डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी - राष्ट्रहित पर पहला बलिदान

नोट - यह आलेख तब का है जब 370 हटी नहीं थी, अतः अब 370 हट चुकी है इसे समाविष्ट करते हुये आलेख का पठन करें।
जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वह कश्मीर हमारा है।
जो कश्मीर हमारा है वह सारे का सारा है।

भाजपा की मोदी जी की सरकार नें 370 को हटा दिया और जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख दो केन्द्र शासित क्षैत्र बना दिये, इसी के साथ डॉ मुखर्जी का संघर्ष और बलिदान देश के काम आया और अमर राष्ट्रहित चिन्तक कहलाये वहीं कांग्रेस ने देश के विभाजन के द्वारा राष्ट्रहित चिन्तक की गरिमा को खो दिया। यही इतिहास का सच है।












राष्ट्रहित पर पहला बलिदान
- अरविन्द सिसोदिया
लाखों भारतवासियों  के प्रेरणा पुंज और पथ प्रदर्शक ,  डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी महान शिक्षाविद, चिन्तक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे, जो की भारतीय जनता पार्टी का प्रारंभिक नाम था  । भारतवर्ष की जनता उन्हें एक प्रखर राष्ट्रवादी के रूप में स्मरण करती है  । राष्ट्र सेवा की प्रतिव्धता में  उनकी मिसाल दी जाती है . एक प्रखर  राष्ट्र भक्त के रूप में, भारतीय इतिहास उन्हें सम्मान से स्वीकार करता है , उनका बलिदान स्वतंत्र भारत में राष्ट्रहित पर पहला बलिदान था , आज जो जम्मू और कश्मीर भारत का अंग हे वह उनके ही संघर्ष के कारण हे , उनके बलिदान के कारण हे .  भारतीय राजनीती में उन्होंने , एक जुझारू, कर्मठ, विचारक और चिंतक के रूप में, भारतवर्ष के करोड़ों  लोगों के मन में उनकी गहरी छबि अंकित है, वे एक निरभिमानी देशभक्त थे । बुद्धजीवियों और मनीषियों के वे आज भी आदर्श हैं  जब तक यह देश रहेगा तब तक उन्हें सम्मान के साथ २३ जून को हमेशा याद किया जायेगा !
- डा मुखर्जी देश के विभाजन के खिलाफ थे , उनकी धरना थी की जब हमारी सांस्क्रतिक प्रष्ठभूमि एक हे थो दो टुकड़े क्यों ?
- देश के सबसे कम उम्र के कुलपति रहे , मात्र ३३ वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्व विद्यालय में .  
- वे अनेक बार  विधायक रहे , बंगाल  में मंत्री रहे , संविधान सभा में थे ,देश की प्रथम केंदीय सरकार में भी वे केविनेट मंत्री रहे . बादमें त्याग पत्र दे कर जनसंघ की स्थापना की , जनसंघ की और से लोक सभा में संसद सदस्य रहे . वे पीडत नेहरु के समक्ष वक्ता थे . उन्हें ससाद का शेर कहा जाता था . नेहरूजी उनसे कन्नी काटते थे  .

- जब जवाहरलाल नेहरु की केंद्र सरकार जम्मू और कश्मीर को सहराष्ट्र का दर्जा दे रही थी , उससे जम्मू और कश्मीर  को अलग झाडा , अलग निशान और अलग संविधान र्ल्हने का स्धिकार मिल ज्ञा था और वहां कोई विना परमिट प्रवेश नही कर सकता था ......! तब डा मुखर्जी ने न केवल विरोध किया ब्य्की पूरे देश में में एक बड़ा आन्दोलन खड़ा किया , गर्जना की एक देश  में दो प्रधान, दो निशान और दो विधान नही चलेंगे...!! डॉ मुकर्जी जम्मू काश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। यह अधिकार देने वाली धरा ३७० का खुल कर विरोध किया . एक विशाल सभा में डा मुखर्जी ने घोषणा की में जम्मू और कश्मीर में बिना परमिट घुसूगा क्यों की वह भारत का अभिभाजित अंग हे .

संसद में अपने ऐतिहासिक भाषण में डॉ मुकर्जी ने धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की थी। वे 1953 में बिना परमिट लिए जम्मू काश्मीरकी यात्रा पर निकल पड़े। जहाँ उन्हें गिरफ्तार कर नज़रबंद कर लिया गया। 23 जून, 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई। वे भारत के लिए शहीद हो गए, सही मायने में उनकी हत्या हुई थी . मगर उनके रास्ते  पर भारतीय  जनसंघ चला लम्बे सघर्ष के बाद अब वहां भारत का झंडा हे , वहां पहले प्रधान मंत्री था अब मुख्य मंत्री हो गया हे , भारत का निशन हो गया हे , सर्वोच्च न्यायलय का अधिकार क्षेत्र हो गया हे , मगर अभी भी विशेष राज्य का दर्जा उसे  हांसिल हे .इतना एकीकरण के लिए डा मुखर्जी के बलिदान को ही श्रेय जाता हे .
 
 भारत ने एक ऐसा व्यक्तित्व खो दिया जो हिन्दुस्तान को नई दिशा दे सकता था। उन्हें सच्ची श्रधांजली  यही होगी की हम सभी सतत सतर्कता से  राष्ट्र सेवा करें , राष्ट्रहित को सर्वो परी रखें !!!.
- राधा क्रष्ण मन्दिर रोड ,
  ड़डवाडा , कोटा २ ,
 राजस्थान .


 

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

महारानी कर्णावती का जौहर ही इस्लामी अत्याचार का सत्य Queen Karnavati

"आदमी की औकात " - जैन मुनि तरुण सागर जी महाराज

राजस्थान के व्याबर जिले में देवमाली गांव,कैंसर का 'झाड़ा'

राजपूतो की शान रोहणी ठिकाना : सिर कटने के बाद भी लड़ने वाले वीरों की कहानी

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

माननीय इन्द्रेश कुमार जी indresh kumar rss

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

स्वामी विवेकानन्द : प्रेरक प्रसंग Swami Vivekananda motivational incident

श्री चांदमारी बालाजी मंदिर मार्ग कोटा की समस्या व समाधान Chandmari Balaji Kota