गुड़ी पड़वा : हिन्दू नववर्ष : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा festivals gudi-padwa
विक्रम संवत 2080 से (22 मार्च 2023 से) कलियुग संवत् 5124 कल्पारंभ संवत् 1972949124 सृष्टि ग्रहारंभ संवत् 1अरब 95करोड 58 लाख 85 हजार 124वां वर्ष नव संवत्सर में नवजीवन का संदेश : गुड़ी पड़वा विशेष चैत्रे मासि जगत् ब्रह्म ससर्ज प्रथमे हनि शुक्ल पक्षे समग्रे तु तदा सूर्योदये सति॥ कहा जाता है कि ब्रह्मा ने सूर्योदय होने पर सबसे पहले चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टि की संरचना शुरू की। उन्होंने इसे प्रतिपदा तिथि को प्रवरा अथवा सर्वोत्तम तिथि कहा था। इसलिए इसको सृष्टि का प्रथम दिवस भी कहते हैं। इस दिन से संवत्सर का पूजन, नवरात्र घटस्थापन, ध्वजारोपण, वर्षेश का फल पाठ आदि विधि-विधान किए जाते हैं। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा वसन्त ऋतु में आती है। इस ऋतु में सम्पूर्ण सृष्टि में सुन्दर छटा बिखर जाती है। विक्रम संवत के महीनों के नाम आकाशीय नक्षत्रों के उदय और अस्त होने के आधार पर रखे गए हैं। सूर्य, चन्द्रमा की गति के अनुसार ही तिथियाँ भी उदय होती हैं। मान्यता है कि इस दिन दुर्गा जी के आदेश पर श्री ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इस दिन दुर्गा जी के मंगलसूचक घट की स्थापना की जाती...