रक्षा सूत्र बंधन याने सुरक्षा का भरोषा - अरविन्द सिसोदिया RakshaBandhan

रक्षा सूत्र बंधन याने सुरक्षा का भरोषा - अरविन्द सिसोदिया 

सनातन हिंदुत्व के प्रमुख चार पर्वों में रक्षाबंधन प्रमुख रूप से आता है। होली, दीवाली, दशहरा और राखी ये चार प्रमुख पर्व हिंदुत्व के आयाम हैँ।इसमें राखी पर भाई बहन को सुरक्षा का भरोषा देता है, वचनबद्धता करता है अर्थात संकल्प लेता है कि वह हर संभव प्रयत्न से अपनी बहन की रक्षा करेगा । इस अवसर पर बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र ( राखी ) बांधती है। इसलिए यह पर्व राखी के नाम से ही जाना जाता है।

इसी तरह सनातन हिंदुत्व में कोई पूजन, शुभकार्य या अन्य प्रकार के कोई देवीय कार्य होते हैँ तब भी पंडित जी जजमान को मौली बांधते हैँ अर्थात आंटी के कच्चे धागे को कलाई पर बांधते हैँ और धर्म की रक्षा का वचन दिलाते हैँ।

रक्षा सूत्र के द्वारा सुरक्षा का संकल्प एक निरंतर प्रक्रिया है जो लगातार रक्षा भाव की जागृति करती है।

इसका विस्तृत स्वरूप राजा को प्रजा के प्रति कर्तव्यवान, सेना को देश की सुरक्षा के प्रति, न्यायाधीश को न्याय के प्रति, पुलिस को कानून व्यवस्था के प्रति कर्तव्य भाव को प्रेरित करना होता।

रक्षा बंधन का पर्व सभी क्षेत्रों में कार्य कर रहे व्यक्तियों को उनके दायित्वों के प्रति ईमानदारी से प्रतिबद्धता को प्रेरित करती है। 

इसी भाव से राजनीति और प्रशासन को अपना कर अपने अपने दायित्वों को पूरा करना चाहिए।

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