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ईश्वर प्रदत्त नववर्ष व्यवस्था है ; हिन्दू संवत्सर : अरविन्द सीसौदिया

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यूं तो भारत ही वह देश,संस्कृति और सभ्यता है जिसनें सब कुछ विश्व को सबसे पहले दिया है। इसमें हमारे ऋषियों नें सबसे पहले अंकों का अविष्कार किया और उससे गणित और गणनाओं को अविष्कृत किया,ज्ञान का समृद्ध किया, जिस पर पूरा विश्व चला।विश्व का पहला पंचांग अर्थात केलेण्डर जो ग्रह नक्षत्रों के प्रभाव से युक्त है। वह मात्र हिन्दू केलेण्डर संवतसर है।  हिन्दू नववर्ष 2081 भारतीय नववर्ष की अनमोल  वैज्ञानिकता - अरविन्द सीसौदिया   भारतीय नववर्ष केलेण्डर, भारत की अत्यंत उच्चकोटि की खगोलीय वैज्ञानिकता - अरविन्द सीसौदिया Indian New Year Calendar, India's very best astronomical science - Arvind Sisodia   ईश्वर प्रदत्त , नववर्ष व्यवस्था है ; भारतीय संवत्सर.....! God-given, New Year's arrangement is there; Indian Samvatsara.....!     जब भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ला एकम की शुभ बेला आती है, तब भारतीय प्रायद्वीप का माहौल आनंदवर्द्धक हो जाता है। प्रातः का सम तापमान सभी ओर नई चेतना, नई शक्ति, नई उर्जा का संचार करता  हेै। ऐसा प्रतीत होता है मानों, एक नया उल्लास, एक नई ललक प्राणी समूह...

भारतीय नववर्ष विक्रम संवत,चैत्र शुक्ला प्रतिपदा की महिमा Varsh Pratipada

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bhaarateey navavarsh vikram sanvat : chaitr shukla ekam varsh pratipada kee mahima   भारतीय नववर्ष विक्रम संवत : चैत्र शुक्ला एकम वर्ष प्रतिपदा की महिमा Indian New Year Vikram Samvat: Glory of Chaitra Shukla Ekam Varsh Pratipada   सृष्टि का संवत जो कि वर्तमान में विक्रम संवत के नाम से पुकारा जाता है। यह संवत 2079 जो कि 2 अप्रैल 2022 को वर्ष प्रतिपदा से प्रारम्भ हो रहा है। ! नए वर्ष की बधाइयाँ !! भारतीय नव-वर्ष दिन - चैत्र शुक्ला प्रतिपदा की महिमा ध्यान से पढ़ने की कृपा कीजिये - १- यह भारतीय काल गणना का प्रथम दिन है ! भारतीय काल गणना संसार की सब से प्राचीन काल गणना है जो कि पूर्णतः वैज्ञानिक भी है ! इसलिए भारतीय नव वर्ष - हमें स्वतन्त्र हिन्दुस्थान में अपने गौरव पूर्ण स्वत्व का स्मरण दिलाता है ! जब कि '' अंगरेजी न्यू इयर '' पूर्णतः अवैज्ञानिक भी है और अपनी '' गुलामी '' को भी दर्शाता है ! २- यह सृष्टि के प्रारम्भ का दिन है ! ब्रह्मा जी ने इसी दिन से सृष्टि रचना प्रारम्भ की थी ! यह सृष्टि संवत का प्रथम दिन है इसलिए यह सारे ससार का प्रथम दिन है, ...

१ जनवरी : यह तो अंगेजों का कामकाजी साल है

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भारतीय नव वर्ष ही ईश्वरीय है ....... - अरविन्द सीसोदिया   सामान्यतः सभी धर्मो और पंथों में , मानव आचरण  के दो पहलू  सामनें आते हैं , वे हैं अच्छाई और बुराई ...! इनके पक्ष में चलने वाले क्रमशः अच्छे और बुरे लोग माने जाते हैं ..! जो कुछ ३१ दिसम्बर  की रात  और १ जनवरी के प्रारंभ को लेकर यूरोप - अमेरिका और ईसाई समुदाय सहित अन्य लोग देख देखी करते हैं वह अच्छाई तो नहीं है !!! यथा शराब पीना , अश्लील नाचगाना ,  सामान्य मर्यादाओं को तिलांजली देना  ! होटल , रेस्तरां   और पब में जा कर मौज  मजे के नाम पर जो कुछ होता है !! वह न तो सभ्यता का हिस्सा है और न ही उसे अच्छा होने का सर्टिफिकेट दिया जा सकता है | इसलिए सभ्यातानुकूल यह नया साल नहीं है इसमें सृष्टि जानी या नक्षत्रिय सरोकार भी नहीं है | बल्की यह सामान्यतः  दिन - प्रतिदिन के  क्रिया कलापों  को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया में  निर्मित सत्रारंभ है ! इसकी तुलना कभी भी भारतीय नववर्ष से नहीं की जा सकती , क्यों कि वह ईश्वरीय है , सृष्टिजन्य है ,  नक्षत्रिय  है...