क्या चीन को चंदे की चुकाई की जा रही है - अरविन्द सिसौदिया china chanda


क्या चीन को चंदे की चुकाई की जा रही है - अरविन्द सिसौदिया

भारत की सेना ने चीनी सेना की तवांग में कुटाई ठुकाई और भगाई क्या की , भारत में कांग्रेस बिफरी हुई है। वह झूठ,भ्रम और चीन को कवर फायर देनें में पूरी ताकत से जुटी हुई है। चीन में एमओयू साईन करने गये राहुल गांधी से लेकर राजमाता सोनिया गांधी तक सबके सब हाय तौबा मचाये हुये हैं। भारत की संसद को बाधित कर रहे हैं। चीन को खुशी हो इसमें पूरी ताकत से कांग्रेस जुटी हुई है। खैर कांग्रेस का यह राष्ट्रघाती तमाशा उसके चेहरे से ही नकाव हटा रहा है। देश पूरा चन्दे की चुकाही को देख रहा है। वर्ना कोई अपने ही मुल्के खिलाफ इस तरह खडा होता है !

स्वतंत्रता से लेकर कारगिल युद्ध तक कभी विपक्ष सेना के विरूद्ध, राजनीति पर नहीं उतरा । यह सिर्फ चीन को लेकर कांग्रेस की तरफदारी में कुछ दसकों से देखनें में आ रहा है। इसके कारण इसके पीछे छिपे हेतु शंकायें उत्पन्न कर रहे है। जो एक देश की अस्मिता के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

कई सेना विशेषज्ञ कह चुके कि भारत की सेना ने भारत सरकार की त्वरित जबावी कार्यवाही की छूट की नीति के कारण, वह सब कर पा रही है जो पहले
सेना नहीं कर पाती थी। पिछले कुछ दिनों पूर्व ही अरूणाचल प्रदेश में भारत सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग, जहाज़रानी, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री  नितिन गडकरी थे। वे भारत की तरफ से चीन बाडर्र पर बनाई जा रहीं सडकों का जायजा ले रहे थे।

 2013 तक चीन खुश था कि उसके द्वारा चीन - भारत सीमा पर उल्लंघन पर कोई कुछ नहीं बोलता था, तब की कांग्रेस सरकार के रक्षामंत्री ने कहा था कि चीन बाडर्र पर सडक एवं अन्य जरूरी इन्फ्रास्टेक्चर का निर्माण नहीं करना ही सबसे अच्छी रणनीति है। मगर 2014 में नरेन्द्र मोदी सरकार ने इस नीति को उलट दिया । अब चीन की सीमा पर सडक निर्माण हो रहे है,पुल पुलिये टनल बन रहे, सेना को तुरन्त सहायता पहुचानें की सभी व्यवस्थायें हो रहीं हैं। सेना के एक रिटायर्ड अधिकारी ने कहा है कि चीन भारत को लेकर सर्तक तो है, क्यों कि 2019 में मोदी सरकार ने कहा है कि चीन के कब्जे से भारत की जमीन वापस लेनी है। अभी तक किसी ने भी यह साहस नहीं किया कि चीन से हथियाई जमीन वापस लेने को कहा हो।

चीन की ईच्छा सर्वविदित है कि वह अपना विस्तार हिन्द महासागर तक चाहता है। अर्थात सम्पूर्ण भारत पाकिस्तान बांगलादेश नेपाल और श्रीलंका को वो हडपना चाहता है। यह आज से नहीं 30 साल पहले से सर्व विदित है। कांग्रेस ने चीन की तमाम धोकाधडियों के वाबजूद, हिंस
प्रहारों और युद्ध पराजय के बाद भी चीन के सामनें आंख उठानें का साहस नहीं किया था । पहला रक्षा मंत्री जार्ज फनान्डिज था जिसनें कहा था हमारा दुश्मन नम्बर वन चाईना है।

देश का पहला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी है जिसने चीन को सामनें रख कर अपनी रक्षानीति बनाई है। सीमा पर आधारभूत ढांचे के विकास के साथ साथ मिसाईल एवं हवाई ताकत में वृद्धि की है। जो तकनीकी और बुलेठप्रूफ जाकेटों से सेना को सुसज्जित कर रहा है। 


अब चीन को समझ में आ रहा है कि भारत मुकाबला करेगा । इसलिये उसने भारत को अन्दर और बाहर से घेरने के कई षडयंत्र चला रखे है। उसने धन के बल पर पाकिस्तान नेपाल श्रीलंका और बांगला देश को अपने जाल में फंसाया, हलांकी उसकी चाले अब बेअसर भी हो रहीं है। मगर दुभाग्यपूर्ण यह है कि देश के अन्दर वह एक मजूबूत पार्टी से एमओयू करनें में सफल रहा है। चीन ने भारत में जयचन्द भले ही खरीद लिये हों मगर, देश का जनमत जयचन्दों की हवा निकाल कर शून्य करने वाला है।

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