पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बोलती बंद क्यों, कांग्रेस का कालिखपुता चेहरा बेनक़ाब - अरविन्द सिसोदिया

हाईकोर्ट नें बहुत अच्छे से विश्लेषण के एस आई भर्ती रद्द कर दी है, मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा तो और भी फजीहत होगी। किन्तु दो प्रश्न एक दूसरे के सामने खडे हैँ। पगला वे जो परीक्षा में सफल नहीं होनें से बाहर हो गये, उनका, जो चार लाख से भी ज्यादा हैँ। उन्हें यह लगता है कि पेपरलीक नहीं होती तो वे भी सफल हो सकते थे। यह बड़ा प्रश्न है। दूसरा प्रश्न उनका है जो सभी परीक्षाओं को पार करते हुये एस आई बन गये और उनके विरुद्ध कुछ भी गलत साबित नहीं हुआ, इस तरह की संख्या 750 के लगभग है। ये निर्दोष हों तो भी कमजोर पक्ष है। क्योंकि जरूरी नहीं कि सभी गलत पकड़ में आही जाएँ। खैर सरकार के सामने लाखों लोगों का दबाब ही बड़ा दबाब है।

इस निर्णय में वे साक्ष्य ही सामने हैँ जो उपलब्ध हो सकते थे, किन्तु बिना साक्ष्य छोड़े ही बड़े लोग इसमें सम्मिलित हैँ, इन तक़ कैसे पहुंचें? सबसे खतरनाक पहलू यह भी है कि राजनैतों के साथ साथ नौकरशाही बराबरी से सम्मिलित है। उसका दबाब भी है। सरकार को दबाब की किसी भी कोशिश को पूरी तरह विफल करना चाहिए और अब जो भी परीक्षाएं हों पूरी तरह लीकेज के बिना हों इस तरह की व्यवस्था करनी होगी।

राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने एस.आई. भर्ती 2021 रद्द करते हुए अपने निर्णय में कुछ बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ कीं, जिनसे सिस्टम की गहरी खामियाँ और भ्रष्टाचार की जड़ें उजागर हुईं।

✦ जज समीर जैन की प्रमुख टिप्पणियाँ व संदेश

1. भ्रष्टाचार की व्यापकता पर टिप्पणी

अदालत ने कहा कि यह मामला “केवल पेपरलीक” का नहीं बल्कि “व्यापक और संगठित अपराध” का है।

भ्रष्टाचार की गहराई इतनी है कि पूरी प्रक्रिया को जारी रखना न्याय और संविधान दोनों के खिलाफ होगा।

2. RPSC की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह

जज ने स्पष्ट कहा कि राजस्थान लोक सेवा आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के भीतर से ही पेपर बाहर आना “घोर विश्वासघात” है।

आयोग का दायित्व युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना था, लेकिन उसने खुद अपनी विश्वसनीयता को दांव पर लगा दिया।

3. चयन प्रक्रिया की नैतिक विफलता

जज ने कहा कि परीक्षा में उत्तीर्ण हुए कई अभ्यर्थी ग़ैरक़ानूनी साधनों से सफल हुए।

जब टॉप मेरिट लिस्ट में ही आरोपी और गिरफ्तार अभ्यर्थी पाए जाएँ, तो चयन प्रक्रिया को वैध नहीं ठहराया जा सकता।

4. युवाओं के अधिकार और न्याय

अदालत ने माना कि हजारों अभ्यर्थियों ने सालों मेहनत की, नौकरियाँ छोड़ीं, परिवारिक सपनों को कुर्बान किया।

ऐसे में भ्रष्ट चयन प्रक्रिया उनके “जीवन और मौलिक अधिकारों के साथ धोखा” है।

5. राजनीतिक–प्रशासनिक गठजोड़ की ओर इशारा

फैसले में उल्लेख हुआ कि पेपरलीक गिरोह का नेटवर्क इतना गहरा था कि इसमें न सिर्फ माफ़िया, बल्कि “प्रभावशाली पदों पर बैठे लोग” शामिल थे।

इससे साफ है कि अपराध सिर्फ बाहर नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर से ही संचालित था।

6. न्यायपालिका ही अंतिम आसरा

जज ने कहा कि जब सरकार और आयोग निष्पक्ष कार्रवाई करने में विफल रहें, तब अदालत का दायित्व है कि वह युवाओं को न्याय दिलाए।

“यह अदालत का कर्तव्य है कि वह जनहित की रक्षा करे और भ्रष्टाचार पर प्रहार करे।”
✦ सार्थक संकेत

* न्यायमूर्ति समीर जैन की टिप्पणियों से यह स्पष्ट हुआ कि —
* राजस्थान की भर्ती प्रणाली में संगठित भ्रष्टाचार है।
* संवैधानिक संस्थाएँ (RPSC) भी इसमें संलिप्त हैं।
* राजनीतिक संरक्षण के बिना इतना बड़ा नेटवर्क संभव नहीं।
* युवाओं की मेहनत और भविष्य सबसे बड़े शिकार हैं।
* लोकतंत्र में न्यायपालिका ही अंतिम सुरक्षा कवच है।


✦ समाचार-विशेष: एस.आई. भर्ती 2021 — जब अदालत ने खोला भ्रष्टाचार का ताला

✦ प्रस्तावना

“ हाईकोर्ट ने गहलोत सरकार सहित सरकारी सिस्टम की पोल खोली ”
28 अगस्त 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला सिर्फ एक भर्ती रद्द करने का निर्णय नहीं था, बल्कि यह पूरे सिस्टम की पोल खोलने वाला आईना बन गया। 39 दिनों की लंबी सुनवाई के बाद न्यायालय ने 2021 की एस.आई. भर्ती परीक्षा को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया। इस फैसले ने अफसरशाही की साख और राजनीतिक व्यवस्था—दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया।

✦ कोर्ट का निर्णय: भर्ती रद्द, नई परीक्षा के आदेश

भर्ती परीक्षा 2021 को तत्काल रद्द किया गया।

नई परीक्षा उसी विज्ञप्ति के अनुसार कराई जाएगी।

सभी अभ्यर्थियों की आयु व योग्यता सुरक्षित मानी जाएगी।

जिन्होंने नौकरी छोड़कर परीक्षा दी थी, उन्हें पुनर्बहाली का हक़ दिया जाएगा।

कोर्ट ने टिप्पणी की: “यह भर्ती प्रक्रिया भ्रष्टाचार की जड़ों में सड़ी हुई है, इसे जारी रखना न्याय के साथ विश्वासघात होगा।”

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✦ पेपरलीक माफ़िया और RPSC की संलिप्तता

हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में साफ कहा कि यह मामला सिर्फ पेपर लीक नहीं बल्कि सुनियोजित अपराध था।

तत्कालीन RPSC अध्यक्ष संजय श्रोत्रिय और सदस्य बाबूलाल कटारा, रामूराम रायका पर गंभीर आरोप।

टॉप-20 अभ्यर्थियों में से 10 गिरफ्तार होना भ्रष्टाचार की गहराई को साबित करता है।

SIT और SOG की जांच में बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ।

न्यायालय ने कहा कि RPSC जैसी संवैधानिक संस्था का भ्रष्टाचार में फँसना लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

✦ युवाओं की पीड़ा: मेहनत पर लगा पानी

859 पदों पर भर्ती प्रक्रिया हुई, 824 अभ्यर्थी प्रशिक्षण तक पहुँचे—अब सब निरस्त।

अब 2025 तक पद बढ़ाकर 1015 कर दिए गए हैं।

कई अभ्यर्थियों ने पुरानी नौकरियाँ छोड़ीं, कोर्ट ने उनकी पुनर्बहाली का आदेश दिया।

छात्रों का कहना है: “हमने दिन-रात मेहनत की, लाखों रुपये खर्च किए, पर सिस्टम ने हमें धोखा दिया।”

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✦ राजनीति का संग्राम

फैसले के बाद सियासत गरमा गई—

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा: “हमारी सरकार की कार्रवाई से पेपरलीक का जाल खुला। कांग्रेस ने युवाओं के साथ विश्वासघात किया। अब बड़े मगरमच्छ भी पकड़े जाएंगे।”

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत: “बड़ी मछलियों के नाम आना बाकी है। यह तो सिर्फ शुरुआत है।”

किरोड़ी लाल मीणा: “यह युवाओं की जीत है, अदालत ने सच को सामने लाया।”

कांग्रेस की प्रतिक्रिया: भाजपा सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया गया।
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✦ राजनीतिक संरक्षण और गठजोड़ की परतें

कटिंग्स में सामने आए कई खुलासे यह दर्शाते हैं कि—

RPSC सदस्यों की नियुक्ति में राजनीतिक दबाव था।

कई नेताओं के पीएसओ (सुरक्षा अधिकारी) तक पेपरलीक नेटवर्क से जुड़े मिले।

भ्रष्टाचारियों को बचाने और मामले को दबाने के प्रयास 2023 तक जारी रहे।

असली सवाल यह है: क्या भर्ती घोटाला सिर्फ अफसरों तक सीमित है, या नेताओं की मिलीभगत भी है?
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✦ व्यापक असर: सिर्फ एक भर्ती नहीं, पूरी व्यवस्था सवालों में

यह प्रकरण केवल 2021 की एस.आई. भर्ती तक सीमित नहीं है।

2013 से लेकर अब तक RPSC की कई परीक्षाएँ विवादों में रहीं।

एक-एक कर पेपरलीक की घटनाओं ने पूरे आयोग की विश्वसनीयता ध्वस्त कर दी है।

युवा पीढ़ी का भरोसा सरकारी नौकरियों से उठने लगा है।

✦ भविष्य की चुनौतियाँ

1. नई परीक्षा की पारदर्शिता: क्या यह सुनिश्चित होगा कि अगली भर्ती सचमुच निष्पक्ष हो?

2. दोषियों को सज़ा: बड़े नामों तक कार्रवाई पहुँचेगी या फिर सिर्फ छोटे खिलाड़ियों को पकड़कर मामला शांत कर दिया जाएगा?

3. संस्थागत सुधार: RPSC और भर्ती प्रणाली को कैसे पारदर्शी व भ्रष्टाचार-मुक्त बनाया जाएगा?

✦ निष्कर्ष: न्याय की जीत, पर सवाल कायम

राजस्थान हाईकोर्ट का यह फैसला इतिहास में दर्ज होगा। इसने यह साबित किया कि न्यायपालिका ही वह स्तंभ है जो युवाओं की उम्मीदों और लोकतंत्र की आत्मा की रक्षा कर सकती है।

लेकिन अभी लड़ाई अधूरी है—
👉 जब तक दोषियों को सज़ा नहीं मिलती,
👉 जब तक राजनीतिक संरक्षण का पर्दाफाश नहीं होता,
👉 और जब तक भर्ती संस्थाओं को पारदर्शिता का नया ढांचा नहीं मिलता,
तब तक यह फैसला केवल न्याय की एक किरण रहेगा, पूर्ण समाधान नहीं।

✦ अंतिम पंक्ति

“भ्रष्टाचार ने युवाओं का विश्वास तोड़ा, अदालत ने उम्मीद जगाई—अब देखना है कि राजनीति इस उम्मीद को जिंदा रख पाती है या नहीं।”
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नीचे राजस्थान एस.आई. भर्ती 2021 की परीक्षा से संबंधित चरण-दर-चरण संख्यात्मक विवरण प्रस्तुत हैं, उपलब्ध विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर है। किन्तु इनके पूर्ण सत्य होनें की घोषणा नहीं की जा सकती, क्योंकि यह AI सहित विविध मिश्रित जानकारी आधारित है।

चरण-दर-चरण संख्यात्मक विवरण

1. पंजीकरण / आवेदनकर्ता संख्या

कुल 7.97 लाख (लगभग 797,000) अभ्यर्थियों ने राजस्थान एस.आई. भर्ती परीक्षा 2021 के लिए आवेदन किया।

2. प्रवेश / उपस्थित अभ्यर्थी (Appeared)

इनमें से लगभग 3.80 लाख (लगभग 380,000) ही परीक्षा में उपस्थित हुए।

3. उद्देश्य / विज्ञापन के तहत कुल पद

इस भर्ती अभियान में कुल 859 पदों लिए गए थे—जिनकी भर्ती प्रक्रिया अंततः रद्द कर दी गई।

4. चयनित अभ्यर्थियों (Qualified / Trainee हुए)

824 अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा पास करके प्रशिक्षण (training) के लिए भेजा गया था।

5. पत्रीकरण दोषी / घोटाले में संलिप्त

68 अभ्यर्थी सीधे गड़बड़ी से जुड़े पाए गए, जिनमें शामिल हैं:

54 trainee SIs,

6 चयनित (selected) उम्मीदवार,

और 8 फरार (absconding) आरोपी।

6. जांच व गिरफ्तारी

SOG तथा अन्य एजेंसियों ने करीब 122 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें trainee SIs, RPSC अधिकारियों, पेपर माफिया जैसे शामिल थे।
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सारांश तालिका

चरण संख्या / विवरण

आवेदनकर्ता (Applied) लगभग 7.97 लाख
उपस्थित (Appeared) लगभग 3.80 लाख
विज्ञापनित पद (Posts) 859 पद
चुने गए (Qualified / Trainee) 824 अभ्यर्थी
दोषी संलिप्त (Implicated) 68 (54-trainee SIs, 6-selected, 8-absconding)
गिरफ्तारी (Arrests) लगभग 122 आरोपी
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इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि—

लाखों अभ्यर्थियों ने कठिन प्रतिस्पर्धा के बीच परीक्षा दी,

लिखित में सफल हुए सैकड़ों अभ्यर्थी प्रशिक्षण तक पहुँचे,

और फिर कुछ ही समय बाद, पूरी प्रक्रिया भ्रष्टाचार की भारी छाया में रद्द कर दी गई।

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