अद्वितीय साहस : एशिया की पहली महिला कमर्शियल पायलट कैप्टन इन्द्राणी सिंह Captain Indrani Singh

 

Captain Indrani Singh

एशिया की पहली महिला कमर्शियल पायलट कैप्टन इन्द्राणी सिंह, सॉफ्टवेयर की मदद से लाखों बच्चों को शिक्षा दे रही हैं !
एशिया की पहली महिला कमर्शियल पायलट कैप्टन इन्द्राणी सिंह

28 नवंबर, 1996 – कैप्टन इन्द्राणी सिंह एयरबस ए-300 विमान को कमांड करने वाली पहली महिला बनी।

कैप्टन इंद्राणी सिंह को न केवल एशिया की पहली महिला कमांडर के रूप में जाना जाता है, बल्कि वह वंचित बच्चों के लिए किए जा रहे कल्याण कार्यों के लिए भी जानी जाती हैं।

देश की पहली महिला कमर्शियल पायलट कैप्टन इंद्राणी सिंह किसी पहचान की मोहताज नहीं है। लेकिन मौजूदा समय में वो जो काम कर रही हैं वो हर किसी के बस में भी नहीं। वो अशिक्षित बच्चों को पढ़ाने का काम कर रही हैं। यह वो बच्चे हैं जो पढ़ार्इ छोड़कर मजदूरी आैर अन्य कामों में जुट जाते हैं।

1996 में, कैप्टन सिंह ने लिटरेसी इंडिया की शुरुआत की, एक गैर सरकारी संगठन जिसने आर्थिक रूप से गरीबों को शिक्षा और विभिन्न प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों के साथ एक स्थायी आजीविका प्रदान करने के लिए सशक्त बनाया। सिंह कहते हैं, यह मेरा निजी मिशन था.

हजारों गरीब मजदूर बच्चों की पढ़ाई में मदद कर रही हैं कैप्टन इंद्राणी, सुधार रही उनका भविष्य
रोजगार की तलाश में आजकल छोटे-छोटे बच्चे एक राज्य से दूसरे राज्य से दूसरे राज्य में जा रहे हैं। इकोनोमिक सर्वे 2016- 2017 के अनुसार, इन लोगों में सबसे ज्यादा संख्या मजदूरों की है। जो रोटी की तलाश में अपनी पढ़ाई को भी पीछे छोड़ रहे हैं। इनमें से बहुत बच्चे या तो शिक्षा शुरू नहीं कर पाते और या फिर उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है।

मैंने इसे 1996 में 5 बच्चों के साथ शुरू किया था और आज हम 25000 से अधिक महिलाओं और बच्चों तक पहुंच चुके हैं।" एक अखिल भारतीय परियोजना, साक्षरता भारत आज 22 केंद्रों से संचालित होती है।

इन बच्चों को पढ़ाने के लिए देश में बहुत-सी संस्थाएं और एनजीओ हैं जो इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं लेकिन इसमें सबसे बड़ी समस्या यह आ रही है कि उम्र में बड़े बच्चे छोटे बच्चों के साथ बैठकर पढ़ना नहीं चाहते। इसमें वे शर्म महसूस करते हैं। इसी स्थिति को देखते हुए एशिया की पहली कमर्शियल पायलट और समासेवी संस्था लिटरेसी इंडिया की संस्थापक, कैप्टेन इंद्राणी सिंह ने एक खास सॉफ्टवेर बनवाया जिसका नाम ज्ञानतंत्र डिजिटल दोस्त (जीडीडी) है।

इस सॉफ्टवेयर की खास बात यह है कि बच्चे अपने पीछे छूट चुकी पढ़ाई को कम समय में पूरा कर सकते हैं। ज्ञानतंत्र डिजिटल दोस्त में पांचवी कक्षा तक हर विषय के कोर्स के लिए अलग-अलग मोड्यूल बनाए गए हैं, जिसमें बच्चों को बेसिक कोर्स के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स के बारे में भी पढ़ाया जाता है। इस सॉफ्ट में बच्चे को खेल के जरिए पढ़ाई करवाई जाती है। समय-समय पर उन्हें प्रोजेक्ट और असाइनमेंट्स भी दिए जाते हैं। जिन्हें पास करके बच्चा अगले लेवल तक पहुंच जाता है।

इस सॉफ्टवेयर की शुरुआत लिटरेसी इंडिया ने साल 2010 में की थी। आज दिल्ली, राजस्थान,पश्चिम बंगाल समेत 106 केंद्रों पर जीडीडी कार्यक्रम चल रहा है। इस जरिए अब तक 1 लाख से ज्यादा बच्चे फायदा ले चुके हैं इस बढ़ते स्केल को देखते हुए अब इसका नाम बदल कर ‘ज्ञानतंत्र डिजिटल दोस्त उद्भव’ नाम दिया गया है। इस सॉफ्टवेयर को कोई भी कभी भी आसानी से डाउनलोड कर सकता है।


 Captain Indrani Singh : Asia's first woman commercial pilot Touch the skies


Captain Indrani Singh is not only known as Asia's first woman commander but also for the welfare work she has been doing for underprivileged children.

In 1996, Captain Singh started Literacy India, an NGO that empowered the economically poor with education and a variety of vocational activities to provide a sustainable livelihood. Singh says, "This was my personal mission.

 I started it back in 1996 with 5 kids and today we have reached out to over 25000 women and children." A pan-India project, Literacy India today operates from 22 centres. The 'Vidyapeeth' project educates 2500 children while 1300 women are making use of the handicraft skills . Singh says, "The project is 7 years old and its going great guns. People actually came to me and asked how do these women make such good finishing bags." After impressing Corporate India, Captain Singh is now devoting her time to make children aware about issues like AIDS, child abuse with her upcoming project called 'Gyantantra'. Captain Indrani Singh has breached the glass ceiling, literally, by becoming Asia's first lady Wing Commander to fly Airbus 300. With this endeavour, she has changed the lives of children and empowered women over the last decade and there's no stopping this pilot as she chases her dreams to see a literate India.

Setting up her non-governmental organisation, "Literacy India", seven years ago, Capt. Singh, a pilot with the Indian Airlines since 1987, has been imparting education to slum children through three of her non-formal schools, two around Delhi and one in Gurgaon, Haryana.
A student of Summerfield School at East of Kailash in South Delhi, Indrani was always late for school for which she had to face punishment almost every day. Her maths teacher used to ask her, "Which flight do you have to catch, to be so late in the class?
"His words proved to be true. I ended up being a pilot. But, now discipline is the key to my profession," she says. As a bet, she once went up to a teacher to ask which toothpaste she used. An outgoing student who took part in sports and painting simultaneously, she says, "Thanks to my teacher, I paint at times to raise funds for my social work."
She urges children to spread education. "You can always teach whatever you have learnt to someone who is illiterate." Her school-going son, she says, teaches the domestic help at home.
After achieving a successful career in the aviation industry, Asia's first woman commercial pilot Captain Indrani Singh has been molding the lives of many children and women, helping them to be self-sufficient and earn a life of respect. She started the NGO, Literacy India, which is helping more than 25 thousand women and children. Captain Indrani Singh has a dual existence. As a saviour for the ladies, she built a platform to showcase their handmade products and market them in India and abroad. In her other avatar, she has carve a niche for herself in a male-dominated industry by becoming Asia's first woman commercial pilot. Captain Indrani Singh says, "During my times there was hardly anyone flying and I was very good at flying. I was a natural flier. I didn't know that I will be making history."

Posted by Hitendra singh


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