कविता - भाई-बहन के प्रेम की अविरल धारा - अरविन्द सिसोदिया रक्षाबंधन और भाई दूज के पर्व बताते, सनातन नारी का सर्वोच्च सम्मान संवारे। भाई-बहन के प्रेम की अविरल धारा, सह-अस्तित्व का सुंदर विधान प्यारा। राखी केवल धागा नहीं, विश्वास की डोरी, भाई के मन में बहना की रक्षा का मान है। भाई-दूज सिखाता स्नेह और शुभकामनाएँ, रिश्तों में प्रेम ही सबसे बड़ा धनवान है। ===1=== नारी जननी, नारी शक्ति, नारी जीवन का आधार, नारी से ही सृष्टि सजी, नारी से संसार। दुर्गा में शक्ति, सरस्वती में ज्ञान, लक्ष्मी में समृद्धि का दिव्य स्वरूप महान। वेदों में गूँजी गार्गी-मैत्रेयी की वाणी, ज्ञान-तपस्या से बनी संस्कृति की निशानी। नारी अबला नहीं, सामर्थ्य की पहचान है, उसका गौरव ही सनातन का अभिमान है। ===2=== नारी केवल पूजित प्रतिमा नहीं, सक्रिय जीवन है, उसकी शिक्षा, सुरक्षा, स्वतंत्रता उसका अधिकार है। समान अवसर, समान अधिकार मिले उसको, तभी समाज सशक्त और राष्ट्र महान है। जहाँ नारी का मान सुरक्षित और सम्मानित, वहीं संस्कृति का उत्थान, वहीं सच्चा ज्ञान है। नारी सहभागी बने विकास के हर पथ पर, यही भारत के भविष्य का उज्...
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