मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की विज्ञप्ति क्या न्यायपालिका और देश को धमकी है ?


आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड , नई दिल्ली के लेटर हेड पर एक विज्ञप्ति जारी कर, भारत के न्यायालयों पर अपरोक्ष भेदभाव का प्रश्न उछाला गया है तथा न्यायालय में न्याय प्राप्त करने वाले लोगों को साम्प्रदायिक ताकत कहा गया है। यह दोनों ही बातें असंवैधानिक हैं। प्रतीत यह हो रहा है कि भारत की न्याय व्यवस्था को, न्यायपालिका को दबाव में लेनें के लिये यह विज्ञप्ति जारी की गई है। जो कि स्वयं आपराधिक है। भारत सरकार को इस पर संज्ञान लेना चाहिये।


यह विज्ञप्ति संस्था ने अपने अधिकृत टिविटर एकाउन्ट पर डाली हुई है।

------------------------------------

मस्जिदों के अपमान को मुसलमान कदापि गवारा नहीं कर सकते, साम्प्रदायिक शक्तियां अराजकता पर उतारू हैं और अदालतें भी पीड़ितों को निराश कर रही हैं : ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड




 



टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

पराक्रमी महाराणा प्रताप Mighty Maharana Pratap

10 मई, 1857 की क्रांति की वर्षगांठ के अवसर पर : जनक्रांति: 1857

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

जनता के सामने झुकना ही लोकतंत्र का सम्मान — अरविन्द सिसोदिया

बंगाल में भाजपा को जमाने में कैलाश विजयवर्गीय और दिलीप घोष का महत्वपूर्ण योगदान रहा....

असम में अब मुस्लिम लीग जैसी बन गई है कांग्रेस- AIUDF

गोरक्षा आन्दोलन 1966 जब संतों के खून से नहाई थी दिल्ली, इंन्दिरा गांधी सरकार ने की थी गोलीबारी

बंगाल में भाजपा विजय पर विदेशी मीडिया का नकारात्मक स्वर