मेरा शासन My Gov चुनाव प्रणाली सुधार Election Reform



भारतीय चुनाव प्रणाली में सुधार : एक समय की माँग

भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का गौरव रखता है, किंतु इसके संचालन की प्रणाली में समयानुकूल परिवर्तन और सुधार आवश्यक हैं। लोकतंत्र की आत्मा तभी जागृत रह सकती है, जब चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी, जनहितकारी और जवाबदेह हो। इसलिए आज आवश्यकता है ऐसे चुनाव सुधारों की, जो इस प्रणाली को और अधिक सशक्त, व्यावहारिक और लोककल्याणकारी बना सकें।

चुनाव को एक पर्व के रूप में मनाया जाना चाहिए, जिसमें संसद, विधानसभा, नगरीय निकाय और पंचायतों के चुनाव एक साथ हों। यह प्रक्रिया हर पाँच वर्ष में जनवरी माह में आरंभ होकर भारतीय नववर्ष की प्रतिपदा से पहले समाप्त हो जाए, ताकि निर्वाचित जनप्रतिनिधि नववर्ष से ही अपने कार्यभार को ग्रहण कर सकें।

किसी भी प्रत्याशी को एक ही समय में एक से अधिक सीटों से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। यह न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि जनता के साथ भी एक प्रकार का विश्वासघात है।

मतदान प्रत्येक नागरिक का अनिवार्य कर्तव्य होना चाहिए। मतदान न करने पर आर्थिक दंड का प्रावधान हो, तथा असमर्थ नागरिकों के लिए विशेष ऑनलाईन अथवा डाक-मतदान की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए। ईवीएम का प्रयोग हर स्तर के चुनावों में अनिवार्य हो तथा वरिष्ठ एवं दिव्यांग नागरिकों को वैकल्पिक और सुविधाजनक मतदान के विकल्प दिए जाएँ।

"नोटा" (किसी को मत नहीं) का विकल्प हर चुनाव में अनिवार्य रूप से होना चाहिए, जिससे मतदाता यदि सभी प्रत्याशीयों को उपयुक्त न समझे, तो अपनी असहमति दर्ज कर सके।

लोकसभा, विधानसभा व अन्य सदनों में यदि कोई प्रतिनिधि कार्यकाल का आधा समय पूरा कर चुका हो, तो जनता को उसे वापस बुलाने अथवा पुष्टि करने का अधिकार मिलना चाहिए। इससे जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ेगी।

मतगणना को पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्येक राउंड की गणना घोषित की जाए तथा पुनर्गणना केवल न्यायालय के आदेश से ही संभव हो। हर राउंड में कम से कम 20 ईवीएम की गणना हो और उनमें से एक का पर्ची मिलान भी सुनिश्चित किया जाए।

राजनीति में महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु 33% सीटें महिलाओं और 10% सीटें वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षित की जानी चाहिए। यह आरक्षण क्लाक वाइज तरीके से घूर्णन करता रहे और हर परिसीमन 30 वर्षों के पूर्ण होनें पर अवश्य हो।

चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी की योग्यता और नैतिकता का निर्धारण आवश्यक है। साथ ही ऐसे व्यक्ति जिन्हें दस वर्षों की सजा हो चुकी है, या जिन पर दस वर्षों से अधिक की सजा का मुकदमा विचाराधीन है, या आदतन अपराधी हैं — वे चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित हों।

मतदाताओं की निष्ठा राष्ट्र के प्रति होनी चाहिए। यदि किसी नागरिक की निष्ठा संदिग्ध पाई जाती है या वह विदेशी प्रभाव में है, तो निर्वाचन आयोग को उसकी नागरिकता स्थगित या समाप्त करने का अधिकार मिलना चाहिए।

आज संसद और विधानसभा में अधिक सदस्यों की भीड़ से गुणवत्ता पूर्ण बहस बाधित होती है, इसलिए सीटों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। डिलीमीटेशन केवल जनसंख्या के आधार पर, जनगणना के 2-3 वर्षों के भीतर पूरा किया जाए।

मतदान पत्रों का डिजाइन सरल और स्पष्ट हो, जिसमें केवल प्रत्याशी का चेहरा, नाम और पार्टी का चुनाव चिन्ह हो। मतदाता को पहचानने और समझने में कोई कठिनाई न हो।

चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता हेतु आवश्यक है कि चुनाव के समय कार्यकारी सरकार को निलंबित कर, राष्ट्रपति/राज्यपाल के अधीन निर्वाचन मंडल गठित किया जाए। जिसमें प्रशासन और पुलिस अधिकारी एवं एक बड़ा सैन्य अधिकारी  होगा। इससे सरकारी मशीनरी पर राजनीतिक दबाव नहीं होगा।

चुनाव प्रचार अवधि सीमित हो — केंद्र चुनाव हेतु 21 दिन, राज्य चुनाव हेतु 15 दिन तथा निकाय/पंचायत चुनावों हेतु 7 दिन। साथ ही,  मतदान खर्च की सीमा तय हो और आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो। मतदाता को पर्ची blo पहुंचाएगा।

चुनाव के दौरान भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने हेतु पुलिस बल की निगरानी सेना अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए, जिनके निर्णय अंतिम हों।

केंद्र/राज्य सरकार या न्यायपालिका में कार्यरत अधिकारी या कर्मचारी सेवा मुक्ति के कम से कम पाँच वर्ष तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकें और किसी राजनीतिक दल के सदस्य भी नहीं बन सकें।

चुनाव घोषणा पत्रों में लुभावने वादों (प्रलोभन) का निषेध हो। रिश्वत, शराब या दबाव के माध्यम से वोट डलवाने पर कड़ी कार्यवाही हो।

मतदान करने वाले व्यक्ति को प्रोत्साहन राशि दी जानी चाहिए।

मतदान के दिन मौसम और पर्वों का ध्यान रखा जाए। मतदान का समय सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक सीमित हो। प्रत्येक बूथ पर 1000 मतदाता से अधिक न हों, आवश्यकता अनुसार कक्ष विभाजन हो। स्थानीय निकाय की मतगणना स्थानीय स्तर पर हो जाएगी।

राजनीति को युवा एवं ऊर्जावान नेतृत्व की आवश्यकता है। इसलिए प्रधानमंत्री/सांसद बनने की अधिकतम आयु 75 वर्ष, मुख्यमंत्री/विधायक की 65 वर्ष तथा पंचायत स्तर के प्रतिनिधियों की 50 वर्ष तक सीमित होनी चाहिए।

एक ही व्यक्ति एक पद पर अधिकतम दो बार लगातार और कुल तीन बार चुनाव लड़ सके, इससे सत्ता का केंद्रीकरण समाप्त होगा।

मंत्रीमंडलों में 33% महिलाएं और 10% वरिष्ठ प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से शामिल हों।

दल के चिन्ह पर चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी दल नहीं बदल सकते। इस्तीफा देने पर वे 11 वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ सकें।

कोई प्रत्याशी तब तक निर्वाचित घोषित न हो जब तक उसे 50% से अधिक मत प्राप्त न हों। अन्यथा टॉप दो प्रत्याशियों के बीच पुनः मतदान कराया जाए।

प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, अध्यक्ष आदि का चुनाव सदस्यों के निर्वाचित होने के 3 दिन के भीतर  सदन में चुनाव से हो जाए। इनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दो वर्ष बाद और 50% सदस्यों की सहमति से एक बार ही लाया जा सकेगा।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में "लोकल वाड़ी" प्रणाली लागू कर, उन्हें अधिक अधिकार दिए जाएं। हर वार्ड/मोहल्ला अपने सरपंच और पंचों के साथ स्थानीय समस्याओं का समाधान कर सके, इसके लिए "मोहल्ला कमेटियाँ" गठित हों।

चुनाव प्रणाली केवल सरकार बनाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की आत्मा को दिशा देने वाली प्रक्रिया है। यदि हम इस प्रणाली को समयानुकूल सुधार दें, तो न केवल लोकतंत्र सुदृढ़ होगा बल्कि जनकल्याण की अपेक्षाएं भी पूर्ण हो सकेंगी। संविधान परिवर्तन विरोध नहीं, अपितु राष्ट्रधर्म है — यदि वह राष्ट्रहित से विमुख हो जाए। हमें अपनी चुनाव प्रणाली को जनोन्मुखी, जवाबदेह, और स्वच्छ बनाना ही होगा।
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हाँ, बिल्कुल। आपने जो सुझाव दिए हैं, वे चुनाव प्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी, और जनकल्याणकारी बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। नीचे इन्हीं बिंदुओं को संक्षिप्त, क्रमबद्ध और स्पष्ट "नियमावली (Rulebook Format)" के रूप में तैयार किया गया है:

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✅ भारतीय चुनाव सुधार नियमावली (Election Reform Rulebook - Draft)

1. चुनाव समय-सारणी और आयोजन

1.1: सभी स्तरों (संसद, विधानसभा, निकाय, पंचायत) के चुनाव एक साथ “मतदान पर्व” के रूप में हर पाँच वर्ष में जनवरी माह में संपन्न हों।

1.2: चुनाव प्रक्रिया भारतीय नववर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) से पूर्व समाप्त हो।

2. प्रत्याशी योग्यता एवं चुनाव लड़ने के नियम

2.1: कोई भी प्रत्याशी एक ही समय में केवल एक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ सकेगा।

2.2: प्रत्याशी को न्यूनतम योग्यता एवं अर्हता मापदंडों को पूरा करना अनिवार्य होगा।

2.3: अधिकतम आयु सीमाएँ:
प्रधानमंत्री/सांसद: 75 वर्ष
मुख्यमंत्री/विधायक: 65 वर्ष
पार्षद/सरपंच: 50 वर्ष

2.4: कोई भी व्यक्ति:

अधिकतम 3 बार चुनाव लड़ सकेगा।
एक पद पर अधिकतम 2 बार रह सकेगा।

3. मतदाता से संबंधित नियम

3.1: मतदान करना प्रत्येक नागरिक का अनिवार्य कर्तव्य होगा। मतदान न करने पर आर्थिक दंड लगेगा (विशेष आवश्यकता अनुसार अपवाद संभव)।

3.2: मतदान हेतु आधार कार्ड अनिवार्य होगा और चेहरा सत्यापित किया जाएगा।

3.3: वरिष्ठ नागरिकों एवं विकलांगों को ऑनलाइन या डाक मतदान की सुविधा होगी।

3.4: हर बूथ पर अधिकतम 1000 मतदाता होंगे। अधिक संख्या होने पर अतिरिक्त कक्ष (क, ख, ग…) बनेंगे।

3.5: मतदाताओं को भयमुक्त वातावरण देने हेतु चुनाव ड्यूटी की निगरानी सेना अधिकारी करेंगे।

4. मतदान प्रक्रिया और ईवीएम

4.1: सभी चुनावों में ईवीएम से मतदान अनिवार्य होगा।

4.2: "नोटा" (किसी को नहीं चुनना) विकल्प हर चुनाव में अनिवार्य होगा।

4.3: मतगणना प्रत्येक राउंड के बाद होनी चाहिए और केवल न्यायालय के आदेश से ही पुनर्गणना हो सकेगी।

4.4: प्रत्येक राउंड में 20 ईवीएम खुलेंगी और 1 मशीन की पर्ची से मिलान होगा।

5. प्रत्याशी के विरुद्ध आपराधिक प्रतिबंध

5.1: 10 साल की सजा भुगत चुके या 5 साल से अधिक सजा के आरोपित/कैदी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।

5.2: आदतन अपराधी, जेल में बंद व्यक्ति या जो चुनाव के समय बंदी हो – चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।

6. आरक्षण एवं समावेशन

6.1: 33% सीटें महिलाओं हेतु, 10% सीटें वरिष्ठ नागरिकों हेतु आरक्षित होंगी।

6.2: आरक्षण घूर्णन (Clockwise Rotation) आधार पर होगा।

6.3: प्रत्येक कैबिनेट में 33% महिलाएं व 10% वरिष्ठ नागरिक अनिवार्य रूप से हों।

7. निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था

7.1: चुनाव के समय कार्यकारी सरकार भंग हो और "निर्वाचन मंडल" (राष्ट्रपति/राज्यपाल के नेतृत्व में) कार्यभार संभाले।

7.2: सरकारी अमला चुनाव आयोग के अधीन होगा, न कि राज्य सरकार के।

8. चुनाव प्रचार एवं व्यय नियंत्रण

8.1: प्रचार अवधि:

केंद्र चुनाव – 21 दिन
राज्य चुनाव – 15 दिन
पंचायत/निकाय – 7 दिन

8.2: चुनाव खर्च की सीमा एवं ऑडिट अनिवार्य होगा।

8.3: प्रलोभन (रिश्वत, शराब, मुफ्त चीजें) प्रतिबंधित होंगे।

9. सदस्यता और दल-बदल से संबंधित नियम

9.1: दल के चिन्ह से चुनाव जीतने पर दल बदल नहीं किया जा सकेगा।

9.2: इस्तीफा देने पर वह व्यक्ति 10 वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ सकेगा।

9.3: मंत्री, सांसद, विधायक का चुनाव हारने या इस्तीफा देने पर रिक्त स्थान पर फिर चुनाव होगा।

10. चुनाव परिणाम और निर्वाचित होने की शर्तें

10.1: कोई भी प्रत्याशी तभी विजयी माना जाएगा जब उसे 50% से अधिक मत प्राप्त हों।

10.2: यदि कोई 50% से कम मत पाता है, तो टॉप दो प्रत्याशियों के बीच दूसरा चुनाव कराया जाएगा।

11. अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ा नियम

11.1: प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव केवल 2 वर्ष बाद और 50% सदस्यों की सहमति से एक बार ही लाया जा सकता है। असफल होने पर दोबारा नहीं लाया जा सकेगा।

12. सेवानिवृत्त अधिकारी/कर्मचारियों से संबंधित नियम

12.1: कोई भी सेवानिवृत्त कर्मचारी/अधिकारी (केंद्र/राज्य/न्यायपालिका) से सेवा मुक्त होने के 5 वर्षों तक चुनाव या दल की सदस्यता नहीं ले सकेगा।

13. डिलीमीटेशन (निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन)

13.1: प्रत्येक 30 वर्षों में डिलीमीटेशन अनिवार्य रूप से हो।

13.2: जनगणना के 2-3 वर्षों के भीतर यह कार्य पूरा हो।

14. चुनाव पत्र/बैलेट डिज़ाइन

14.1: चुनाव पत्र पर केवल पार्टी का चिन्ह और प्रत्याशी का नाम होना चाहिए — साफ-सुथरा और समझने में आसान डिज़ाइन होना चाहिए।

15. स्थानीय शासन को अधिकार

15.1: शहरी क्षेत्रों में "लोकल वाड़ी" प्रणाली लागू हो जिसमें सरपंच के साथ 10 पंच निर्वाचित हों।

15.2: शहरी मोहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याएं स्थानीय स्तर पर "मोहल्ला कमेटी" के माध्यम से हल हों।



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