कविता - कहां खो गईं बहन-बेटियां



🌸 बहन-बेटियां 🌸

अरविन्द सिसोदिया 
9414180151

अनीति के माहौल में,
कानून के जंजाल में,
संपत्ति के ख्याल में,
कहां खो गई चुलबुल बहन बेटियां...
--1--
जो चिड़िया-सी चहकती थीं,
हर सुबह को रौनक देती थीं,
घर-आंगन की शोभा थीं वो,
हर रिश्ते में प्रेम भरती थीं।
--2--
जिसके चेहरे की मुस्कान से
घर का कोना-कोना महक उठता था,
जिसकी आहट से हर दिल में,
जीवन का संगीत गूंज उठता था।
--3--
अब न जाने किस डर में सिमट गई वह ,
अंजानी दहसत से भर गई वह ,
शक और संपत्ति की उलझन में.
अपने ही स्नेह के लिए तरस गई वह!
--4--
जो राखी में भाई की कलाई पर सजाती थीं,
भाई दौज पर ममता से घर-संसार भरती थीं,
उपेक्षा से डरी सहमी अपने ही घर में ठिठक गई वह,
बंद दरवाज़े, मुंह मोड़ते रिश्तों की सिसकी में गुम हो गई वह।
--5--
क्या यही था वो समाज हमारा,जो संस्कार भूला,
जहां नारी को मान मिलता था सर्वोपरी,
अब तो हर खबर में दर्द का साया बन गया,
क्यों, हर गली अब असुरों का माया बन गई! 
--6--
लोकतंत्र और राजनीती के नासूरों ने रिश्ते छीने,
संस्कारों और शिष्टाचारों को आधुनिकता की चक्की में पीसे ,
समाज की चेतना को जगाना होगा,
सनातन कुटुंब व्यवस्था को बचाना होगा।
वह सरकार बनाएं जो संस्कार बचाये।
--7--
फिर भी उम्मीद की किरण बाकी है,
हर बेटी हमेशा ही शक्तिशाली है,
सीता सी सहनशीलता भी शक्ति है , 
मगर मत भूलना वह दुर्गा सी बलशाली भी है।
--8--
आओ फिर से बहन बेटी का आदर जगाएं,
हर नारी को आत्म सम्मान दिलाएं,
फूलों-सी कोमल,पर्वत-सी दृढ़, जो हर दुःख को सहती है,
उन बहनों-बेटियों को फिर से मुस्कराएं।
--9--
अनीति के माहौल में,
कानून के जंजाल में,
फिर से उम्मीद जगाएं,
खिलखिलाएं बहन बेटियां...,
फिर वही सनातन समाज बनाएं।
---- समाप्त ---

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

‘‘भूरेटिया नी मानू रे’’: अंग्रेजों तुम्हारी नहीं मानूंगा - गोविन्द गुरू

स्वामी विवेकानन्द : प्रेरक प्रसंग Swami Vivekananda motivational incident

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

Complete heroic story of lord hanuman ji ( hindi and english )

हमारा देश “भारतवर्ष” : जम्बू दीपे भरत खण्डे

सर्वप्रथम 27 दिसम्बर 1911 को गाया गया था राष्ट्रगान जन गण मन अधिनायक जय है jan-gan-man

खींची राजवंश : गागरोण दुर्ग

जागो तो एक बार, हिंदु जागो तो !