जय सीयाराम जानकी वल्ल्भ सीताराम It is believed that as a “traditional” bhajan it was popularized, by Acharya Vishnu Digambar Paluskar, which is based on a mantra by the 17th century Marathi saint-poet Ramdas. The language is Hindi. The version popularized by Mahatma Gandhi is: रघुपति राघव राजाराम , पतित पावन सीताराम सीताराम सीताराम, भज प्यारे तू सीताराम ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सब को सन्मति दे भगवान Transliteration: Raghupati Raghav raja Ram, patit pavan Sita Ram Sita Ram Sita Ram,Bhaj pyare tu Sitaram Ishwar Allah tere naam, Saab ko Sanmti de Bhagavan Translation: Lord Rama, Chief of the house of Raghu Uplifters of those who have fallen, (O divine couple) Sita and Rama Beloved, praise Sita and Rama God or Allah is your name Lord, bless everyone with wisdom Sometimes these are added: जय रघुनंदन जय सिया राम जानकी वल्लभ सीताराम

श्री दुर्गा चालीसा ..........

चित्र
श्री दुर्गा चालीसा .......... ... नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥ तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥ प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥ शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥ रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥ धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥ रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥ लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥ क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥ हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥ मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥ श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥ केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥ कर में खप्पर खड्ग विराजै ।जाको देख काल डर भाजै॥ सोहै अस्त्र और त्रिशूल...

सावधान दिग्विजयसिंह की पुलिस आ रही है.......

चित्र
- अरविन्द सीसौदिया, कोटा सावधान - सावधान दिग्विजयसिंह की पुलिस आ रही है....... जनता की प्रखर आवाज कुचलने के लिये कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह जी ने मोर्चा संभाल लिया है। ऐसा ही इंदिराजी के समय आपातकाल लगा कर हुआ था। अब आप अपने स्वतंत्र विचार इंटरनेट , फेसबुक ,यू-टियूब,ब्लाग,  टिवीटर  , ओरकुट और अन्य साईटों पर नहीं लिख सकते, लिखा तो आपके खिलाफ कानूनी कार्यवाही होगी। इन कार्यवाहियों में पुलिस को कांग्रेस का हित साधनें के लिये आप जैसे स्वतंत्र विचार प्रखरता से रखने वालों का दमन करेगी। वह आपका दमन नहीं करेगी तो,पुलिस की खैर नहीं । वैसे भी जब सी बी आई जैसी बडी संस्था कांग्रेसहित साधन का यंत्र बन गई हो तो पुलिस तो बहुत कमजोर कडी है। दिग्विजयसिंह जी ने 22 शिकायतें दिल्ली पुलिस में दर्ज करवाई है। उन्होने फेसबुक,ओरकुट और टिवीटर की भी शिकायत दर्ज की हे। उनकी शिकायतों का आधार मान लिया जाये तो, कोई अखबार न तो व्यंग  चित्र बना सकता और न व्यंग लिख सकता और न व्यंग कविता पाठ कर सकता । ------- सोशल नेटवर्किंग साइटों पर दिग्विजय का हल्ला  बोल    http://www.bhaskar.c...

हम अलीबाबा और चालीस चोर तो हो नहीं

चित्र
- अरविन्द सीसौदिया , कोटा, राजस्थान । अलीबाबा और चालीस चोर.... सभी चोरों ने मिल कर सलाह की ....हम राजा हैं,हम मंत्री हैं, मंत्रीयों के उपर हमारा अधिपत्य है..!! फिर हम चोर या भ्रष्टाचारी कैसे हो सकते हैं ? जनता से पैसा लेना और उसे अपने उपर खर्च करना तो हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है !! जनता को लूटना और जनधन को लुटवाना..,परिभाषा को फेर भले ही हो , मगर यह तो हमारा अधिकार है । इसीलिये कल सोनिया जी, मनमोहनसिंह जी, प्रणव दा और चिदम्बरम एक हुये सब ने मिल कर कहा । हम क्लीन हैं...,हमने जो किया था वही ठीक है और कानून सम्मत हे। हम चुने हुए लोग हैं इसलिये अलीबाबा और चालीस चोर तो हो नहीं सकते.....................

राष्ट्रहित के लिए : राष्ट्रपति का निर्वाचन जनता करे

चित्र
अरविन्द सीसौदिया हमारी पद्यति प्रतिनिधि पद्यति होनें से , जनता  और शासन के बीच  में जन प्रतिनिधि नामक एक बिचोलिय आ खड़ा हुआ .., यह कभी बहुत देश भक्त ही था.., मगर अभी हम इसे दयानिधि मारन और ए राजा के रूप में समर्थन की वसूली करते हुए देख रहे हैं .., अब तो पंच  भी बिकते देखे गये हैं .. जन प्रतिनिधि स्तर पर आई गिरावट का सुधार सीधे जनता के द्वारा प्रमुख पद को चुनने में ही है | यदि सरपंच की ही तरह या महापौर की ही तरह जनता को मुख्यमंत्री या राज्यपाल और प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति का चुनाव का अधिकार मिल जाये तो काफी समस्या का हल निकल आये और ये बेशर्म बिका बिकी समाप्त हो जाये.....   हमारी स्वतंत्रता के लिये राष्ट्रपति पद का कितना महत्व है, यह समझने के लिए हमें 25 जून 1975 की रात्रि 11 बजकर 45 मिनिट पर, तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमति इन्दिरा गांधी के कहने पर, लगाये गये आपातकाल को समझना होगा। जिसमें राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 352 के अन्तर्गत आंतरिक आपातकाल लगा दिया था। जेलों में डाले गये निर्दोषों को न्यायालय मुक...

प्रथम युद्ध विजेता प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री

चित्र
- अरविन्द सीसौदिया , कोटा, राजस्थान । हम महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को मनाते हैं और उसमें भारत के प्रथम युद्ध विजेता प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी का व्यक्तित्व दवा बैठते है। याद रहे भारत की आजादी के बाद पाकिस्तान को सीधे युद्ध के मैदान में हरानें का गौरव हमें लम्बे समय के इंतजार के बाद मिला । इससे पहले हम हारने वाले लोग मानें जाते थे। 2 अक्टूबर को हमें शास्त्रीजी की जयंती भी व्यापक और उत्साह पूर्वक मनानी चाहिये। एक प्रकार से विजय दिवस के रूप में मनानी चाहिए..! ------- लालबहादुर शास्त्री (2 अक्तूबर, 1904 - 11 जनवरी, 1966),भारत के दूसरे स्थायी प्रधानमंत्री थे । वह 1963-1965 के बीच भारत के प्रधान मन्त्री थे। शास्त्री का जन्म 1904 में मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में लाल बहादुर श्रीवास्तव के रुप में हुआ था। उनके पिता शारदा प्रसाद एक गरीब शिक्षक थे, जो बाद में राजस्व कार्यालय में लिपिक (क्लर्क) बने। भारत की स्वतंत्रता के पश्चात शास्त्रीजी को उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव के रुप में नियुक्त किया गया था। वो गोविंद बल्लभ पंत के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में प्रहरी एवं यातायात मंत्री ब...