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कलंक से मुक्त होते ही दिल्ली, आतंकवादी की निकटता में फंसी

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  कलंक से मुक्त होते ही दिल्ली, आतंकवादी की निकटता में फंसी  यूं तो अरविन्द केजरीवाल नें दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, क्यों कि उनके पास कोई ओर विकल्प ही नहीं था। भारत के सर्वोच्च न्यायालय नें जमानत में ही उन्हे मुख्यमंत्री पद से दूर रखा था, क्यों कि एक न्यायालय को उनके ऊपर लेगे आरोपों में सच्चाई दिखी होगी। यूं भी केजरीवाल की जल्दी जल्दी सुनवाई के अवसरों के कारण न्यायपालिका प्रश्न चिन्हित हो रही थी।  केजरीवाल नें मुख्यतौर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा तो इसीलिये दिया है कि रोज रोज फजीहत होती। खबरें बनती , लेख लिखे होते, टिपपणियां होतीं, कि जमानतसुदा मुख्यमंत्री को पद पर कार्य करने से रोक के कारण सरकार के कामकाज अटके पडे हैं।  पूरी दुनिया अपरोक्षरूप से जंग लडती रहती है, विशेषकर बडे देशों के षढयंत्रों के कारण बहुत से देश परेशान रहते हैं, क्यों कि अपने हितों के लिये किसी भी देश की आंतरिक व्यवस्था में अपरोक्ष हस्तक्षेप इस तरह की गुप्त जंगों का हिस्सा है। हाल ही में इस तरह की गुप्त गतिविधि का शिकार बांगलादेश हुआ। अमेरिकी हितो का ठकराव ...

केजरीवाल पार्टी टूटनें से बचने के लिये क्या पत्नि को मुख्यमंत्री बनायेंगे ? AAP Arvind Kejriwal

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  केजरीवाल पार्टी टूटनें से बचने के लिये क्या पत्नि को मुख्यमंत्री बनायेंगे ?  आम आदमी पार्टी के मुखिया नें अपने अनैतिक मुख्यमंत्री पद को ठोडनें में बहुत देर करदी , वे भारत के पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होनें मुख्मंत्री पद की गरिमा को हलाल किया है। वे लगातार महीनों महीनों मुख्यमंत्री जैसे गरिमापूर्ण पद के साथ अनैतिकता करते रहे। अहुत देर बाद उन्होनें मुख्यमंत्री पद ठोडनें का फैसला महज इसलिये लिश है कि सर्वोच्च न्यायालय नें उन्हे मुख्यमंत्री के कार्य करनें से पूर्णतः न केबल रोका बल्कि एक अपराधी जैसा ही माना है। अर्थात मजबूरी में वे पद ठोडनें के फैसले पर आये है। केजरीवाल जब पद छोड़  दें तब ही यह माना जायेगा कि उन्होनें पद छोड़  दिया है। क्यों कि जिस तरह उन्होनें जेल में रहते हुये भी पद बनाये रखा और कई अहम मौकों पर पत्नि सुनीता को आगे रखा , इससे यही प्रतीत होता है कि वे विधायकदल की बैइक में पुनः मुख्यमंत्री बन सकते है। अथवा अपनी पत्नि को मुख्यमंत्री बना सकते हैं। हालांकि पूरा ड्रामा सहानुभूति बटोरने का है , क्योंकि कुछ महीनों बाद ही दिल्ली के चुनाव हैं । क्यों कि यदि दिल्ली ...

आप पार्टी को एकला चलो की नीति पर ही आना होगा - अरविन्द सिसौदिया

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  आप पार्टी को एकला चलो की नीति पर ही आना होगा - अरविन्द सिसौदिया  ( - यह विचार मेरे स्वंय के निजि विचार हैं) हरियाणा में आप पार्टी को स्पापित होना है तो एकला चलो की नीति पर ही आना होगा । क्यों कि उनका मूल मुकाबला कांग्रेस से ही है। उके विदेशों में बैठे अज्ञात पक्षधर भी वे ही हैं जो कांग्रेस के हैं । अर्थात जो भारत में संघ और भाजपा के प्रभाव को कम करना चाहते हैं, पूरे विश्व में सनातन और हिन्दुत्व को कमजोर करना चाहते हैं। भारत के अन्दर आराजकता उत्पन्न कर अन्ततः इस देश को गैर हिन्दू देश बनाना चाहते हैं और इस योजना को कामयाब करने के लिये अरबों डालर खर्च करना चाहते हैं। वे ही शक्तियां आप और कांग्रेस को परोक्ष अपरोक्ष सर्पोट करतीं हैं। गुजरात विधानसभा में आप पार्टी, कांग्रेस के सामनें लडी, कांग्रेस बुरी तरह ध्वस्त हो गई, इसका मतलब कांग्रेस के वोटर की अगली पशंद आप पार्टी है। आम आदमी पार्टी को गुजरात विधानसभा चुनावों में 40 लाख से अधिक वोट मिले और कुल वोटों में आप के खाते में 13 फीसदी मत आए। वहीं, आम आदमी पार्टी गुजरात की दो दर्जन से अधिक सीटों पर दूसरे नंबर पर रही और पांच सीटों पर ज...

इंडी गठबंधन टूटा : हरियाणा में आप पार्टी कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लडेगी

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यूं तो आप पार्टी नें पहले दिल्ली में और बाद में पंजाब में कांग्रेस से ही सत्ता छीनी है और कांग्रेस का वोट बैंक ही उसका वोट बैंक किन्तु उसका कुछ वोट बैंक दिल्ली में भाजपा का भी है जिसे वह दिल्ली चुनाव में हांसिल कर लेता है। कांग्रेस को निश्चित ही दिल्ली और पंजाब छिन जानें का दर्द होगा और वह कतई नहीं चाहेगी कि आप कांग्रेस का विकल्प बनें। यही कारण है कि कांग्रेस पूरी ताकत से आप पार्टी को समाप्त करने उतरेगी। वहीं वह हरियाणा में आप को सफल नहीं होनें देगी।  वहीं आप पार्टी भी कांग्रेस की ही तरह बडी बडी फर्जी राहत गारंटियों के जर्ये हरियाणा में चुनाव का आगाज 20 जुलाई से करने वाली प्रतीत हो रही है, वह कहीं न कहीं कांग्रेस को हरानें में ज्यादा दिलचस्पी रखती है।  - चंडीगढ़ संवाददाता सम्मेलन में आप नेताओं का ऐलान - इंडी गठबंधन टूटा : हरियाणा में आप पार्टी कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लडेगी - चुनाव पहले समझौता कर सकती है सत्ता के लिए कांग्रेस  - आप पार्टी हरियाणा की सत्ता में शामिल होनो चाहती है तो कांग्रेस उसे दूर रखना चाहती है  - आप पार्टी को अस्तित्व के लिए एक नई जीत की ...

आरोपों के बजाये अपनी गिरेबान में झांके, शराबनीति में भ्रष्टाचार तो हुआ है - अरविन्द सिसोदिया

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  आरोपों के बजाये अपनी गिरेबान में झांके, शराबनीति में भ्रष्टाचार तो हुआ है - अरविन्द सिसोदिया आप पार्टी के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल सहित कई नेता जेल में हैं, वे सभी न्यायालय के द्वारा जेल में हैं। किसी भी सरकारी एजेंसी को यह अधिकार नहीं कि वह बिना न्यायालय के किसी को जेल में भेज दे। जेल में भी वे न्यायालय के निर्णय से रहते हैं किसी एजेंसी के निर्णय से नहीं। यह बात आप पार्टी को राहुल गांधी की ही तरह नहीं समझनी तो मत समझो....! सत्य यही है कि कुछ तो है जिसके कारण आप पार्टी के नेतागण जेल में हैं। एक समय था जब सत्य हरिशचन्द्र बन कर अरविन्द केजरीवाल और बड़बोले संजय सिंह जम कर कांग्रेस सहित तमाम परिवारवादी दलों पर आरोपों की रेलगाडी चला कर इन्हे कोसते थे। बदतमीजी की सभी सीमायें लांघते थे। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ झूठ बोलना नहीं है, झूठ तो अपराध है! मगर आप पार्टी ने जिस तरह का छल कपट और पाखण्ड का इस्तेमाल राजनीति में किया , उससे एक बारगी जनता भ्रमित तो हुई मगर अब जब इनके अपराधों से नकाब उठ रहा है तो इनमें आरोप लगानें का पागलपन इस तरह छाया है कि वे यह भ...

दिल्ली में आप पार्टी का सत्ता परिवर्तन तय useless AAP party is changed

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  दिल्ली में आप पार्टी का सत्ता परिवर्तन तय Change of power of AAP party is certain in Delhi   दिल्ली : पानी बिजली दे न सके वह सरकार निकम्मी है              जो सरकार निकम्मी है वह सरकार बदलनी है। इस तरह के नारे हम बचपन से लगाते आ रहे हैं और आज भी इनका बजूद है। क्यों कि बिजली पानी व्यक्ति की प्रथम जरूरी आवश्यकता बन गये हैं, इनके बिना जीवन बहुत मुस्किल हो गया है। दिल्ली आप पार्टी के लगातार दस साल से ज्यादा के शासन के बावजूद इस गंभीर परिस्थिती को भुगत रही है। जबकि गर्मी आना, मांग बढना और पूर्ती करना एक सतत प्रक्रिया है, इसका ध्यान रखना सरका की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेवारी थी और है। दिलली में आप पार्टी की सरकार पानी के इंतजाम में पूरी तरह विफल रही है और आने वाले विधानसभा चुनावों में उसकी हार ओडीसा की तरह हो सकती है। क्यों कि भाजपा ने दिल्ली के सभी सात सांसदों को सीटों को जीता है। इससे पहले दिल्ली नगर निगम में भी आप पार्टी को भाजपा ही टक्कर दे रही है। अगले साल फरवरी 2025 में दिल्ली के विधानसभा चुनाव होनें हैं। यह चुनाव आप कांग्रेस मिल कर लडे या अ...

छदम प्रत्याशीयों से छुटकारा पाये निर्वाचन आयोग - अरविन्द सिसोदिया fake candidates of Election

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जबरदस्ती के प्रत्याशीयों से छुटकारा पाये निर्वाचन आयोग - अरविन्द सिसोदिया   छदम के प्रत्याशीयों से छुटकारा पाये निर्वाचन आयोग - अरविन्द सिसोदिया  Election Commission should get rid of fake candidates - Arvind Sisodia लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में कृत्रिम अर्थात छदम प्रत्याशीयों की बाढ़ आने लगी है, जबकि सीरियस प्रत्याशी मुश्किल से 2/3/4 होते हैँ।  उदाहरण के तौर पर कोटा में नोटा सहित 16 प्रत्याशी थे, वोट के बाद बीजेपी प्रथम, कांग्रेस द्वितीय और नोटा तृतीय क्रम पर रहे। अर्थात 13 प्रत्याशी इस तरह के जो वोट काटने के लिए अथवा वोटिंग और काउंटिंग में अपने समर्थक बढ़ाने के लिए अथवा झूठे और गैरकानूनी आरोप बगैरह अन्य प्रत्याशियों पर लगाने के लिए नामांकन पत्र भरवा कर प्रत्याशी बनाये जाते हैँ। इसके लिए सबसे पहले जमानत राशि में वृद्धि करनी चाहिए, साथ की यह कानून बनाना चाहिए कि जमानत बचानें जितने भी वोट नहीं आने पर सरकारी खर्च का 10 प्रतिशत नॉन सीरियस प्रत्याशी से वसूला जायेगा, राशि जमा नहीं करवाने पर 1 साल तक की जेल यात्रा होगी। इस तरह कि कठोरता से छदम प्रत्याशीयों की बाढ़...

नौटंकीबाज केजरीवाल सहानुभूति बटोरनें स्वंय पर प्रायोजित हमला करवा सकते हैं - अरविन्द सिसोदिया

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  चुनाव में सहानुभूति का भी खेला होता है, माना जाता है कि ममता को बंगाल में लगा कि बाजी हाथ से निकल रही है, पैर में पट्टा चढ़ गया , व्हील चेयर आ गई और चुनाव जीत गईं ! लोकसभा चुनाव में फिर से कुछ इस तरह का हुआ, येशा ही तेजस्वि का चल रहा है। केजरीवाल का जेल जाना भी एक सुनियोजित टूलकिट था लगातार 9 सम्मन ठुकरा कर आमचुनाव को समीप लागया गया फिर योजनाबद्ध जेल पहुंचा गया, यह सब सहानुभूति बटोरनें का टूलकिट था जिसमें वे सफल हुये ।  अब इसी तरह की नौटंकी की ओर केजरीवाल बड रहे हैं। क्यों कि उनकी लगातार असलियत बाहर आ रही है। वे लगातार बेनकाब हो रहे है और उनके द्वारा आने वाली नौटंकियों के लिये देश का और प्रशासन को सावधान रहना होगा ......! दिल्ली के लोगों को इसके असली चेहरे को समझना होगा। Sympathy also plays a role in elections, it is believed that in Bengal, Mamata felt that the game was slipping away, she got a strap on her leg, a wheel chair came and won the election. Something like this happened again in the Lok Sabha elections, yes Tejashwi is running. Kejriwal's going to jail...