गोधरा बनाम कांग्रेस

नीचे मोहम्मद हुसैन कलोटा, अब्दुल रज़ाक और शिराज (अब्दुल) जामेश की गोधरा ट्रेन कांड (साबरमती एक्सप्रेस जलाने की घटना, 27 फरवरी 2002) में कथित संलिप्तता का विवरण प्रस्तुत है, जैसा कि खोजी रिपोर्टों और अदालती निर्णयों में सामने आया।
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🧾 संलिप्तता का विवरण

१. मोहम्मद हुसैन कलोटा

गोधरा नगर पालिका के अध्यक्ष एवं कांग्रेस अल्पसंख्यक संयोजक होने के नाते, कलोटा को घटना के कुछ दिनों बाद मार्च 2002 में गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप था कि उन्होंने स्थानिय मुस्लिम समुदाय को भड़काने और भीड़ को प्रशिक्षित करने में भूमिका निभाई ।

पुलिस ने उनके खिलाफ POTA (Prevention of Terrorism Act) के तहत मामला दर्ज किया, जिसमें उन्हें “मुख्य नियोजक” के रूप में देखा गया था ।

2011 में विशेष अदालत ने उन्हें बरी कर दिया, और उन्होंने करीब नौ वर्ष जेल में बिताए थे ।

२. अब्दुल रज़ाक (Abdul Razak Kurkur)

कॉर्पोरेटर और कांग्रेस समर्थक सक्रिय सदस्य थे, जिन्हें भी मार्च 2002 में गिरफ्तार कर लिया गया था ।

नानावटी–मेहत आयोग और एसआईटी की जाँच में आरोप लगाया गया कि रज़ाक की संपत्ति पर आधारित ‘Aman Guesthouse’ में आग लगाने की साजिश की योजना बनाई गई थी और पेट्रोल स्टोर किया गया था — अदालत द्वारा इस आधार पर दोषी ठहराया गया कुछ अन्य मुख्य आरोपियों में उनकी भूमिका बताई गई ।

हालांकि, रज़ाक के व्यक्तिगत दोषसिद्धि या बरी होने का विवरण अलग से स्पष्ट नहीं मिला है, लेकिन उन्हें आरोपियों के समूह में शामिल किया गया था।

३. शिराज (अब्दुल) जामेश

गोधरा नगर पालिका के एक अन्य पार्षद थे, जिन पर भी मार्च 2002 में गिरफ्तार होने तक आरोप लगाए गए थे ।

हालांकि मीडिया रिपोर्टों में उनका नाम आरोपियों की सूची में शामिल है, किन्तु उनके खिलाफ आधिकारिक मुकदमे या अदालत द्वारा विशेष उल्लेख नहीं मिला है — संभवतः अन्य के समान केस में शामिल थे।
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⚖️ मुकदमे की स्थिति व अदालत का रुख

प्रथम दृष्टया आरोपित कुल 94 लोगों में से 31 को दोषी ठहराया गया, जबकि 63 को बरी कर दिया गया। इसमें कलोटा, उमरजी (प्रमुख मदरसा नेता) सहित कई प्रभावशाली मुस्लिम नेता शामिल थे, जिन्हें अदालत ने दोषसिद्धि में कमी और प्रमाणों की सत्यता पर संदेह के कारण बरी किया ।

अदालत ने पाया कि पुलिस की प्रारंभिक जांच में विरोधाभासी बयान, गवाहों की विश्वसनीयता में कमी, और POTA हटाए जाने पर दायर आरोपों में कमी जैसे कारणों से बरी की गई संख्या अधिक बनी ।
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📌 सारांश तालिका

व्यक्ति भूमिका गिरफ्तारी आरोप/समर्थन अदालत का निर्णय

मोहम्मद हुसैन कलोटा पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष, कांग्रेस अल्पसंख्यक संयोजक मार्च 2002 Mob instigator, POTA के तहत आरोप, भीड़ को उकसाने में शामिल 2011 में बरी, 9 वर्ष जेल में बिताए
अब्दुल रज़ाक नगरपालिका पार्षद, कांग्रेस समर्थक मार्च 2002 साजिश की योजना (Aman Guesthouse), पेट्रोल स्टोरिंग, समझे गए समूह के साथ जुड़ाव आरोपित समूह में शामिल, व्यक्तिगत सजा अस्पष्ट
शिराज (अब्दुल जामेश) नगरपालिका पार्षद मार्च 2002 आरोपित सूची में शामिल मुकदमे में विवरण अस्पष्ट, संभवतः बरी हुए समूह में
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🔍 निष्कर्ष

कलोटा, अब्दुल रज़ाक और शिराज जामेश सभी स्थानीय मुस्लिम नेतृत्व और कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और मार्च 2002 में गिरफ्तार किया गया।

मुकदमे में कलोटा को प्रमुख साजिशकर्ता मानते हुए POTA के तहत चार्ज किया गया, लेकिन अंततः उन्हें बरी कर दिया गया।

रज़ाक और जामेश को भी समान आरोपों में नामजद किया गया, लेकिन अदालत द्वारा उनके व्यक्तिगत दोषसिद्धि विवरण बारीकी से सामने नहीं आए।

कुल मिलाकर, भारतीय न्यायिक प्रक्रिया में अभियोजन ने पर्याप्त साक्ष्य पेश न कर पाने के कारण इन आरोपितों को बरी कर दिया, जिससे अधिक गंभीर दोषसिद्धि संभव नहीं हो सकी।
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