जमाखोरी और महंगाई पर राज्य सरकारें कडी नजर रखें - अरविन्द सिसौदिया

जमाखोरी और महंगाई पर राज्य सरकारें कडी नजर रखें- अरविन्द सिसौदिया


State governments should keep a close watch on hoarding and inflation


jamaakhoree aur mahangaee par raajy sarakaaren kadee najar rakhen

 


जमाखोरी और महंगाई पर राज्य सरकारें कडी नजर रखें

- अरविन्द सिसौदिया

युद्ध काल में हमेशा मुख्य मुद्दा वस्तुओं की उपलब्धता एवं मूल्य नियंत्रण रहता है। इस पर सबसे ज्यादा काम जिला कलक्टर्स को, जिला रसद अधिकारी गणों को करना होता है। मगर देखनें में यह आ रहा है कि ज्यादातर अधिकारी वर्ग राज्य सरकार की ओर मुंह ताकते रहते है। राज्य सरकार के इशारे पर काम करते है। जन हित सामान्य तौर पर गौड रहता है।

देश अभी कोविड की तीन श्रृंखलाओं से जूझ कर बाहर निकल रहा है। अब यूक्रेन - रूस युद्ध प्रारम्भ हो चुका है। जमाखोर मोटी रकम कूटनें की फिराक में है। अनेकों वस्तुओं के भाव बडा दिये गये है। युद्ध लम्बा चला तो विश्व को मंहगाई की मार झेलनी पडेगी। कोविड में और बाद में भी देखनें में यह आया है कि कुछ राज्यों की राज्य सरकारें , केन्द्र सरकार को बदनाम करने के लिये जरूरी उपाय करनें एवं आवश्यक स्थानीयस्तर पर कमद उठानें में शिथिलता बरतती है। जो कि सभी दृष्टिकोंणों से गलत है।

आवश्यक वस्तुओं के स्टॉक लिमिट में छूट देने से कालाबाजारी अपने चरम स्थल पर पहुंच जाती है। खाद्यान्न तेल, दाल, सब्जी, दवाइयों और तेलों के दामों अनावश्क मूल्य वृद्धि जमाखोरी के द्धारा हो जाती है। राज्यों की राज्य सरकारों का प्रथम दायित्व यही बनता है कि तुरंत स्टाक लिमिट को कम करें । लाभ पर खरीद मूल्य से अधिकतम लाभ कितना वसूल सकते है। इस पर अंकुश लगायें। लाभ वसूली की असीमित सीमा से ही मंहगाई बडती है।
 

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