शुक्रवार, 3 अक्तूबर 2014

महात्मा गांधी, वंशवृक्ष !


(फोटो: पोते गोपालकृष्ण के साथ महात्मा गांधी। 
गांधीजी की बायीं तरफ आभाबेन और दायीं तरफ मनुबेन हैं।)
राजकोट (गुजरात)। आज गांधीजी को देश ही नहीं, पूरी दुनिया में याद किया जाता है। गांधीजी का जन्मदिवस यानी की 2 अक्टूबर, विश्व अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। एक विश्वविख्यात महानुभाव की तरह उन्हें सभी याद करते हैं। यूं तो हम गांधीजी के बारे में बहुत कुछ पढ़ते-सुनते हैं पर आज भी बहुत से लोग गांधीजी के परिवार के बारे में नहीं जानते।

लेकिन आज आपको बताते हैं महात्मा गांधी के परिवार की मौजूदा स्थिति के बारे में... गांधीजी के परिवार की बात करें तो उनके पोते-पोतियां और उनके 154 वंशज आज 6 देशों में रह रहे हैं। इनमें 12 चिकित्सक, 12 प्रोफेसर, 5 इंजीनियर, 4 वकील, 3 पत्रकार, 2 आईएएस, 1 वैज्ञानिक, 1 चार्टड एकाउंटेंट, 5 निजी कंपनियों मे उच्चपदस्थ अधिकारी और 4 पीएचडी धारक हैं। वहीं, परिवार में लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या ज्यादा है। गांधीजी के वंशज आज भारत, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, कनाडा, अमेरीका और ऑस्ट्रेलिया में हैं

युनिवर्सिटी ऑफ साउथ केरोलिना के hal frenach नामक एक स्कॉलर ने gandhi’s grand children : the legacy continued टाइटल से एक डॉक्यूमेंट तैयार किया था, जिसमें ये जानकारियां दी गई हैं।



2                                                (फोटो: कस्तूरबा चार बेटों के साथ)

महात्मा गांधी का परिवार:
पिता: करमचंद
माता: पुतलीबाई
बड़ी बहन रलियत
भाई लक्ष्मीदास और भाभी नंद कुंवरबेन
कृष्णदास और भाभी गंगा
गांधीजी और कस्तूरबा के चार बेटे और बहू:
हरिलाल- गुलाब (परिवार में 68 सदस्य)
मणिलाल -सुशीला (परिवार में 39 सदस्य)
रामदास-निर्मला (परिवार में 19 सदस्य)
देवदास-लक्ष्मी (परिवार में 28 सदस्य)
इस तरह गांधीजी के परिवार में 154 सदस्य होते हैं। अगर गांधीजी और कस्तूरबा को इनमें शामिल करें तो यह आंकड़ा 156 होता है। गांधीजी के चार बेटे और उनके 13 बेटे और बेटियां। इस तरह गांधीजी की पोते-पोतियों की संख्या 13 है।

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सबसे बड़े बेटे हरिलाल की दो पत्नियां गुलाब और चंचल


सबसे बड़े बेटे हरिलाल की दो पत्नियां गुलाब और चंचल
संतानें :
बेटी रमीबेन (पति- कुंवरजी पारेख) बच्चे : नवमलिका और सुधा
बेटा कांतिलाल (पत्नी- सरस्वती) बच्चे: शांतिकुमार और प्रदीप
बेटी मनु (पति- मशरूवाला) बच्चे : उर्मि रेणु और बेटा मृणाल

रमीबेन की चार संतानें :
बेटी अनसुया (पति: मोहन पारिख)
बेटा प्रबोध (पत्नी: माधवी)
बेटी नीलम (पति: योगेंद्र पारिख)
बेटी सुधा (पति: व्रजलाल वजरिया)

अनसुया का परिवार:
बेटी लेखावती (पति: बाला सुब्रमण्यम) बच्चे: देव और अमल
बेटा राहुल (पत्नी: नीलिमा) बच्चे: अवनि और अनूप

प्रबोध का परिवार:
बेटी सोनल (पति: भरत) बच्चे : रचना और गौरव
बेटा पराग (पत्नी: पूजा) बच्चे : प्राची औ दर्शन

नीलम का परिवार:
बेटा समीर (पत्नी : रागिनी) बच्चे : सिद्धार्थ, गोपी और पार्थ

सुधा का परिवार :
बेटी पारुल (पति : नैमिश) बच्चे : सार्थक और अनेरी
बेटी मनीषा (पति : राजेश पारिख) बच्चे : मिली और दकश
बेटा रवि (पत्नी : शीतल) बच्चे : नील और आकाश

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गांधीजी के दूसरे बेटे मणिलाल का परिवार:
दो बेटियां : सीता (पति: शशिकांत धूपेलिया), इला (पति: रंबोगिन) और बेटा अरुण (पत्नी: सुनंदा)

सीता का परिवार:
सतीश (पत्नी: प्रतिभा) बच्चे : मिशा, शशिका और बेटा कबीर
उमा (पति: राजेन) बच्चे : बेटी सपना
कीर्ति (पति: सुनील मेनन) बच्चे : बेटी सुनीता

इला का परिवार:
केदार, कुश, आशा, आरती और आशीष (दो बच्चे : निखिल व मीरा)

अरुणभाई का परिवार:
बेटा तुशार (पत्नी : सोनल) बच्चे: विवान और कस्तूरी
बेटी अर्चना (पति: हरिप्रसाद) बच्चे : पारितोश और अनीस (पारितोश के बच्चों के नाम : एलिजाबेथ और माइकल)

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रामदास (पत्नी: निर्मलाबेन) का परिवार


रामदास (पत्नी: निर्मलाबेन) का परिवार
तीन बच्चे :
सुमित्रा (पति: गजानन कुलकर्णी) बच्चे : रामचंद्र (पत्नी: जूलिया), श्रीकृष्ण (पत्नी: नीलू), सोनाली (पति: वेंकटेश)
ऊषा (पति: हरीश गोकाणी) बच्चे : आनंद और संजय

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देवदास (पत्नी: लक्ष्मी) का परिवार:

देवदास (पत्नी: लक्ष्मी) का परिवार:
चार संतानें:
तारा (पति: ज्योतिप्रसाद)
राजमोहन (पत्नी: इंदु)
रामचंद्र (पत्नी: इंदू)
गोपालकृष्ण (पत्नी: तारा)

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                                                     (गांधीजी व कस्तूरबा की फोटो)

राजकोट। दक्षिण आफ्रीका में सत्याग्रह की लड़ाई जारी थी। इसी समय अचानक कस्तूरबा को बार-बार रक्तस्त्राव की समस्या शुरू हो गई। गांधीजी के एक डॉक्टर मित्र ने डर्बन में कस्तूरबा का ऑपरेशन किया और गांधीजी से फोन पर कहा कि तुम्हारी पत्नी की जान बचाने के लिए गाय के मांस का अर्क (बीफ टी) दिया जाना बहुत जरूरी है। बोलो, क्या करना है?

गांधीजी ने जवाब दिया, जब तक मैं वहीं नहीं पहुंच जाऊं, मेरी पत्नी को शराब या मांस से संबंधित कोई दवा न दी जाए। गांधीजी यहां आ पहुंचे। डॉक्टर ने अपनी वही बात दोहराई कि मैंने आपको फोन पर सारी स्थिति बता ही दी थी। गांधीजी ने कहा, तुम हमारे साथ अन्याय कर रहे हो। डॉक्टर ने जवाब दिया, मेरे पास आने वाले मरीजों की जान बचाना ही मेरा धर्म है। अगर आप इसे अन्याय मानते हैं, तो ये आपका धर्म है।

कस्तूरबा की हालत बिगड़ती देख गांधीजी ने उनसे कहा, तुम मेरे इन विचारों (मांस, मदिरा का सेवन न करना) से नहीं बंधी हुई हो। इस बात पर कस्तूरबा ने कहा कि ‘मैं आपकी गोद में सिर रखकर दम तोड़ दूंगी, लेकिन अपने धर्म के खिलाफ नहीं जाऊंगी’।


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