राजस्थान का कुर्सी युद्ध कर्नाटक पहुंचा - अरविन्द सिसोदिया rajasthan to karnatka

राजस्थान सा कुर्सीयुद्ध, अब कर्नाटक में भी होगा - अरविन्द सिसोदिया

कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद का मसला सुलझ गया है, वहाँ राजस्थान पैटर्न पर ही कर्नाटक कांग्रेस प्रदेश के अध्यक्ष डी के शिवकुमार को कर्नाटक सरकार में उपमुख्यमंत्री, उसी तरह बनाया गया है जिस तरह राजस्थान में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलेट को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को। लगता है कि अब कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को राजस्थान जैसे कुर्सी युद्ध के दौर से गुजरना पड़ेगा। क्योंकि डी के शिवकुमार सचिन जीतने सहनशील भी नहीं हैं और वे सचिन के मुकाबले बहुत अधिक तेजतर्रार और फ़ास्ट हैं। इसलिए कर्नाटक में सरकार के स्तर पर रार अधिक तेज देखने को मिल सकती है।

राजस्थान कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट नें उप मुख्यमंत्री रहते हुए लगातार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ कुर्सी युद्ध जारी रखा और अब साडे 4 साल गुजरने के बाद भी यह कुर्सी युद्ध अभी भी सड़कों पर जारी है। इस बीच उन्होंने विद्रोह कर कुछ विधायकों के साथ विद्रोह भी किया, सरकार बदलने दूसरे दल को ज्वाइन करने की भी कोशिश की, किंतु नंबर पूरे नहीं होने के कारण वे कांग्रेस सरकार को बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा पाए।
 राजस्थान में सचिन पायलट के कुर्सी युद्ध के कारण लगातार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार को विधायकों की जी हजूरी करनी पड़ी, वे किसी भी दौर में बोल्ड डिसीजन नहीं ले पाये। समर्थक विधायकों को  फाइव स्टार होटल में रखना पड़ा और उनकी तमाम में मांगे पूरी करते रहना पड़ी, तबादला उद्योग चलाना पड़ा और  व्यक्तिगत लाभ भी पहुंचाना पड़ा।

 मुख्यमंत्री गहलोत के द्वारा सत्तारुड़ विधायकों की इसी जी हजूरी में व्यस्त व पस्त रहने से जनता पीस गईं और जनहित भ्रष्टता और अफसरशाही की भेंट चढ़ गया। इसका मूल नुकसान राजस्थान की जनता को भुगतना पड़ा। जिसके चलते राजस्थान में सरकार बुरी तरह से विफल हुई कानून-व्यवस्था चौपट हो गई।

राजस्थान का यह कुर्सी युद्ध अब कर्नाटक पहुंचा लग रहा है, आने वाले कुछ महीनों में कर्नाटक में खींचतान दिखने लगेगी। यदि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया  नें कुर्सी गहलोत की तरह मजबूती से नहीं पकड़ी तो, मुख्यमंत्री बदला जायेगा या सरकार गिर जायेगी।

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