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कविता: धैर्य बनाए रखना,इसमें बड़ी ताकत है

कविता: धैर्य बनाए रखना,इसमें बड़ी ताकत है धैर्य बनाए रखना, इसमें बड़ी ताकत है, शालीनता बनाए रखना, इसमें बड़ी ताकत है। सागर की तरह शांत रहना, इसमें बड़ी ताकत है, हवा की तरह निर्मल रहना, इसमें बड़ी ताकत है। हर क्षण स्वयं से संवाद करना, इसमें बड़ी ताकत है। === 1 === जब जीवन की आँधियाँ सब कुछ तोड़ने आएँ, जब अपने ही प्रश्न बनकर रास्ते रोकने आएँ, तब टूटकर भी न बिखरना, अंधकार में भी दिशा खोजना, एक क्षण ठहर जाना, खूब सोचना, समझना, मौन में छिपे उत्तर सुन लेना— इसमें बड़ी ताकत है। === 2 === अपमान को अनुभव बना लेना, हार को सीख समझकर आगे बढ़ जाना, गिरकर फिर उठने का साहस जुटाना, हर परिस्थिति में उम्मीद को थामे रखना— इसमें अपार ताकत है। === 3 === भीड़ में भी स्वयं से जुड़े रहना, खुद से, खुद की बात करना, अकेलापन कमजोरी नहीं, खुद से मिलने का अवसर मानना। आत्मचिंतन से भीतर विश्वास का दीप जलाए रखना, यही आत्मबल, परम शक्ति का विस्फोट करता, जीवन को सच्ची ताकत से भरता— इसी ताकत को बनाए रखना। === 4 === सागर सब कुछ सहकर भी अपनी गहराई नहीं खोता, गहराई बड़ी सयानी है, उथले को कर देती पानी-पानी। हवा सबको छूकर भी क...

भजनलाल शर्मा सरकार सुशासन का मॉडल बनी, राजस्व घाटे में कमी और भ्रष्टाचार पर सख़्त नियंत्रण - अरविंद सिसोदिया

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भजनलाल शर्मा सरकार सुशासन का मॉडल बनी, राजस्व घाटे में कमी और भ्रष्टाचार पर सख़्त नियंत्रण - अरविंद सिसोदिया कोटा, 31 जनवरी। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविंद सिसोदिया ने कहा है कि " मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने वित्तीय अनुशासन और पारदर्शी प्रशासन के ज़रिये सुशासन का प्रभावी मॉडल स्थापित किया है। सरकार के प्रयासों से राज्य के राजस्व घाटे में उल्लेखनीय कमी आई है, जिसकी सराहना भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में भी की गई है। " सिसोदिया ने बताया कि " वर्ष 2023-24 में प्रदेश का राजस्व घाटा रूपये 38,954 करोड़ था, जिसे 2024-25 के संशोधित अनुमानों में घटाकर रूपये 31,939 करोड़ कर दिया गया है। बजट 2025-26 में सरकार ने राजस्व घाटे को जीएसडीपी के मात्र 1.6 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया है, जो राज्य की बेहतर वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।" उन्होंने कहा कि "राज्य के स्वयं के कर राजस्व में भी लगातार वृद्धि हो रही है। सरकार ने लीकेज रोकी हैं और व्यय को नियंत्रित किया है, जिससे विकास कार्यों क...

कविता - शून्य से मत डरो,यह अस्तित्व की पहचान है।

कविता - शून्य से मत डरो शून्य से मत डरो, यह अस्तित्व की पहचान है। पुरुषार्थ के लिए प्रेरणा , सफलता के लिए संघर्ष का नाम है। ===1=== यहीं से उठती है कोशिशों की पहली आहट, यहीं जन्म लेता है खुद को साबित करने का साहस। अंधेरों को चीरती हुई विकास की यह किरण भरती उड़ान है  ===2=== जो शून्य में खड़ा रह सका, वही ऊँचाइयों का अर्थ जानता है। जो हार से आँख मिला सका, वही जीत की भाषा पहचानता है। याद रखो हर सफर शून्य से प्रारंभ होकर, एक एक नया कीर्तिमान रचता है। ===3=== शून्य से मत डरो, यह गिरने का नहीं, उठने का नाम है। शून्य से मत डरो, यह अंत नहीं, अस्तित्व की अनुसंधान है। === समाप्त===  

हिंदू बांटो राज करो, यह सदियों की परिपाटी है

कविता - हिंदू बांटो राज करो, यह सदियों की परिपाटी है  हिंदू बांटो राज करो यही तो सदियों से होता आया, अब तो संभलो हिंदूँ वर्ना पूरी तरह दफन हो जाओगे। इतिहास कोई कथा नहीं, यह खुली हुई चेतावनी है, जो कल हुआ, वही क्या फिर दोहराओगे। === 1 === ताज नहीं टूटा पहले, पहले टूटी थी एकता, जब भीतर आग लगी, तब  जीती बाहरी सत्ता। तक्षशिला से तराइन तक, एक ही दोष दिखा, शत्रु सामने खड़ा रहा, भाई भाई से ही लड़ा। === 2 === तलवारें कम नहीं थीं, साहस भी था अपार, पर अहंकार की दीवारों ने खोल दिया हर द्वार। कोई धर्म बचाने नहीं आया था बाहर से, कोई न्याय दिलाने नहीं उतरा था सागर पार से। हमने ही बुलाया था, स्वार्थ के निमंत्रण पर, और फिर रोते रहे बेड़ियों के बंदीपन पर। === 3 === अंग्रेज़ आया चाल लेकर, काग़ज़ और कानून, पहले बाँटा सोच को, फिर लूटा आत्मसम्मान और जूनून। जाति में बाँटो, भाषा में बाँटो, इतिहास बदल दो, लड़ते रहो आपस में—राज हमें करने दो! आज भी वही पटकथा है, बस चेहरे बदल गए, लड़ाने वाले मुस्कुराते हैं, हम फिर बहक गए। === 4 === जो सवाल सत्ता से होना था, वो पड़ोसी से कर रहे, और जो जोड़ने की बात थी, उसे...

कविता - वीर शिरोमणि राणा सांगा

कविता - वीर शिरोमणि राणा सांगा तन पर अस्सी घाव सजे थे, पर मन में डर का नाम न था, कट गया हाथ, गईं एक आँखें, फिर भी रण से विराम न था। लहू बहा पर तेज न टूटा, सिंह गर्जना गरजती थी, राणा सांगा के नाम मात्र से, शत्रु की काया कंपती थी। जहाँ-जहाँ तलवार उठी, स्वाभिमान का दीप जला, तोपों से नहीं, साहस से युद्धों का मोल बढ़ा। अपने ही लहू से उसने मातृभूमि को तौल दिया, वीरता ही उसकी रणभूमि थी, राष्ट्रधर्म ही उसकी बलिवेदी थी । खानवा की धरा साक्षी है, लहू से लिखे इतिहास की, एकाकी सिंह डटा रहा, आँधी आई विश्वासघात की। देह भले ही टूट गई, पर वचन नहीं टूटा आन का, राणा सांगा नाम नहीं था, वह प्रतीक था स्वाभिमान का। राष्ट्रधर्म मेवाड़ की आन था, सूर्यवंशी तेज की शान था, राजपूताना  स्वाभिमान था, हर रण जिसका इम्तिहान था। मर कर भी जो अमर हुआ, वह सच्चा सपूत महान था , राष्ट्रधर्म के पथ पर चलकर, इतिहास में वह देदीपयमान था. आओ शीश झुकाएँ आज, उस रणबांकुरे के चरणों में, प्रेरणापाएं मातृभूमि के लिए मर मिटने की, वही ज्वाला फिर जीवित हो, हर युवा के मन मस्तिष्क में। शौर्य को हो जागरण ,फिर उठे सिंह समान समाज, राणा सांगा...

मोदीजी के नेतृत्व में भारत आर्थिक मोर्चे पर मजबूत - अरविन्द सिसोदिया

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अमरीकी टैरिफ युद्ध से उत्पन्न वैश्विक अस्थिरता के बीच मोदीजी के नेतृत्व में भारत मजबूती से खड़ा है — अरविन्द सिसोदिया मोदीजी के नेतृत्व में भारत आर्थिक मोर्चे पर मजबूत - अरविन्द सिसोदिया  कोटा 30 जनवरी। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने भारत सरकार की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा बजट-पूर्व प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि " गत वर्ष से पूरी दुनिया एक प्रकार के अपरोक्ष आर्थिक विश्वयुद्ध से ग्रस्त है। आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था टैरिफ युद्ध, आर्थिक राष्ट्रवाद और भू - राजनीतिक तनाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूती, स्थिरता और आत्मविश्वास के रूप में देशवासियों के साहस को दृढ़ करता है।" सिसोदिया नें कहा कि " पूरी दुनिया अस्थिरता और अंध चुनौतीयों के दौर में है, ऐसे में प्रधानमंत्री मोदीजी का कुशल नेतृत्व, संयम, समन्वय और बदलते तौर तरीकों के बीच कुटनीतिक कुशलता, भारत को एक आर्थिक ताकत के रूप में ...

कविता - देश का मस्तिष्क है संसद,हुडदंग का दंगल मत बनाओ

कविता - देश का मस्तिष्क है संसद,हुडदंग का दंगल मत बनाओ देश का मस्तिष्क है संसद,हुडदंग का दंगल मत बनाओ, गरिमा बाँटो, गरिमा अपनाओ और गरिमा बढ़ाओ  ! शांतचित्त और सत्यनिष्ठ इसे बना कर,देश की क्षमता बढ़ाओ। विश्व के आँगन में समन्वय की अनुकरणीयता बनाओ । ===1=== यहाँ शब्द हों सेतु, शस्त्र नहीं,  तर्क हो दीप, अंधड़ नहीं, विचार टकराएँ, मर्यादा न टूटे, लोकतंत्र कहीं शर्मसार न हो जाए। जन-आकांक्षाओं की यह चौपाल है, हर आवाज़ का हक सवाल है, हर सवाल का जबाब जायज अधिकार है, किन्तु, निज स्वार्थ छोड़, राष्ट्र को देखा जाये। ===2=== शोर नहीं, समाधान गूंजे,कटुता नहीं, संवाद सहेजें, राजनीती नीति हो, आपस में न कुनीति हो, राष्ट्र एक परिवार है, इसमें सिर फुटब्बल नहीं, आपस में एक बनों, मधुर रिश्ते रखो, संसद एक परिवार है, कोई घात प्रतिघात नहीं, देश का वर्तमान रचें और भविष्य गढ़े। यही जनसेवा का असली कमाल है। राष्ट्र चिंतन की मिशाल बनें। === समाप्त ===

UGC के पीछे कौन...

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सबसे बड़ा खेल हो गया इसके साथ ये है इंदिरा जय सिंह ये गई सुप्रीम कोर्ट और पहले से एक तरफा यूजीसी गाइड्लाइन को और सख्त बनवाने के मकसद से वैसे इसके एक एनजीओ को सरकार पहले ही FCRA licence रद्द कर चुकी है विदेशी सीक्रिट एजेंसी से जुड़े संस्थानों से फन्डिंग लेने और उसका सही हिसाब जमा ना करने के लिए  अब इस मामले मे इसने रोहित वेमुला की मा और एक मुस्लिम महिला जिसके लड़के ने आत्महत्या की है उसको दोनों को याचिककर्ता बना के याचिका डाली की यूजीसी की गाइड्लाइन दुबारा बनाई जाए इसका तर्क था की उत्पीड़न के मामले 5 साल मे 182% बढ़ गए है और 125 के करीब से 5 साल मे 374 के करीब हो गए है यहा खेल खतरनाक था इसका इसकी मंशा थी एससी एसटी के साथ अल्पसंख्यक के नाम पे मुसलमानों को भी खास संरक्षण दे दिया जाए इस लिए एक मुस्लिम महिला की याचिका साथ लगाई....। अब सामान्य प्रोसेस मे कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया और सुनवाई हुई तो कोर्ट ने यूजीसी को निर्देश दिए की गाइड्लाइन को सुधार करे....। अब यहा खेल ये था की एक तरफ ये पक्ष था दूसरी तरफ सरकार थी तीसरा पक्ष यानि जनरल समाज की तरफ से कोई नहीं आया तो उनकी बात...

कविता - कुर्सी पाने की खातिर देश बंट गया

कविता - कुर्सी पाने की खातिर देश बंट गया  आजादी के कतरे-कतरे पर लिखा है बलिदान, क्यों अब भी भरमाते हो लेकर अहिंसा का नाम। इक तरफ़ा हिन्दुओं का हुआ था कत्लेआम, लाखों लोगों को नसीब नहीं हुआ था शमशान। सारे महानायक तब मौन थे, ज़ख्मी था हिंदू और हिंदुस्तान थे। ===1=== कुर्सियों की भूख में , इंसान नहीं दिखे, महलों के सौदे हुए, गाँव-शहर खूब जले । नक्से पर एक लकीर से,ख़ून की नदियाँ बहाईं, सत्ता पाने की ख़ातिर असंख्य अनंत जानें गँवाईं। ===2=== वोट दिया बँटवारे को, पर गये नहीं देश बंटवा कर देश ! यह अधम पाप पाखंड तुम्हारे ही सर पर, हिंसा बेपरवाह हुई , पर कोई प्रतिकार नही,  ना लाशों की गिनती हुई, जो कट गया निर्दोष, उसकी कीमत का किसी को होश नहीं । ===3=== ट्रेनें लाशों से भरीं, फिर भी रूह नहीं काँपी, माताओं की चीख़ों पर भी अंतरात्मा नहीं जागी। जो बचा वो शरणार्थी, जो मरा वो मात्र आँकड़ा था , और जो ज़िम्मेदार थे, वो कहलाए देश के अधिपती। ===4=== अहिंसा का पाठ पढ़ाकर, भारत को संघर्ष विहीन किया , दया और करुणा के भारत को लहूलुहान किया । ये बँटवारा नहीं था, ये सत्ता के लिए हुआ नरसंहार था, कुर्सी ...

अशांत क्षेत्र अधिनियम भजनलाल शर्मा सरकार का स्वागतयोग्य, बहुआयामी एवं दूरदर्शी कदम — अरविन्द सिसोदिया

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अशांत क्षेत्र अधिनियम भजनलाल शर्मा सरकार का स्वागतयोग्य, बहुआयामी एवं दूरदर्शी कदम — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 29 जनवरी। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं भाजपा मीडिया विभाग, कोटा संभाग संयोजक अरविन्द सिसोदिया ने राजस्थान के संवेदनशील मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा राजस्थान में अशांत क्षेत्र अधिनियम लागू करने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि " मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने राजस्थान में सामाजिक संतुलन, स्थायी सौहार्द एवं नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जो उनकी दूरदर्शिता और संवेदनशीलता को दर्शाता है।" सिसोदिया ने कहा कि "वर्तमान समय में यह अप्रत्यक्ष रूप से देखने में आ रहा है कि कुछ क्षेत्रों में भय, दबाव अथवा मजबूरी के कारण लोगों को अपनी संपत्ति कम कीमत पर बेचने और क्षेत्र छोड़ने के लिए विवश किया जाता है। अशांत क्षेत्र अधिनियम ऐसे ही मामलों में “डिस्ट्रेस सेल” एवं जबरन पलायन पर प्रभावी रोक लगाने का कार्य करेगा।" ...

UGC दिग्विजय सिंह

सवर्णों ने जिस भाजपाई को सत्ता पर बैठाया वो दिग्विजय सिंह जैसे congresi चमचा के झांसे में फंसकर धर्म द्रोह कर डाला है! किसी ने ठीक ही कहा कि congresi मुस्लिम लीग बन चुकी हैं और भाजपाई congresi  सवर्णों के विरुद्ध बनाए गए कानून यूजीसी में दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली कमेटी ने की थी UGC रूल्स की सिफारिश, जिसमें भाजपा के 16 सदस्य, congres के 4 सदस्य, समाजवादी पार्टी के 3, तृणमूल के 2, सीपीएम के 1, डीएमके के 1, एनसीपी (अजीत गुट) के 1, एनसीपी (शरद गुट) के 1 और आम आदमी पार्टी की 1 पूर्व सदस्य हैं।  यानी total 29 धर्मद्रोहियो ने पक्ष हो या विपक्षी ने मिलकर सवर्ण विरोधी यूजीसी कानून बनाए! भाजपाइयों के सदस्यों की संख्या अधिक है, क्या भांग खाकर गए हुए थे ये मंदबुद्धि महामूर्ख अधर्मी भाजपाई ...? जो पाक प्रस्त अधर्मी कुकर्मी दिग्विजय सिंह बोलेगा वही करोगे ...? फिर तुमको सत्ता पर बैठाने का क्या औचित्य रहा हमारे ...? नागिन डांस देखने के लिए भाजपाई को सत्ता पर नही बैठाया गया था कि जो दिग्विजय सिंह चाहेगा उस पर नाचने लगों ! और दूसरी बात भाजपाई के ज्यादातर धर्म द्रोही सवर्णों ने ही ...

यूपी में 2017 से पहले का वो दौर up yogi

गलती तो आप से हुई है योगी जी. 👉जिस उम्र में लोग सिनेमा और क्रिकेट के मजे ले रहे होते हैं,, उस उम्र में उसने सब त्याग कर सन्यास की राह पकड़ी👇 हमने तो 2017 से पहले का वो दौर भी देखा है, जब सड़कों पर दौड़ा दौड़ा कर विधायक मार दिए जाते थे (राजू पाल), मां और बेटी को हाइवे से खींच कर एक साथ बलात्कार कर दिया जाता था(बुलंद शहर), एक पत्रकार को इसलिए जिंदा जला दिया गयो क्योंकि उनसे तत्कालीन सरकार के एक मंत्री के खिलाफ सच बोलने का साहस किया (शाहजहांपुर),, दो दलित बेटियों का सामूहिक बलात्कार कर के लाशों को दहशत फैलाने के लिए पेड़ो पर टांग दिया जाता था(बदायूं),, एक ब्राह्मण की बहु बेटियों किस तरह से सड़कों पर घुमाया गया कि रूह कांप जाए (इटावा) एक पुलिस वाले का कालर पकड़ कर जबरन घसीट कर जेल में ठूंस दिया गया क्योंकि उसने सरकार के एक पालतू कुत्ते को AK 47 के साथ गिरफ्तार किया था (शैलेन्द्र सिंह), एक विधायक की दिन दहाड़े 400 गोली मार कर उसकी चोटी तक काट ली गई (कृष्णानंद राय) एक गरीब की खाल उधेड़ कर थाने के सामने फेंक दिया (अतीक अहमद), लगातार 5 दिनों तक हिंदुओं का नरसंहार करवाता रहा एक विधायक(मुख्तार...

कविता - अगर तुमने वीरों का बलिदान छिपाया तो

कविता - अगर तुमने वीरों का बलिदान छिपाया तो - अरविन्द सिसोदिया  अगर तुमने भारत का सच्चा इतिहास भुलाया तो, अगर तुमने वीरों का बलिदान छिपाया तो, कहां से लाओगे नेताजी सुभाष, कहां से लाओगे वीर सावरकर, कहां से लाओगे भगत सिंह – चंद्रशेखर, कहां से लाओगे भावी वीर बलिदानी। जिनकी ललकार से कांपी थीं सल्तनतें जिनके स्वप्नों से जागा था सारा हिंदुस्तान, जिनका जीवन ही रणघोष बना, युद्धभूमि सा सजा, जिनका हर श्वास था राष्ट्र-प्राण। शौर्य को प्रणाम। जिन्होंने फांसी को फूल समझा, फंदों को मातृभूमि के लिए चूमा। जिन्होंने कारागार को तीर्थ बनाया, जिन्होंने यातनाओं को प्रसाद माना  जिन्होंने भारत माता के चरणों में, हँसते-हँसते शीश चढ़ाये, आओ उनके गीत गायें। यह केवल अतीत नहीं, यह चेतावनी भी है, यह हुंकार है, यह आव्हान है, यह भविष्य का प्रकाश है, अपने पुरषार्थ का स्मरण रहे राष्ट्र को, वर्ना भविष्य भी लहूलुहान है। अरे मत भुलाओ वीरों को, नमन करो शहीदों को, उनके त्याग को, उनके बलिदानों को, राष्ट्र जीवन में उन्हें उतारो, सम्मानों से। बताओ नई पीढ़ी को, कि आज़ादी उत्सव नहीं, भविष्य का रक्षण है, यह हर युग में र...

कविता - जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ

कविता - जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ। - अरविन्द सिसोदिया  जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ। जागरूक रहते तो ना बंटता हिंदुस्तान, जागरूक रहते तो ना बनता पाकिस्तान, जागरूक होते तो अपना होता संविधान, जागरूक होते तो न होते तमाम व्यवधान, जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ। ===1=== दुश्मन आये बन आक्रमणकारी, आजादी में भी उन्होंने ही बाज़ी मारी, जान-बूझकर रखा हमें अपरोक्ष गुलाम, कुर्सी की खातिर गईं अखंडता, लालच में बेच दिया गया स्वाभिमान, सोता रहा जन जन, जागता रहा शैतान, जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ। ===2=== इतिहास बदला, सच को छुपाया, वीरों के बलिदान को झुठलाया, गुलामी की सोच को अमृत बताया, अपनों ने ही अपनों को भरमाया, धर्म, जाति में देश को बाँटा, सत्ता ने हर बार सच को काटा, जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ। ===3=== मंदिर टूटा, संस्कृति रोई, माँ भारती की आँखें धोईं, काग़ज़ों में न्याय सिमट गया, सच बोलने वाला ही मिट गया, शिक्षा से चेतना दूर की गई, पीढ़ी दर पीढ़ी भूल बोई गई, जागरूक बन जाओ भारत, जागरूक बन जाओ। ===4=== अब भी समय है आँख उठाने का, झूठे जाल से मन छुड़ाने का, न इतिहास से...

कविता - काश कोई, फिर से आदि शंकर बन जाता,

कविता - काश कोई, फिर से आदि शंकर बन जाता, काश कोई, फिर से आदि शंकर बन जाता, सत्य सनातन की ध्वजा को फिर लहराता। ज्ञान से विज्ञान, आध्यात्म से शास्त्रार्थ सिखलाता, हिंदू मानवता का मान फिर बढ़ाता, काश कोई फिर से आदि शंकर बन जाता। मिथ्या के अंधकार में विवेक का दीप जलाता, अद्वैत का अमृत जन-जन को पिलाता। जाति, पंथ, भेद की दीवारें गिराता, एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति समझाता, काश कोई फिर से आदि शंकर बन जाता। वेदों की वाणी को नव युग से मिलाता, उपनिषदों का सार सरल कर सुनाता। तर्क से भ्रम, श्रद्धा से अहं मिटाता, मनुष्य को स्वयं से साक्षात्कार कराता, काश कोई फिर से आदि शंकर बन जाता। जहाँ धर्म कर्मकांड में सिमट सा गया है, जहाँ अर्थ में ही जीवन उलझ सा गया है। वहाँ त्याग, तप और तत्वज्ञान सिखलाता, जीवन को ब्रह्म पथ की ओर मोड़ लाता, काश कोई फिर से आदि शंकर बन जाता। भारत की आत्मा को फिर से जगाता, विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम् सिखलाता। शब्द नहीं, आचरण से धर्म दिखलाता, मानव में नारायण का दर्शन कराता, काश कोई फिर से आदि शंकर बन जाता।

नितिनजी के नेतृत्व में नवीन क्षेत्रों में भाजपा नया परचम लहरायेगी — अरविन्द सिसोदिया

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नितिनजी के नेतृत्व में नवीन क्षेत्रों में भाजपा नया परचम लहरायेगी — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 20 जनवरी। भारतीय जनता पार्टी राजस्थान के मीडिया संपर्क विभाग के प्रदेश सह-संयोजक अरविन्द सिसोदिया ने भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के निर्विरोध निर्वाचन पर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने कहा कि " यह क्षण न केवल भाजपा संगठन के लिए, बल्कि देश की राजनीति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा, ऊर्जावान और दक्ष नेतृत्व को पार्टी की कमान सौंपना भाजपा की दूरदर्शिता और भविष्य की ठोस तैयारी को दर्शाता है।" अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि " नितिन नबीन के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी देश की राजनीति के नवीन क्षेत्रों में सशक्त प्रवेश करेगी। उनका नेतृत्व संगठन को नई सोच, नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करेगा। पार्टी वैचारिक स्पष्टता, अनुशासन और कार्यकर्ता-आधारित संरचना को और अधिक मजबूत करते हुए जनसेवा, सुशासन और राष्ट्रनिर्माण के अपने मूल संकल्पों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाएगी।" उन्होंने कहा कि " नव निर्वाचित राष्ट्रीय अ...

" हिंदू एकता ही हिंदू अस्तित्व की गारंटी है " - अरविन्द सिसोदिया

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" हिंदू एकता ही हिंदू अस्तित्व की गारंटी है " - अरविन्द सिसोदिया  “सर्वश्रेष्ठ सनातन को विभाजित करने का षड्यंत्र हो रहा है, हिंदू एकता को मजबूत बनाएं रखें " — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 23 जनवरी। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि “हिंदू एकता ही हिंदू अस्तित्व की गारंटी है।" उन्होंने कहा कि " जब से हिन्दुओं में एकता दृढ़ हो रही है, तभी से हिंदू विरोधी तुष्टिकरणवादी ताकतें, निरंतर कोई न कोई षड्यंत्र रचते रहते हैँ, इसलिए राष्ट्रहित में हिन्दुओं को निरंतर एक जुट रहना होगा। " सिसोदिया नें कहा कि " हाल ही में माघ मेला में अस्वीकृत एवं विवादस्पद कथित शंकराचार्य तथा उनकी आड़ लेकर तुष्टिकरणवादी राजनीतिक दलों द्वारा जिस प्रकार बग्गी पालकी हठधर्मिता की अव्यवस्था उत्पन्न की गईं, वह सोची समझी चाल है। उसकी ओट से उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार, विशेषकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कटघरे में खड़ा करने का कुप्रयास किया गया, वह एक सुनियोजित षड्यंत्र है, जिसका उद्देश्य आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुख...

कविता - मत भूलो, इतिहास यह गद्दारी भी लिखेगा

कविता - मत भूलो, इतिहास यह गद्दारी भी लिखेगा दुश्मन खड़ा हो दरवाज़े पर, उससे लड़ना सबका धर्म है, तुम कैसे विपक्ष हो, ऐसे में गृह-क्लेश करते हो। मत भूलो, इतिहास यह गद्दारी भी लिखेगा, हर शताब्दी में तुम्हें भी धिक्कार मिलेगा। ===1=== जब दुश्मन ललकारे बार बार , तब प्रश्नों की बौछार क्यों, राष्ट्र जलाने का उसका षड्यंत्र , सत्ता और विपक्ष का संघर्ष क्यों, यह समय नहीं काँओ काँओ का, न भाषणों की बाज़ी का, न बयानबाजी का, यह समय है मातृभूमि का चुकाने का, माँ भारती की रक्षा का, हुंकार उठाने का। ===2=== जो शत्रु को समर्थन देता है,  जो शत्रु को रेड कारपेट बिछाता हो, जो शत्रु की भाषा बोले,  याद रहे वह गद्दार ही कहलाता है। जो संशय का बीज उगाए, जो अपने ही शौर्य को झुठलाएं, वह भीतर बैठा विषधर है, जो पीठ में छुरा घोंप जाए। ना झंडा झुकता, ना शीश झुके, यह वीरों की परंपरा है, जो आज भी गणना में उलझे, उनका नाम कल की पराजय है। याद रखो — तटस्थता भी अपराध बनेगी, जब राष्ट्र युद्ध में खड़ा हो, तब चुप्पी भी गद्दारी गिनेगी। इतिहास किसी को नहीं छोड़ता, न तर्क, न चाल, न बहाना, या तो राष्ट्र के साथ खड़े हो, य...

कविता - जन-जन की पहरेदारी

मुखड़ा — जन-जन की पहरेदारी। - अरविन्द सिसोदिया  लूटतंत्र से बचना और बचाना, लोकतंत्र की जिम्मेदारी। कर्तव्यपरायण देश बनें, यही जन-जन की पहरेदारी। अंतरा 1 जब सत्ता सेवा से भटके, और लोभ बने हथियार। तब जागे जन-जन प्रहरी, ले सत्य को ढाल-संभार। न बिके मत, न झुके विचार, न हो मौन की लाचारी। लूटतंत्र से बचना और बचाना, लोकतंत्र की जिम्मेदारी। अंतरा 2 झूठ, भय और धन-बल से, मत का अपमान न हो। जनादेश की पवित्रता, किसी सौदे में न खो। प्रश्न पूछना पाप नहीं, यह नागरिक हक़दारी। लूटतंत्र से बचना और बचाना, लोकतंत्र की जिम्मेदारी। अंतरा 3 जाति, धर्म के नाम पे जब, बाँटी जाए पहचान। तब विवेक उठे, विवेचना करे, बचे राष्ट्र, बचे संविधान। समता, न्याय, स्वतंत्रता, ये मूल्य हमारी धरोहरी। कर्तव्यपरायण देश बनें, यही जन-जन की पहरेदारी। अंतरा 4 चुप्पी भी अपराध बने जब, अन्याय खुलेआम चले। तब लेखनी, वाणी, मतदान, तीनों शस्त्र बनकर जले। न्यायपालिका, जन और मीडिया, सबकी हो जवाबदेही भारी। लूटतंत्र से बचना और बचाना, लोकतंत्र की जिम्मेदारी। अंतरा 5 (आह्वान) आओ शपथ लें आज सभी, न बिकेंगे, न बिकवाएँगे। लोकतंत्र के दुर्गुणों से, ...

कविता — परिश्रम का कर लो तुम ध्यान

कविता — परिश्रम का कर लो तुम ध्यान - अरविन्द सिसोदिया  धर्म, नीति, ज्ञान और विज्ञान, सबमें ईश्वर का वैभव और विधान। पर विजय उसी की होती है, जो करता पुरुषार्थ का सम्मान। परिश्रम का कर लो तुम ध्यान, परिश्रम का कर लो तुम ध्यान। ==1== भाग्य स्वयं भी द्वार न खोले, जब तक श्रम का दीप न जले। सपने केवल सोच से नहीं, हाथों की मेहनत से ही फलते। गिरकर उठना, फिर चल देना, यही जीवन की पहचान। परिश्रम का कर लो तुम ध्यान, परिश्रम का कर लो तुम ध्यान। ==2== न भय पथ की कठिन डगर से, न थकना तूफानी राहों में। जो डटा रहे संकल्प लिए, वही चमके इतिहासों मेँ । श्रम से ही बनता स्वाभिमान, श्रम से ही मिलता सम्मान। परिश्रम का कर लो तुम ध्यान, परिश्रम का कर लो तुम ध्यान। ==3== राजा हो या जन साधारण, सफल वही जो कर्म करे। नियति भी उसका साथ निभाए, जो हर पल उद्यम धरें। कर्मठ मन, दृढ़ निश्चय जान, यही उन्नति की पहचान। परिश्रम का कर लो तुम ध्यान, परिश्रम का कर लो तुम ध्यान। ==4== ईश्वर भी उस हाथ में बसता, जिसमें श्रम की रेखा हो। आलस त्याग, उठ आगे बढ़, यही जीवन का लेखा है। कर्म ही पूजा, कर्म ही ज्ञान, कर्म में ही ईश्वर का स्थ...

कविता - भारत महान की जय हो

कविता - भारत महान की जय हो  - अरविन्द सिसोदिया  जिस धरा पर भगवान आए, उस हिंदुस्तान की जय हो। भाव, रत्न और तंत्र के, इस महान भारत की जय हो। विश्व में सबसे दयालु–कृपालु, सनातन के सम्मान की जय हो। हिंदुस्तान की जय हो, भारत महान की जय हो। जिस माटी में वेदों की वाणी, गूँजी ऋषियों की साधना हो। जहाँ कण-कण में मर्यादा के राम हों, जहां कृष्ण की प्रेम भावना आम हो। जहाँ बुद्ध ने करुणा सिखाई, महावीर ने संयम गाया हो। नानक, कबीर की वाणी ने, मानवता का दीप जलाया हो। त्याग, तपस्या, वीरों की, उस परंपरा की जय हो। राणा, शिवा, भगतों की, उस बलिदानी धरा की जय हो। नदियाँ बोले अमृत कथा, पर्वत बनें तपस्वी ध्यान। वन-उपवन, खेत-खलिहान में, श्रम का पवित्र गान। एकता में विविधता रखे, भाषा, वेश अनेक महान। फिर भी एक सूत्र में बंधा, मेरा भारत एक पहचान। ज्ञान, विज्ञान, कला, संस्कृति, सबका संगम यहाँ मिला हो। शून्य से ब्रह्मांड तक पहुँचे, ऐसा चिंतन यहाँ पला हो। विश्व पथ को दीप दिखाए, सत्य, अहिंसा की जय हो। वसुधैव कुटुम्बकम् कहने वाली, उस भावना की जय हो। जब तक सूरज चाँद चमकें, जब तक गूँजे गगन महान। हिंदुस्तान की जय...

कविता - गणतंत्र तभी सम्मान का अधिकारी

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कविता : गणतंत्र तभी सम्मान का अधिकारी — अरविन्द सिसोदिया गणतंत्र तभी सम्मान का अधिकारी हो, जब उसमें रामराज्य जैसी भागीदारी हो। केवल सत्ता का उत्सव नहीं, यह विश्वास की गादी, जन-जन की पीड़ा हरना सत्ता की जिम्मेदारी हो॥ === 1 === काग़ज़ में समानता, व्यवहार में अंतर बड़ा भारी, कहीं जाति, तो कहीं वर्गभेद, कहीं संप्रदाय की आरी। संस्कार-विहीन चेतना, भ्रष्टाचार में दम तोड़ती लाचारी, न्याय पूँजीवादी, कानूनी महँगाई की नियति अति न्यारी। सत्ता में कुछ अच्छे हैं, पर सब नहीं—तंत्र सब पर भारी, इसी से घिरा प्रश्नों का गणराज्य, लगता रोग और बीमारी। छल, कपट और झूठ मारते नित-नित बाज़ी, धर्म और पंथ तौले जाते मतों से, मानवता हर जगह हारी। === 2 === रामराज्य केवल अतीत की कथा नहीं था, वह लोकधर्म और नीति का पथ-प्रबंधन था। जहाँ राजा नहीं, सेवक होता था सिंहासन पर, अंतिम व्यक्ति भी पाता था सम्मान अपनेपन का। न भय था, न भेद था, न अन्याय का अंधकार, धर्म था कर्म में, सत्य था शासन का आधार। यदि वही चेतना लौटे आज के व्यवहार-विधान में, स्वर्णिम हो भारत फिर से, संविधान के आसन में। === 3 === आओ संस्कार को शस्त्र...

कविता - गणतंत्र को गुणतंत्र बनाओ

कविता - गणतंत्र को गुणतंत्र बनाओ  गणतंत्र को गुणतंत्र बनाओ, वर्ना लोकतंत्र बेकार हैँ। सुख, समृद्धि और न्याय हो घर-घर, वर्ना ये चुनाव धिक्कार हैँ। सत्ता सेवा बन जाए जन-जन की, न हो सिंहासन का व्यापार। जनता मालिक, नेता सेवक हों, तभी बचेगा लोकतंत्र का आधार। भूखे को रोटी, तन को कपड़ा, हर हाथ मिले सम्मान। शिक्षा, स्वास्थ्य सबके हिस्से हों, तभी सच्चा होगा संविधान। भ्रष्टाचार की जड़ें काटो, ईमान को दो खुला आसमान। थोथापन बंद हो ,  ज़मीन पर उतरे सच्चा काम। जब तक आँसू पोंछे न जाएँ, जब तक मिटे न डर-भय-भेद, केवल नारों, वादों से ही, न बदलेगा भारत का परिवेश । बहुत हुआ, बहुत गुजरा , आओ बदलें छल बल का खेल, सत्य सनातन पुण्य धरा को दें अब, नीति न्याय और परमार्थ का अभिषेक। समाप्त 

धूमावती माता

धूमावती माता (जिन्हें धूमावती भी कहा जाता है) दस महाविद्याओं में से सातवीं उग्र महाविद्या हैं। उनके संबंध में कुछ प्रमुख जानकारियां नीचे दी गई हैं: - उत्पत्ति की कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ धूमावती की उत्पत्ति से जुड़ी दो मुख्य कथाएं प्रचलित हैं:  शिव को निगलना: एक बार माता पार्वती को तीव्र भूख लगी। उन्होंने महादेव से भोजन मांगा, लेकिन महादेव के ध्यान में मग्न होने के कारण भोजन में देरी हुई। भूख से व्याकुल होकर माता ने स्वयं शिवजी को ही निगल लिया। चूँकि शिवजी के कंठ में विष था, इसलिए माता के शरीर से धुआं निकलने लगा और उनका स्वरूप विकृत हो गया। महादेव ने उनके भीतर से बाहर आने के बाद उन्हें शाप दिया कि वे अब से 'विधवा' रूप में जानी जाएंगी। सती का देह त्याग: जब देवी सती ने पिता दक्ष के यज्ञ कुंड में अपनी आहुति दी, तो उस अग्नि से उठे धुएं (धूम्र) से धूमावती प्रकट हुईं।  स्वरूप और प्रतीक दिखावट: वे एक वृद्ध, कुरूप और विधवा स्त्री के रूप में श्वेत वस्त्र धारण किए हुए हैं। वाहन और आयुध: वे एक ऐसे रथ पर सवार हैं जिस पर कोई घोड़ा नहीं है और उनके ध्वज पर कौआ विराजमान है। उनके हाथ मे...

कविता - हिंदू एकता

गीत : हिंदू एकता हिंदू एकता ही हिंदू अस्तित्व की पहचान है, युग-युग से यही शक्ति, यही हमारा मान है। आंधी आए, तूफ़ाँ आए, सच का दीप न डोले, एक रहें हम, जाग रहें हम, यही समय की मांग है। === 1 === षड्यंत्रों ने सिर उठाया, झूठ का व्यपार फैलाया । आस्था को बदनाम किया, छलिया वेश को हथियार बनाया, षड्यंन्त्रों की खोट रचते , सच को कठघरे खड़ा करते, किन्तु जब-जब हमने हाथ मिलाया, शक्ति ने आकार पाया। हिंदू एकता ही हिंदू अस्तित्व की पहचान है…..... ===2 === फूट डालो, राज करो, यह नीति  है पुरानी , कुप्रचार की भाषा वही, चाल बड़ी सयानी, भ्रम बोया, अविश्वास रचा, समाज को तोड़ने का खेल, पर सनातन की जड़ें गहरी, हर षड्यंत्र हुआ है फैल। हिंदू एकता ही हिंदू अस्तित्व की पहचान है… ===3=== सहिष्णुता, समरसता, सर्वजन हित का भाव, सनातन के इसी समन्वय से जीवित है विश्वास, जाति, वर्ग, संप्रदाय, क्षेत्र में बाँटने के हथकंडे, एकता की लौ के आगे सब पड़ जाते ठंडे। हिंदू एकता ही हिंदू अस्तित्व की पहचान है… === 4 === हमारा किसी से विरोध नहीं, हम सबके समन्वयकर्ता, पर विस्तार उनकी चाह में, वे षड्यंत्र रचते रहते है। धर्मांतरण, फं...

कविता - हार को भी सीख बनाए जा

कदम–कदम साहस बढ़ाए जा, हर बाधा से आँख मिलाए जा। तूफ़ानों से मत घबरा तू, अपने भीतर आग जगाए जा। विजयी मन बनाए जा, हार को भी सीख बनाए जा। ===1== जीत का जो जुनून जले, उसमें धैर्य भी मिलाए जा। रास्ते कठिन, अँधेर घने, पर सूर्य तुझमें ही बसता है। जो रुक गया, वो खो गया, जो चला, वही इतिहास रचता है। जीता तो यश तुझे गले लगाए, हारा तो भी तू अमर कहलाए। क्योंकि जिसने भरपूर जिया, वही हर दिल में याद रह जाए। मत पूछ मंज़िल कितनी दूर, बस आज से कल को बेहतर कर। हर दिन खुद से जीत हासिल कर, और खुद पर पूरा भरोसा कर। बढ़ता जा, बढ़ता जा, अपने स्वप्नों को सच बनाए जा। विजयी मन बनाए जा, विजयी मन बनाए जा।

भाजपा भारतीय संस्कृति के गरिमामय वैश्विक उत्थान हेतु कृतसंकल्पित, विपक्ष की अङ्गेबाज़ी रोक नहीं सकती — अरविन्द सिसोदिया Ram Janmbhumi

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भारत की गरिमा सनातन हिंदुत्व के अपनत्व, भाईचारे और बंधुत्व से - अरविन्द सिसोदिया  भाजपा भारतीय संस्कृति के गरिमामय वैश्विक उत्थान हेतु कृतसंकल्पित, विपक्ष की अङ्गेबाज़ी रोक नहीं सकती — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 21 जनवरी। भारतीय जनता पार्टी राजस्थान के मीडिया संपर्क विभाग के प्रदेश सह संयोजक अरविन्द सिसोदिया ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भव्य निर्माण की द्वितीय वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि “भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी के लिए राष्ट्रप्रथम की भावना के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ी सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण, संवर्धन और सनातन जीवन-मूल्यों के माध्यम से समाज का संस्कार निर्माण सर्वोच्च प्राथमिकता है।” उन्होंने कहा कि “भारत केवल एक भौगोलिक भू-भाग नहीं, अपितु देवभूमि है। यह वही पुण्य भूमि है जहाँ स्वयं भगवान ने अवतार लेकर मानवता को मर्यादा, प्रेम, करुणा और कर्तव्य का संदेश दिया। श्रीराम का जीवन मर्यादा, श्रीकृष्ण का उपदेश प्रेम और कर्मयोग, भगवान शंकर प्रकृति के साथ चलो, देवी देवता गण कोई न कोई श्रेष्ठता के प्रेरणादायक, ये सभी जीवन मूल्य इसी भारत भूमि ...

श्रीमान जिला कलेक्टर महोदय गुना स्वामित्व योजना

 दिनांक - 5 मार्च 2025  सेवा में, श्रीमान जिला कलेक्टर महोदय, नई कलेक्ट्रेट भवन,जिला गुना, मप्र     विषय :- मध्यप्रदेश भू - राजस्व संहिता ( भू सर्वेक्षण तथा भू अभिलेख ) नियम 2020 के क्रम में ग्राम - मोड़का, पटवार हल्का 64 सूजाखेड़ी तहसील बमौरी, जिला गुना के वर्ष 2024-2025 के यूनिक आईडी 1588883049, सर्वेक्षण ब्लाक क्रमांक 273, प्लाट भूखंड संख्या 32 (पी) क्षेत्रफल 2175 वर्गमीटर पर आपत्ति।   मान्यवर,  उपरोक्त विषयान्तर्गत प्रकरण में निवेदन है कि वर्ष 2024-2025 के लिये ग्राम मोड़का निवासी स्व भूपेंद्र सिंह जी पुत्र समंदर सिंह जी के पुश्तेनी विशाल पक्के आवास स्थलों एवं आवासीय भूभाग के बाबत स्वामी के रूप में श्रीमती कमलादेवी पत्नी भूपेंद्र सिंह, सत्यजीत सिंह पुत्र भूपेंद्र सिंह एवं सिद्धार्थ सिंह के नाम अंकित किया गया हैँ। जो कि विधि विरूध है तथा उचित नहीं हैँ। खसरा प्रारूप संख्या 1 ( नियम 6 ) पर आपत्ति निम्नानुसार हैः- 1- उपरोक्त आवासीय मकान एवं भूखण्ड संयुक्तरूप से स्व भूपेंद्र सिंह पुत्र समंदर सिंह जी का पुश्तेनी आवासीय भूखंड है। जिसे सबसे पहले 1935 के...

भाजपा की यह महाविजय, मोदीजी पर अडिग विश्वास की जय है – अरविन्द सिसोदिया

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भाजपा की यह महाविजय, मोदीजी पर अडिग विश्वास की विजय है – अरविन्द सिसोदिया कोटा, 17 जनवरी। भाजपा राजस्थान के कोटा संभाग मीडिया संयोजक अरविन्द सिसोदिया ने बिहार विधानसभा के बाद महाराष्ट्र में निकाय चुनावों में भाजपा गठबंधन की ऐतिहासिक जीत को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी पर जनता के अटूट विश्वास की विजय बताया है। उन्होंने कहा कि, “यह जनादेश देश की जनता द्वारा मजबूत, निर्णायक और दूरदर्शी नेतृत्व को दिया गया समर्थन है।” अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि, “प्रधानमंत्री मोदी जी का नेतृत्व आज देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में भारत की पहचान को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहा है। चाहे राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय हो, आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, विदेशी रणनीति हो या फिर गरीब कल्याण, महिला सशक्तिकरण एवं युवाओं के लिए अवसर सृजन का, हर क्षेत्र में मोदी जी के साहसिक और स्पष्ट निर्णयों ने देश को एक नई दिशा दी है। जनता का यह विश्वास उसी मज़बूत नेतृत्व की स्वीकृति है।” उन्होंने आगे कहा कि, “महाराष्ट्र के निकाय चुनाव परिणामों से यह भी स्पष्ट होता है कि देश की जनता अब आराजकता, बदतमीजी, गाली गलोच की भाषा,...

देश की जनता विपक्ष के सत्ता-लोलुप और अराजक आचरण को कभी स्वीकार नहीं करेगी - अरविन्द सिसोदिया

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देश की जनता विपक्ष के सत्ता-लोलुप और अराजक आचरण को कभी स्वीकार नहीं करेगी - अरविन्द सिसोदिया  लोकतंत्र में कब्जावादी अराजकता का कोई स्थान नहीं, देश-प्रदेश किसी की जागीर नहीं – अरविन्द सिसोदिया कोटा, 16 जनवरी। भाजपा मीडिया विभाग के कोटा संभाग संयोजक अरविन्द सिसोदिया ने विपक्ष द्वारा संवैधानिक संस्थाओं को डराने, धमकाने एवं उनके साथ दुर्व्यवहार करने के लगातार बढ़ते अशोभनीय कृत्यों की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा कि “लोकतंत्र में कब्जावादी अराजकता का कोई स्थान नहीं है। देश और प्रदेश किसी व्यक्ति या पार्टी की निजी जागीर नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि “पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का हालिया आचरण पूरी तरह संविधान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है। संवैधानिक संस्थाओं पर खुलेआम हमले करना और जांच एजेंसियों को रोकने का प्रयास करना सत्ता का घोर दुरुपयोग है। ऐसे कृत्य किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अस्वीकार्य हैं और उन्हें नैतिक रूप से सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।” सिसोदिया ने आरोप लगाया कि " कांग्रेस और उसके सहयोगी दल पिछले एक दशक से लोकतंत्र और संविधान को...

जीवन जीने का असली सलीका सिर्फ 'अनुभव' से आता है

'थोड़ी चालाकी भी जरूरी है...' बुजुर्ग दादी ने बताए जीवन के 4 ऐसे सबक, जो कोई स्कूल नहीं सिखाता! जीवन जीने का मंत्र किताबें आपको ज्ञान दे सकती हैं, लेकिन जीवन जीने का असली सलीका सिर्फ 'अनुभव' से आता है! हमारे बड़े-बुजुर्ग जब भी कोई बात कहते हैं, तो उसमें पूरी जिंदगी का निचोड़ होता है। सोशल मीडिया पर एक बुजुर्ग महिला, सतवंती सिंह का एक वीडियो खूब देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने जीवन जीने के 4 ऐसे नियम बताए हैं, जिन्हें अगर आपने अपना लिया, तो दुनिया आपको कभी धोखा नहीं दे पाएगी! 1. थोड़ी बहुत चालाकी जरूरी... थोड़ी बहुत चालाकी जरूर सीख लेनी चाहिए। इसलिए नहीं की आप दूसरों को बेवकूफ बनाना चाहते हैं, बल्कि इसलिए ताकि कोई आपको हर बार बेवकूफ ना बना सके। 2. मीठी बातों और सुंदरता पर न जाएं... किसी की मीठी-मीठी बातों में नहीं आना चाहिए, क्योंकि मिठास से उनके अंदर का कुछ पता नहीं चलता। सुंदरता से उनके अंदर का कुछ पता नहीं चलता। जैसे मोर.. नाचता हुआ वो बहुत खूबसूरत लगता है। लेकिन खाता तो वो भी कीड़े-मकौड़े है। 3. जिन्हें पचता नहीं है उन्हें कुछ ना बताएं... ऐसे लोगों को कुछ नहीं बताना ...

स्वामित्व योजना (SVAMITVA)

स्वामित्व योजना (SVAMITVA)  भारत सरकार की एक केंद्रीय योजना है जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अधिकारों का रिकॉर्ड तैयार करना और ग्रामीणों को उनकी आवासीय संपत्तियों के लिए 'संपत्ति कार्ड' जारी करना है, जिससे उन्हें अपनी संपत्ति को वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में उपयोग करने और ऋण प्राप्त करने में मदद मिले; इसमें ड्रोन तकनीक का उपयोग करके भूमि का सर्वेक्षण और मानचित्रण किया जाता है, जिससे संपत्ति विवाद कम होते हैं और ग्रामीण नियोजन में सुधार होता है।  मुख्य उद्देश्य: संपत्ति के अधिकार: ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति के कानूनी अधिकार प्रदान करना और 'अधिकारों का रिकॉर्ड' (Record of Rights) देना। वित्तीय सशक्तिकरण: ग्रामीणों को अपनी संपत्ति के आधार पर बैंक ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने में सक्षम बनाना। भूमि रिकॉर्ड: सटीक भूमि रिकॉर्ड और जीआईएस (GIS) मानचित्र तैयार करना। ग्रामीण नियोजन: ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDP) के लिए सटीक डेटा प्रदान करना। संपत्ति विवाद में कमी: संपत्ति संबंधी विवादों और कानूनी मामलों को कम करना।  कैसे काम करती है: ड्रोन सर्वेक...

सीधा हाई कोर्ट में केस फाइल कैसे करें

सीधा हाई कोर्ट में केस फाइल कैसे करें:- कई परिस्थितियों में नागरिकों को सीधे हाई कोर्ट में जाने का अधिकार होता है जब किसी सरकारी विभाग, अधिकारी या संस्था द्वारा अधिकारों का उल्लंघन हो, या निचली एजेंसियों से राहत न मिले, तब हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करके तुरंत और प्रभावी राहत प्राप्त की जा सकती है यह प्रक्रिया सुनने में जटिल लगती है, लेकिन चरणबद्ध तरीके से इसे समझना आसान है। 1-हाई कोर्ट में सीधा केस कब किया जा सकता है? नागरिक सामान्यत: तब सीधे हाई कोर्ट जाते हैं जब सरकारी विभाग ने कोई निर्णय मनमाने तरीके से दे दिया हो अधिकारी कार्रवाई न कर रहे हों समय पर राहत न मिल रही हो किसी के मौलिक या कानूनी अधिकार का स्पष्ट हनन हुआ हो अत्यधिक देरी, भेदभाव या अनुचित कार्रवाई हो ऐसे मामलों में रिट याचिका एक प्रभावी और त्वरित उपाय है। 2-रिट याचिका किस प्रकार की होती है? हालाँकि इसमें कई प्रकार की रिट होती हैं, लेकिन आमतौर पर नागरिक इन कारणों से याचिका दाखिल करते हैं किसी आदेश को रद्द करवाने के लिए किसी सरकारी कार्रवाई को चुनौती देने के लिए किसी विभाग को कार्यवाही करने के लिए बाध्य करने हेतु किसी आ...