पुलिस, राजनीती और कानून में बदलाव अपेक्षित
- अरविन्द सिसोदिया आज जब कि पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां विफल दर विफल हो रहीं हैं तब यह जरुरत बन जाती है कि एक आत्म विश्लेष्ण हो कि कारण क्या हैं ...? विशेष कर यह सत्ता रूढ़ राजनैतिक दलों के चिंता का कारण तो होना ही चाहिए और प्रतिपक्ष कि और से उठना भी चाहिए ..? स्वंय पुलिस को भी यह सोचना चाहिए ..? एक चॅनल ने बताया कि दिल्ली में पांच साल में २०० से अधिक हत्या के आरोपी अदालत ने वरी कर दिए ...! इस विषय पर संसद ठप्प हो जानी चाहिए थी ..! मगर जनता के लोग मरे उनके हत्यारे वरी हुए .., किसी दल को कोई चिता नहीं ...!! क्या ऐसा ही लोकतंत्र हमें बनाना था ..? हिन्दू धर्म कि नीति में तो वही राजा सर्वश्रेष्ठ होता है जो जनता को न्याय दे ..! न्याय को तो छोडो .., राहत और सहानुभूती में भी बेईमानी हो रही है ..? क्या इसे आराजकता नहीं कहेंगे ..? इसलिए आत्म निरिक्षण करना ही चाहिए ..! इस के कारण कई हैं ....... १. अपराध की रिपोर्ट तुरंत लिखी जाये .. , चाहे वह झूठी ही क्यों न हो ..! बाद में सही बात तो सामनें ही आ जायेगी ! मगर सच है तो सबूतों को बचाया जा सकता ह...