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झूठे नैरेटिवों पर मोदीजी की विजयगाथा

झूठे नैरेटिवों पर मोदीजी की विजयगाथा झूठी नौटंकियाँ होती रहीं, देश को रोकने के लिए, काँटे बिछाए जाते रहे, हर कदम को रोकने के लिए। न कदम कभी डगमगाए, न दृढ़ विश्वास कम हुआ, मोदीजी बढ़ते रहे, हर चुनौती का सामना करने के लिए। ====1==== कभी उन्हें तानाशाह कहा, कभी न जाने क्या-क्या बोला, झूठ के बाज़ारों में हर दिन, नया-नया आरोप ही खोला। लेकिन समय ने हर अफ़वाह का सच दुनिया को दिखला दिया, सेवा, साहस और संकल्प ने हर भ्रम को मिटा दिया। ====2==== मोदीजी ने उत्तर भाषणों से कम, कर्मों से अधिक दिया, हर चुनौती को अवसर मान, भारत का मस्तक ऊँचा किया। जिन्होंने हर मोड़ पर रोड़े अटकाने का प्रयास किया, उन्होंने ही अनजाने में उनके संकल्प को और प्रखर किया। ====3==== सदियों की इस यात्रा में, ऐसा नेतृत्व कम ही आया, जिसने स्वयं से पहले भारत माँ का सम्मान बढ़ाया। हर संकट में अटल खड़े रहे, हर विपदा से लोहा लिया, विश्व पटल पर भारत का गौरव नई ऊँचाइयों तक पहुँचा दिया। ====4==== झूठे नैरेटिव थक जाएँगे, सत्य कभी न हार सकेगा, सेवा का पथ अपनाने वाला इतिहास में अमर रहेगा। जब-जब भारत की गाथा का स्वर्णिम अध्याय लिखा जाएगा, ...

देश में पत्रकारिता के लिए एक ठोस नियामक ढांचा हो - हाईकोर्ट

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने डिजिटल मीडिया के दौर में प्रेस की स्वतंत्रता और जवाबदेही पर एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए देश में पत्रकारिता के लिए एक ठोस नियामक ढांचा (Regulatory Framework) बनाने का सुझाव दिया है। अदालत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में हर वह व्यक्ति जिसके पास एक मोबाइल फोन और माइक्रोफोन है, वह खुद को 'रिपोर्टर' घोषित कर देता है। ऐसे स्वयंभू पत्रकारों के पास न तो पत्रकारिता का कोई औपचारिक प्रशिक्षण होता है और न ही वे किसी नैतिक जवाबदेही से बंधे होते हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रेस की आजादी बेशक लोकतंत्र की आधारशिला है, लेकिन इसका उपयोग गैर-जिम्मेदाराना पत्रकारिता करने, लोगों को धमकाने या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे में डालने के लिए एक ढाल के रूप में नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने 'स्वयंभू पत्रकारों' द्वारा की जा रही चुनिंदा रिपोर्टिंग (Selective Reporting), सनसनीखेज खबरों और अपुष्ट आरोपों के प्रसारण पर गंभीर चिंता जताई। अदालत के अनुसार, बिना जांच-परख के चलाए जाने वाले ऐसे आचरण से न सिर्फ समाज में विभाजन गहरा सकता है, बल्कि सांप्रदायिक...

स्वतंत्रता से पूर्व से ही विभाजन, तुष्टीकरण और हिंदू हितों की उपेक्षा कांग्रेस की नीति

स्वतंत्रता से पूर्व से ही विभाजन, तुष्टीकरण और हिंदू हितों की उपेक्षा कांग्रेस की निर्बल नीति के कारण हुआ जो अभी तक चला आ रहा है - अरविन्द सिसोदिया  भारतीय राजनीति के इतिहास और वर्तमान का यदि निष्पक्ष विश्लेषण किया जाए, तो एक यक्ष प्रश्न लगातार सामने आता है—क्या भारत का विभाजन, सांस्कृतिक अवरोध और सांप्रदायिक तुष्टीकरण केवल तत्कालीन परिस्थितियों की मजबूरी थी, या फिर यह कांग्रेस की वैचारिक निर्बलता और अदूरदर्शी नीतियों का परिणाम था? इतिहास के पन्नों को पलटने पर स्पष्ट होता है कि ब्रिटिश हुकूमत की 'फूट डालो और राज करो' की कुटिल नीति को परास्त करने में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व न केवल विफल रहा, बल्कि उसने अनजाने में या राजनीतिक लाभ के लिए उन विभाजनों और समझौतों को स्वीकार किया, जिनकी गूंज आज भी आधुनिक भारत में सुनाई देती है।  ब्रिटिश षड्यंत्र और कांग्रेस का आत्मसमर्पण यह ऐतिहासिक रूप से सिद्ध है कि अंग्रेजों ने बंगाल विभाजन (1905) जो 1947 में देश का विभाजन बना और अलीगढ़ आंदोलन के उत्तरार्ध का राजनीतिकरण करके भारत को धार्मिक आधार पर बांटने का जाल बिछाया था। लॉर्ड कर्जन से लेकर मिं...

भारत को महाशक्ति बनने से रोकने के लिए हिंदुत्व में विभाजन के षड्यंत्र — अरविन्द सिसोदिया

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भारत को महाशक्ति बनने से रोकने के लिए हिंदुत्व में विभाजन के षड्यंत्र — अरविन्द सिसोदिया भारत को महाशक्ति बनाने के लिए हिंदुत्व की मजबूत एकता जरूरी — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 18 जुलाई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने हिंदू विभाजन के चल रहे विश्वस्तरीय षड्यंत्रों तथा "डीप स्टेट" की इसमें बढ़ती रुचि और अमेरिकी अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस द्वारा मोदी सरकार विरुद्ध अनापसनाप बकबासों और भारत में अराजकता फैलाने की विपक्ष की विविध कोशिशों को एक साथ जोड़ते हुए, इन्हें " भारत को महाशक्ति बनने से रोकने का षड्यंत्र बताया है। " उन्होंने कहा कि, "भारत की मजबूती के लिए हिंदुत्व की मजबूत एकता जरूरी है। भारत और हिंदुत्व एक हैं। हिंदुत्व ही भारत की राष्ट्रीयता है। देशहित में हिंदुत्व को मोदीजी के साथ दृढ़ता से खड़ा रहना होगा।" सिसोदिया ने कहा कि, "जब से भारत में हिंदुत्ववादी मोदीजी की सरकार बनी है और भारत तेजी से महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर हुआ है, तब से वैश्विक स्तर पर मोदीजी क...

हिंदुत्व विरोधी, मोदी विरोधी और 'माफीनामे' के भंवर में फंसा हुआ आराजक कुनबा मात्र बन गया विपक्ष - अरविन्द सिसोदिया

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हिंदुत्व विरोधी , मोदी विरोधी और 'माफीनामे' के भंवर में फंसा हुआ, मात्र आराजक कुनबा बन गया विपक्ष - अरविन्द सिसोदिया  19 जुलाई कोटा। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया नें भारतीय विपक्ष के आराजकतावाद पर कटाक्ष करते हुये कहा है कि " लोकतंत्र में एक मजबूत और वैचारिक रूप से समृद्ध विपक्ष का होना अनिवार्य माना जाता है। सत्तापक्ष की कमियों को उजागर करना, जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरना और वैकल्पिक नीतियां पेश करना विपक्ष का प्राथमिक धर्म है। लेकिन, पिछले एक दशक और विशेषकर हालिया वर्षों के राजनीतिक घटनाक्रमों पर नजर डालें, तो भारतीय राजनीति का परिदृश्य बदला हुआ नजर आता है। आज देश का विपक्ष बुनियादी मुद्दों की राजनीति करने के बजाय चार धुरियों के इर्द-गिर्द सिमटता दिख रहा है, सनातन हिंदुत्व का अंधविरोध, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति व्यक्तिगत शत्रुतापूर्ण बदजुबानी और गलत बयानों के लिए अदालतों में जाकर माफी मांगने का सिलसिला। ऐसा लगता है मानो विपक्ष जनसरोकारों से कटकर केवल एक विशिष्ट नकारात्मक आर...

सामाजिक जीवन में गिरते मूल्य और बढ़ते अपराध : केवल कानून नहीं, समग्र प्रशासनिक व्यवस्था पर चिंतन आवश्यक— अरविन्द सिसोदिया

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सामाजिक जीवन में गिरते मूल्य और बढ़ते अपराध : केवल कानून नहीं, समग्र प्रशासनिक व्यवस्था पर चिंतन आवश्यक — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 1 जुलाई। देश में पारिवारिक और सामाजिक अपराधों की बढ़ती घटनाएँ केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं हैं, बल्कि यह समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और मानसिक स्वास्थ्य में आई गिरावट का संकेत भी हैं। संपत्ति विवादों में पिता की हत्या, दादा की हत्या, पति द्वारा पत्नी और बच्चों की हत्या, महिलाओं एवं बुजुर्गों पर अत्याचार जैसी घटनाएँ यह बताती हैं कि समाज के भीतर संवाद, संयम, सहिष्णुता और संतोष जैसे जीवन-मूल्य कमजोर पड़ रहे हैं। भारत का संविधान लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था स्थापित करता है। लोकतंत्र और चुनी हुई सरकारों का दायित्व केवल शासन चलाना, कर वसूलना, सड़कें बनाना और कानून लागू करना भर नहीं है। उनका व्यापक दायित्व ऐसी सामाजिक व्यवस्था का निर्माण करना भी है, जिसमें नागरिक सुरक्षित हों, अनुशासित हों, समन्वय की भावना हो, परस्पर विश्वास बना रहे, परिवार मजबूत हों, समाज संतुष्ट रहे और प्रत्येक व्यक्ति सम्मानपूर्वक, सुखपूर्वक तथा शांति से जीवन जी सके। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक ...

देश की कॉलर ऊँची करते मोदीजी, पग पग में कांटे बिछाता विपक्ष, देश सब देख रहा है - अरविन्द सिसोदिया

देश की कॉलर ऊँची करते मोदीजी, पग पग में कांटे बिछाता विपक्ष, सबक सिखाएगा जनमत - अरविन्द सिसोदिया  कोटा 19 जुलाई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया नें कहा कि " देश इस समय केंद्र सरकार की सर्वोच्चता और विपक्ष की सर्वोच्च गिरावट के दौर से गुजर रहा है।  जब विपक्ष विदेशी षड्यंन्त्रों को कवर फायर देनें का राष्ट्र विरोधी कृत्य कर रहा है, तो देशवासियों को भी देश की कालर ऊँची करने वाली प्रधानमंत्री मोदीजी की सरकार के पक्ष में खुल कर साथ खडे होना चाहिए। " उन्होंने कहा कि " आज का भारत वैश्विक पटल पर एक नई करवट ले रहा है, जहाँ देश का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय और सामरिक मोर्चों पर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, देशहित की तराजू पर  मौजूदा सरकार की तुलना पूर्ववर्ती सरकारों से की जाए, तो कई ऐसे ठोस पहलू सामने आते हैं जहाँ भारत ने अभूतपूर्व ऊंचाइयों को छुआ है और देश के मान सम्मान में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। "  अंतरराष्ट्रीय मंच पर बुलंद होता भारत का इक़बाल सिसोदिया नें कहा कि " वैश्विक कूटनीति के मामले में भारत आज किसी महाशक्ति के पी...

माननीय जिला कलेक्टर महोदय, स्वामित्व योजना

माननीय जिला कलेक्टर महोदय,  जिला - गुना  जिला कलेक्ट्रेट परिसर, गुना। विषय - 1.स्व भूपेंद्र सिंह सिसोदिया पुत्र स्व समंदर सिंह जी के प्लाट क्रमांक- 32 रकबा 2175 वर्ग मीटर, आबादी खसरा नंबर 273 रकबा 1.076 हैक्टर, ग्राम - मोड़का, ग्राम पंचायत - सूजाखेड़ी, तहसील बमोरी, जिला गुना मप्र स्थित पुस्तेनी आवासीय परिसर के स्वामित्व सर्वेक्षण में तैयार किए गये खसरे में त्रुटि सुधार कर सभी उत्तराधिकारीयों के नाम दर्ज किए जानें के संदर्भ में। 2. त्रुटि सुधार निर्णय होनें तक उपरोक्त संपत्ति के सभी आठ सह स्वामियों के हितों की रक्षा करने हेतु वर्तमान आदेश को स्थगित कर,किसी भी प्रकार के क्रय विक्रय एवं किसी भी प्रकार के हस्तानांतरण रोक एवं यथास्थिति बनाये रखने के संदर्भ में। संदर्भ - स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्रकरण क्रमांक 0863/अ -3/2020-21जिसका अंतिम प्रकाशन 02/05/2023 को हुआ है के संदर्भ में। वादी  अरविन्द सिंह सिसोदिया पुत्र भूपेंद्र सिंह सिसोदिया जाति राजपूत आयु 69 वर्ष निवासी ग्राम मोड़का जिला गुना हाल निवास - बेकरी के सामने, राधाकृष्ण मंदिर रोड़, डडवाड़ा, कोटा जंक्शन राज पिनकोड - 324002 ...

जिद्दी वंशवाद से मुक्ति का अभियान है राजनीतिक दलों का विघटन - अरविन्द सिसोदिया

जिद्दी वंशवाद से मुक्ति का अभियान है राजनीतिक दलों का विघटन - अरविन्द सिसोदिया  भारतीय लोकतंत्र आज बदलाव के एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। हाल के वर्षों में विभिन्न राजनीतिक दलों में हुए बड़े और अभूतपूर्व विघटन (टूट) केवल सत्ता की सामान्य लड़ाई या व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के परिणाम नहीं हैं। गहराई से विश्लेषण करने पर यह साफ दिखाई देता है कि यह देश के राजनीतिक परिदृश्य को दशकों से जकड़े हुए 'जिद्दी वंशवाद' और 'व्यक्तिवादी सामंतशाही' के खिलाफ जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं का एक स्वतः स्फूर्त मुक्ति अभियान बन चुका है। ## विचारधारा बनाम पारिवारिक हित की जंग आजादी के बाद भारतीय राजनीति का एक बड़ा हिस्सा विचार-केंद्रित होने के बजाय व्यक्ति-केंद्रित और परिवार-केंद्रित होता चला गया। कई क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों में यह परंपरा बन गई कि पार्टी का सर्वोच्च पद, निर्णय लेने के अधिकार और यहाँ तक कि चुनावी टिकट भी केवल एक परिवार विशेष की जागीर बनकर रह गए। जमीन पर पसीना बहाने वाले, दिन-रात जनता के बीच रहने वाले समर्पित नेताओं की भूमिका केवल 'दरबारियों' जैसी सीमित कर दी गई। दलो...