यूपी के चुनावी नारे - गूंज रहा है तीन ही नाम,मोदी योगी जय श्रीराम modi yogi jai shree ram

modi yogi jai shree ram

 

गूंज रहा है तीन ही नाम,मोदी योगी जय श्रीराम

goonj raha hai teen hee naam,modi yogi jay shreeraam

ज्यादातर चुनावों में कोई एकाध नारा इस तरह का बन जाता है, जो लम्बे समय तक याद रहता है। कुछ नारों की समीझा हमें यहां करते हैं।

1- “तिलक तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार.”
मगर एक नारा इस तरह का है जो अब उसी पार्टी की गले की हड्डी बन गया है। बलिक यूं मानिये कि इस नारे ने ही पार्टी का बिस्तर गोल कर दिया है। बहुजन समाज पार्टी ने पहले एक नारा दिया था “तिलक तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार.” । बसपा सुप्रीमो मायावती अब इस नारे को याद भी नहीं करना चाहती मगर, यह अब भी खूब चलता है। इस नारे से उन्हे लाभ भी हुआ था मगर बाद में यह नुकसान दायक साबित हुआ और अब भी नुकसान पहुंचा रहा है।

2 - ‘मिले मुलायम कांशीराम, हवा में उड़ गए जयश्री राम’  
इसी तरह का
एक नारा और भी है जिसे सपा याद नहीं करना चाहती । सपा सुप्रीमो कांशीराम और सपा के मुलायम सिंह यादव की दोनों पार्टियों ने पहली बार चुनावी गठबंधन किया और बीजेपी के सामने मैदान में उतरीं. इस दौरान एक नारा ‘मिले मुलायम कांशीराम, हवा में उड़ गए जयश्री राम’ प्रदेश की राजनीति का केंद्र बन गया. अब इस नारे को सपा और बसपा दोनों ही याद नहीं करना चाहते।


यूपी की राजनीति समझनी है, बस ये 7 नारे पढ़ें ३ ‘इनको मारो जूते चार’ से ‘मुख्यमंत्रीजी सोफे पे, डिप्टी सीएम स्टूल पे’ तक३

 ‘जो राम को लाए हैं। हम उनको लाएंगे।’


3 -  ‘राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’  से .......
      ‘जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे’  तक ....

मुख्यमंत्री मुलायम सिंह की सरकार थी। मुलायम ने कहा, ‘मेरे रहते बाबरी मस्जिद पर कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता।’ साल 1990, कारसेवक मस्जिद की ओर बढ़े। मुलायम ने पुलिस को फायरिंग का आर्डर दे दिया। गोलियां चलनी शुरू हुईं। कारसेवकों की मृत्यु हुई। भाजपा ने कल्याण सिंह के नेतृत्व में चुनाव लडा और तब प्रमुख नारा था ‘राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ यह नारा पूरे देश में भी बहुत वर्षों तक गूंजता रहा । अब मंदिर बन रहा है। इसलिये नया नारा आ गया ‘जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे’।

4 - ‘चढ़ गुंडन की छाती पर, मुहर लगेगी हाथी पर’


1995 में गेस्ट हाउस काण्ड हुआ। सपा विधायकों ने गेस्ट हाउस में बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती पर हमला कर दिया था। इस कांड का असर राजनीति पर तो पड़ा ही, आने वाले चुनावी नारों पर भी पड़ा। तब से सपा के साथ गुण्डा शब्द चिपक गया। नारे की कहानीः साल 2007, विधानसभा चुनाव होने वाले थे। 12 साल बाद भी मायावती उस कांड को भूल नहीं पाईं। गुस्से में थर्राती मायावती ने सपा समर्थकों को गुंडे बुलाना शुरू कर दिया। उन्हीं के खिलाफ ये नारा “ चढ़ गुंडन की छाती पर मुहर लगेगी हाथी पर’ भी बना डाला“।

5 - ‘हाथी नहीं गणेश है,ब्रह्मा विष्णु महेश है’


एक ऐसा भी समय आया जब बसपा संस्थापक कांशीराम का नारा, ‘तिलक तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार’ बसपा के गले की हड्डी बन गया था। तब मायावती ने नारा बदला, ‘हाथी नहीं गणेश है,ब्रह्मा विष्णु महेश है’।

6 -  ‘जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है’


साल 2012, चुनाव में, सपा ने नारा दिया  ‘जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है’ नारा गूंजने लगा। इस चुनाव से यादव वोट बैंक एक जुट हो गया और मुलायम चुनाव जीत गये,बाद में मुलायम ने अपने बेटे अखिलेश को मुख्यमंत्री बना दिया ।

अखिलेश एंड कंपनी ने नारा दिया, ‘गुंडा चढ़ गया हाथी पर, गोली मारी छाती पर’। इस तरह के नारों के चलते ही अखिलेश आम चुनाव हार गये।

नारा 7- ‘न गुंडा राज न भ्रष्टाचार, अबकी बार भाजपा सरकार’


साल 2017 में यूपी गुण्डा राज से बेहाल थी और बदलाव की लहर थी। असल में 1989 के बाद कांग्रेस और 2002 के बाद भाजपा सत्ता में नहीं आई थी। बीजेपी ने इस बार एक ही नारे में सपा और कांग्रेस दोनों लपेट लिया, ‘न गुंडाराज न भ्रष्टाचार, अबकी बार भाजपा सरकार’।

उस वक्त ‘जीत की चाभी डिंपल भाभी’ और ‘यूपी की मजबूरी है, अखिलेश यादव जरूरी है’ जैसे मजेदार नारे सपा ने भी दिए थे। काम नहीं आए । बीजेपी ने 312 सीटों के लैंड-स्लाइड विक्ट्री पाई । योगी आदित्यनाथ यूपी के मुख्यमंत्री बन गए और केशव प्रसाद मौर्या डिप्टी सीएम।
8 -  “ गूंज रहा है तीन ही नाम,मोदी योगी जय श्रीराम”
वर्तमान में बीजेपी की ओर से सबसे प्रमुख नारा ‘जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे’ ही चल रहा है। किन्तु “ गूंज रहा है तीन ही नाम,मोदी योगी जय श्रीराम ” कॉफी लोकप्रिय हो रहा है।



टिप्पणियाँ

  1. डी एन मिश्रा सक्रिय कार्यकर्ता बीजेपी 69 राजीव गाँधी वार्ड विनय खण्ड 2गोमतीनगर लखनऊ पिनकोड नम्बर 10

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