चौथे टेस्ट मैच के हार की जिम्मेदार टीम चयनकर्ता सहित सीनियर खिलाडी हैँ - अरविन्द सिसोदिया

चौथे टेस्ट मैच के हार की जिम्मेदार टीम चयनकर्ता सहित सीनियर खिलाडी हैँ 

भारत अपना चौथा टेस्ट जीत सकता था मगर हार गया , क्योंकि टेस्ट मैच के लिए जिस तरह के धैर्य और परिपकवता की जरूरत होती है वह कहीं भी नहीं थी।

में बचपन से ही क्रिकेट का शौकीन रहा हूं। कमेंट्री भी सुनता था। टेस्ट क्रिकेट के आदर्श बल्लेबाज राहुल द्रविड़ को माना जाता था, सुनील गावस्कर और दिलीप वेंगसर भी आदर्श ही थे। मुझे याद है कि एक टेस्टमैच में सुनील गावस्कर नें अपने विकेट को बचाये रखने के लिए 90 मिनिट तक नाम मात्र के रन बना कर क्रीज़ पर डटे रहे थे।

चौथे मैच में पहली कमी बालरों की ही रही, जब रेग्युलर बोलरा फैल होता है तो काम चलाऊ बोलरा भी विकेट निकाल लेता है। कुछ प्रयोग किये जा सकते थे। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी के अंतिम विकेट लेंनें में भी काफ़ी अधिक समय लग गया जो नहीं लगना चाहिए था। 

ठीक है बांग्लादेशी थर्ड अंपायर नें गलत आउट दे दिया, मगर शतक के पास होकर आपको जल्दीवाजी के शाट से बचना चाहिए था।  थर्ड अंपायर चिटर है यह ऑस्ट्रेलिया के मैदान मदन ही गूंजा है, शर्म होतो यह उन्हें सजा ही है।

भारत की पहलीपारी भी नीचे के बल्लेवाजों नें संभाली थी, फिर दूसरी पारी में तो सीनियरों को क्रीज पर टिकना चाहिए था। 

इसके अलावा टीम चयनकर्ता भी दोषी हैँ, प्रत्येक खिलाडी के खेल के साथ भिन्न भिन्न देशों के मैदानों का खेल रिकार्ड ध्यान में रखना होता है। रोहित कभी भी ऑस्ट्रेलिया में विश्वसनीय बल्लेवाज साबित नहीं हुये, उन्हें ड्राप रखना चाहिए था।
गौतम गंभीर मध्यक्रम के लिए एक विश्वसनीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा को लेना चाहते थे, वे ऑस्ट्रेलिया के मैदानों में सफल भी रहे हैँ। उन्हें साथ लेना चाहिए था। भारत का मध्यक्रम पूरी तरह बिखरा हुआ है। 

सच यह है कि भारतीय टीम प्रबंधन और सीनियर खिलाडियों को इस हार की नैतिक जिम्मेवारी स्वीकारनी चाहिए।

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

हमें वीर केशव मिले आप जबसे : संघ गीत

विष्णु पुराण के अनुसार काल-गणना vishnu puran kal ganana

जगद्गुरु रामभद्राचार्य : सुप्रीम कोर्ट में रामलला के पक्ष में वेद-पुराण के उद्धारण के साथ गवाही

दशा माता पूजन Dasha Mata Puja

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, मास्को जेल में..?

गणगौर : अखंड सौभाग्य का पर्व Gangaur - festival of good luck

हमारा देश “भारतवर्ष” : जम्बू दीपे भरत खण्डे