टुडो के आरोप कनाडाई चुनावी हथकण्डा मात्र - अरविन्द सिसोदिया

कनाडा के टुडो के भारत पर आरोप कनाडाई चुनावी हथकण्डा मात्र  - अरविन्द सिसोदिया

जहां कनाडा की वर्तमान जस्टिन टूडो सरकार अल्पमत सरकार है और वह वहां की सिख पार्टी के समर्थन पर टिकी हुई है , वहीं 2025 के अक्टूबर में वहां चुनाव होकर नई सरकार चुनी जानी है । इससे पहले अक्टूबर 2019 के चुनाव में टूडो की पार्टी  स्पष्ट बहुमत से दूर रह गई थी ।

तब प्रधानमंत्री बनने के लिए जस्टिन ट्रूडो को समर्थन चाहिए था और जगमीत सिंह की पार्टी नें उन्हें कुछ खुली और कुछ गुप्त शर्तों के आधार पर समर्थन दिया था। तभी से टूडो सरकार का भारत विरोधी रवैय्या लगातार देखा जा रहा है । इसके पीछे कुछ गुप्त समझौतों का होना माना जा रहा है ।

कनाडा में 2019 में जगमीत सिंह के नेतृत्व वाली न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी को 24 सीटें मिली हैं और उनकी पार्टी का वोट प्रतिशत 15.9% रहा है। जो कि अत्यंत महत्वपूर्ण है । कनाडा के 338 सीटों वाले हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी को मात्र 157 सीटें मिली थीं वे बहुमत से वो 20 सीटें दूर थे , उनको बहुमत के लिए जरूरी सीटें NDP पार्टी के समर्थन से पूरी हुई ।

वहां मुख्य समस्या यह है कि टूडो सरकार अक्टूबर 2025 में तीसरीबार चुनाव में उतरेगी और वर्तमान में भी अल्पमत है , उसकी काफी सीटें घटी थीं । यही हाल सिख पार्टी NDP का भी है उनकी भी काफी सीटें घटी हैं । वे 39 से 24 पर पहुँच गए । अर्थात दोनों ही दलों को अपनी अपनी साख बचाने झूठ के प्रोपेगैंडा रच रहे हैं।

टूडो का सत्ता में आना बहुत मुश्किल है , उनकी रेटिंग लगभग आधी रह गई है और फिर लगातार तीसरीबार रिपीट होना यूँ भी राजनीति में बहुत मुश्किल होता है । 

टूडो वोटों का ध्रुवीकरण झूठ के आधार पर करके चुनाव जीतना चाहते हैं , यह भी कनाडाई परिवेश में तुष्टिकरण की राजनीति है । किंतु टूडो का हारना भी निश्चित है , क्योंकि उनके क्रियाकलापों से उनका ट्रेडिशनल वोटर भी खफा है ।

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