संदेश

भजन लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

किसी के काम जो आये, उसे इन्सान कहते हैं

चित्र
 किसी के काम जो आये, उसे इन्सान कहते हैं भजन  (Kisi Ke Kam Jo Aaye Use Insan Kahte Hai) किसी के काम जो आये, उसे इन्सान कहते हैं । पराया दर्द अपनाये, उसे इन्सान कहते हैं ॥ कभी धनवान है कितना, कभी इन्सान निर्धन है । कभी सुख है, कभी दुःख है, इसी का नाम जीवन है ॥ जो मुश्किल में न घबराये, उसे इन्सान कहते हैं ॥ किसी के काम जो आये, उसे इन्सान कहते हैं । पराया दर्द अपनाये, उसे इन्सान कहते हैं ॥ यह दुनियाँ एक उलझन है, कहीं धोखा कहीं ठोकर । कोई हँस-हँस के जीता है, कोई जीता है रो-रोकर ॥ जो गिरकर फिर सँभल जाये, उसे इन्सान कहते हैं ॥ किसी के काम जो आये, उसे इन्सान कहते हैं । पराया दर्द अपनाये, उसे इन्सान कहते हैं ॥ अगर गलती रुलाती है, तो राहें भी दिखाती है । मनुज गलती का पुतला है, यह अक्सर हो ही जाती है ॥ जो कर ले ठीक गलती को, उसे इन्सान कहते हैं ॥ किसी के काम जो आये, उसे इन्सान कहते हैं । पराया दर्द अपनाये, उसे इन्सान कहते हैं ॥ यों भरने को तो दुनियाँ में, पशु भी पेट भरते हैं । लिये इन्सान का दिल जो, वो नर परमार्थ करते हैं ॥ पथिक जो बाँट कर खाये, उसे इन्सान कहते हैं ॥ किसी के काम जो आये, ...

स्याम ! मने चाकर राखो जी ( भजन ) meera bhajan

चित्र
स्याम! मने चाकर राखो जी,  मीरा बाई का सुप्रशिद्ध भजन -  गिरधारिलाल! चाकर राखो जी॥ चाकर रह सूँ बाग लगा सूँ, नित उठ दरसण पासूँ।  बिंद्राबन की कुंजगलिन में, तेरी लीला गासूँ॥  चाकरी में दरसण पाऊँ, सुमिरन पाऊँ खरची।  भाव भगति जागीरी पाऊँ, तीनूँ बाताँ सरसी॥  मोर मुगट पीतांबर सोहे, गल बैजंती माला।  बिंद्राबन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला॥  हरे हरे नित बाग लगाऊँ, बिच बिच राखूँ क्यारी।  साँवरिया के दरसण पाऊँ, पहर कुसुम्मी सारी॥  जोगी आया जोग करण कूँ, तप करणे संन्यासी।  हरि भजन कूँ साधु आयो, बिंद्राबन के बासी॥  मीरा के प्रभु गहिर गंभीरा, सदा रहो जी धीरा।  आधी रात प्रभु दरसन दीन्हें, प्रेम नदी के तीरा अर्थात -  श्याम मुझे नौकर रख लो। गिरधर लाल मुझे नौकर रख लो। मैं तुम्हारी नौकरी करूँगी, बाग़ लगाऊँगी, रोज़ उठते ही तुम्हारा दीदार करूँगी और वृंदावन की हरी-भरी गलियों में तुम्हारी लीला गाऊँगी। नौकरी के बदले दीदार मिलेगा, तुम्हारा नाम जपना मेरी तनख़्वाह होगी तुम्हारे तसव्वुर और भक्ति की मुझे जागीर मिलेगी, तीनों ही बातें अच्छी ह...

भजन : तुम ही एक नाथ हमारे हो ..................

चित्र
- अरविन्द सिसोदिया  तुम ही एक नाथ हमारे हो .................. पितु मातु सहायक स्वामी सखा तुमही एक नाथ हमारे हो .  जिनके कछु और आधार नहीं तिन्ह के तुमही रखवारे हो ..  ---------1 सब भांति सदा सुखदायक हो दुःख दुर्गुण नाशनहारे हो .  प्रतिपाल करो सिगरे जग को अतिशय करुणा उर धारे हो ..  ---------2 भुलिहै हम ही तुमको तुम तो हमरी सुधि नाहिं बिसारे हो ..  उपकारन को कछु अंत नही छिन ही छिन जो विस्तारे हो .  ---------3 महाराज! महा महिमा तुम्हरी समुझे बिरले बुधवारे हो .  शुभ शांति निकेतन प्रेम निधे मनमंदिर के उजियारे हो ..  ---------4 यह जीवन के तुम्ह जीवन हो इन प्राणन के तुम प्यारे हो .  तुम सों प्रभु पाइ प्रताप हरि केहि के अब और सहारे हो ..  --------- भजन