सर्वश्रेष्ठ है हिन्दू धर्मपथ - अरविन्द सिसोदिया

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हिंदुत्व लाखों ऋषियों, मुनियों और संतों के अनुसंधान से धर्मपथ बना है, इसलिए इसमें बहुअयामी श्रेष्ठतायें और सत्य तक पहुंचने की समझ विकसित हुई और संपूर्ण समाज इसका संरक्षक बना। जो वर्तमान में सर्व श्रेष्ठ है।

अन्यथा एक पुस्तक और एक प्रेरक के आधार पर अनेक पंथ खडे हुये। 

बहुत ही सुंदर और गहरा विचार ! यह विचार हमें सनातन हिंदुत्व के महत्व, गुण - दोष, विशेषताएं और उसके विकास की प्रक्रिया को समझने के लिए प्रेरित करता है।

हिंदुत्व वास्तव में लाखों ऋषियों, मुनियों और संतों के अनुसंधान और तपस्या, चिंतन मनन और अध्ययन के परिणामस्वरूप विकसित हुआ है। इन महान आत्माओं ने अपने जीवनकाल में धर्म, दर्शन, और अध्यात्म के क्षेत्र में गहराई से अनुसंधान किया और अपने ज्ञान को समाज के साथ बांटा।

आपके द्वारा उल्लिखित बात कि हिंदुत्व में बहुअयामी श्रेष्ठतायें और सत्य तक पहुंचने की समझ विकसित हुई, बहुत ही महत्वपूर्ण है। हिंदुत्व में विभिन्न सिद्धांत,दर्शन, धर्म - कर्म, सत्यानवेशण और अध्यात्मिक विचारों और पंथों के ज्ञान का समावेश है, जो हमें सत्य तक पहुंचने के लिए विभिन्न दृष्टिकोण प्रदान करता हैं।

यह विचार हमें यह भी समझने के लिए प्रेरित करता है कि हिंदुत्व में कोई एक धार्मिक गुरु या स्वामी न होकर सामूहिक नेतृत्व है, इसलिए संपूर्ण समाज हिंदुत्व का संरक्षक बना हुआ है। हिंदुत्व के सिद्धांत और मूल्य हमारे समाज को एकता और सामंजस्य के साथ जोड़ते हैं, और हमें अपने जीवन को अधिक अर्थपूर्ण और सार्थक बनाने में मदद करते हैं।
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हिंदुत्व का धर्मपथ और उसकी विशेषताएं

ईश्वर में पूर्ण विश्वास, जिसे अक्सर हिंदू धर्म के आध्यत्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक सिद्धांतों के रूप में देखा जाता है, यह एक व्यापक सामूहिक व्यवस्था है जो भारतीय संस्कृति और समाज की परंपरा में निहित है। यह अनगिनत लाखों ऋषियों, मुनियों और संतों के शोध पर आधारित है, जो समय-समय पर धार्मिक, सैद्धांतिक और सामाजिक सिद्धांतों के विकास को आत्मसात करते हुये हमेशा परिवर्तनशीलता को अपनाते हुये नवीन बनी रहती है, इसीलिए इसे सनातन अर्थात सदैव नूतन नाम से जाना जाता है। इस प्रक्रिया में वेद, पुराण, उपनिषद, विभिन्न धार्मिक ग्रंथ, रामायण और महाभारत को शामिल किया गया है।

1. बहुअयामी श्रेष्ठताएँ

सनातन हिन्दू साहित्य को नष्ट और भ्रष्ट करने के अनेकों प्रयास इसकी श्रेष्ठता से द्वेष रखने वाले अन्य पंथों और राजनैतिक कारणों से हुआ। नालंदा विश्वविद्यालय जला दिया तक्षशिला नष्ट कर दिया, गुरुकुल बंद करवा दिए, किन्तु सनातन हिंदुत्व सामाजिक संरक्षण के कारण आज भी जीवंत है।

जिस तरह विश्वविद्यालय की एक प्रमुख विशेषता इसकी बहुसंख्यक विषय और संस्थाएँ हैं। उसी तरह हिंदुत्व के भी बहुअयामी तत्कालीन परिस्थिति के अनुसार विकसित हुई और परिणाम प्राप्त किये।

इसका सार एक सुव्यवस्थित समाज व्यवस्था और उसमें दस धर्म गुणों की स्थापना के रुपमें सामने आता है। यह न केवल एक धार्मिक विश्वास की प्रणाली है बल्कि इसमें जीवन के सद्गुण विकास के विभिन्न सिद्धांतों को भी शामिल किया गया है। इसमें विद्या, संस्कृति, कला, विज्ञान और समाजशास्त्र जैसे क्षेत्रों का समावेश होता है। यह विविधता को समाहित करके चलनेवाला हिंदू धर्म एक जीवंत और विकसित जीवन प्रणाली है, जिसमें समय के साथ समन्वय की विशिष्ट क्षमता है।

2. सत्य तक पहुंच की समझ

सार्वभौमिकता में सत्य की खोज एक महत्वपूर्ण तत्व है। ऋषि-मुनियों ने ध्यान और साधना के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त करने का प्रयास किया। इस प्रक्रिया में उन्होंने भक्ति, ज्ञान और कर्म योग जैसे विभिन्न शैलियों को अविस्कृत किया । इन सभी का उद्देश्य व्यक्ति को सत्य की ओर ले जाना था। ईश्वर की अनंतकालीन व्यवस्था में व्यक्ति की व्यक्तिगत स्थिति का अनुभव और विराट में भी सहजता व समानता का महत्व समझा है। जी अत्यंत विलक्षण व अद्भुत है।

3. सम्पूर्ण समाज का संरक्षण

हिंदुत्व केवल एक व्यक्तिगत या धार्मिक पहचान नहीं है; यह संपूर्ण विश्व बन्धुत्व का संरक्षण करता है। इसका मतलब यह है कि हिंदू समुदाय ने अपने धर्म को केवल अपने लिए नहीं बल्कि संपूर्ण समाज के लिए संरक्षित व समाहित किया है। यह सामूहिक जिम्मेदारी लोगों को एकजुट करती है और उन्हें अपनी सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रेरित करती है।

इस प्रकार, हिन्दू सनातन विश्वास एक गहन सिद्धांतों का समूह है जो केवल धार्मिक विश्वासों से संबंधित नहीं है बल्कि सामाजिक संरचना और समुदाय के सरोकारों से भी संबंधित है।

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