भारत में विदेशी राजनीतिज्ञ षड्यंत्रकारीयों के विरुद्ध सुद्रड सुरक्षा बनाना आवश्यक है - अरविन्द सिसोदिया

भारत में विदेशी राजनीतिज्ञ षड्यंत्रकारीयों के विरुद्ध सुद्रड सुरक्षा बनाना आवश्यक है - अरविन्द सिसोदिया 

भारत में विदेशी राजनीतिज्ञ षड्यंत्रकारीयों के विरुद्ध सुद्रड सुरक्षा बनाना आवश्यक है - अरविन्द सिसोदिया 

भारत के विरुद्ध लंबे समय से इस्लामिक देशों से षड्यंत्र चल रहे हैँ, चीन भी शत्रु बन कर सामने आया, अब अमेरिका और कनाडा की धरती से शत्रुतापूर्ण खबरें आरहीँ हैँ। हमें विजनेश फाइटर बनने के साथ साथ इजराइल की तरह शत्रुघाती बनना ही होगा। बांग्लादेश में ण संघ था, ण भाजपा थी, वहां के हिन्दुओं नें कोई स्वतंत्र देश माँगा था। फिर बिना किसी बजह के हिन्दुओं को निशाना क्यों बनाया गया। अमेरिका सहित विश्व की 50 से अधिक यूनिवरसिटीयों नें डिसमेंटल ग्लोवल हिंदुत्व कॉन्फ्रेंस क्यों आयोजित की। जो अमेरिका में यह हो रहा उसे हमारे देश का एक दल फॉलो कर रहा है। क्या सांठ गाँठ है। यह बहुत खतरनाक है, इसे पूरे देश को समझाना होगा और इसके प्रति सतर्क रहना होगा, इसे पराजित करना होगा।

1. विदेशी राजनीतिक रचनाधर्मिता का विश्लेषण

भारत में राजनीतिक हस्तक्षेप, आर्थिक दबाव, सूचना और युद्ध जैसे विदेशी राजनीतिक साज़िशों के सामने विभिन्न मुस्किले आती हैं। इसका उद्देश्य भारत की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाना और उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना होता है। उदाहरण के लिए, कुछ देशों द्वारा भारत के राजनीतिक दलों या नेताओं को समर्थन देने की कोशिश की जाती है, जिससे देश की राजनीति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

2. सुरक्षा प्रणाली की आवश्यकता

इन समस्याओं के पूर्वावलोकन करने के लिए एक मजबूत सुरक्षा प्रणाली की आवश्यकता है। यह प्रणाली केवल भौतिक सुरक्षा उपायों पर आधारित ण हो , बल्कि इसमें साइबर सुरक्षा, सूचना संग्रहकर्ता और विश्लेषण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग भी शामिल होना चाहिए ।

भौतिक सुरक्षा  पर निगरानी और गुप्त, अघोषित व रहस्यमयी आक्रमणों से सुरक्षा पर नजर रखना आवश्यक है। इसके लिए विशेषज्ञ व्यवस्था बनानी चाहिए।

साइबर सुरक्षा:- अधिकांश जानकारी डिजिटल रूप में समान्यतौर पर उपलब्ध हैँ किन्तु तकनीकी के नवीन विकासों के दिन प्रतिदिन अधतन होनें से निरंतर अपडेट होना आवश्यक है । साइबर हमले से बचने के लिए एक मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा विकसित करना आवश्यक है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि संलग्नक जानकारी सुरक्षित रहे और विदेशी ताकतें इसे चुराने या नष्ट करने में सफल न हों। तथा यह सब दो अलग अलग सेबिंग सिस्टम में सेव्ड होना चाहिए ताकी एक फैल हो तो दूसरा काम करे।

सूचना संग्रहकर्ता और विश्लेषण: खुफिया जानकारी को अधिक प्रभावशाली बनाने की आवश्यकता है ताकि वे समय पर जानकारी प्राप्त कर सकें और विश्वसनीयता का लाभ उठा सकें। इसके लिए डेटा एनेलिटिक्स और आर्टिफ़िशियल स्पेशलिटी का उपयोग भी किया जा सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: अन्य देशों के साथ सहयोग स्तर भी बहुत महत्वपूर्ण है। साझा खुफिया जानकारी से खतरे की पहचान करने में मदद मिल सकती है और सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया की क्षमता निर्धारित की जा सकती है।

3. कानूनी इलेक्ट्रानिक का मतीकरण

कठोर सुरक्षा प्रणाली बनाने के साथ-साथ कानूनी ग्रेड को भी मजबूत करना आवश्यक है। इससे संबंधित लॉजिस्टिक को अपडेट करना होगा ताकि वे नए वर्जन का सामना कर सकें। उदाहरण के लिए स्वदेशी इलेटॉनिक सुरक्षा पद्धति को सख्त बनाना और विदेशी फंडिंग पर निगरानी रखना आवश्यक  है।

4. जन जागरूकता

अंततः, नागरिकों को भी इस विषय में परामर्श देना आवश्यक है। उन्हें यह बताना चाहिए कि किस प्रकार विदेशी शक्तियों को उनके देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है।

इस प्रकार, भारत में विदेशी राजनीतिक षड्यंत्रकारी संरचनाओं के विरुद्ध कठोर सुरक्षा प्रणाली बनाना एक बहु वैज्ञानिक दृष्टिकोण की मांग है जिसमें भौतिक, साइबर, कानूनी और सामाजिक तटस्थताओं का समावेश होना चाहिए।

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