मेरी वैवाहिक जीवन की साल गिरह : में तो सिर्फ ऋणी हूं ! - अरविन्द सिसोदिया

अक्षय तृतिया : 

मेरी वैवाहिक जीवन की साल गिरह : में तो सिर्फ ऋणी हूं ! 

akshay trtiya :   meree vaivaahik jeevan kee saal girah : mein to sirph rnee hoon !


साल महीने दिन गुजरते गये, हर साल अक्षय तृतीया भी आती रही,हर बार सोचते रहे कि अब अच्छा समय आयेगा। इस दौरान सौ सीताओं से भी ज्यादा दुखः मेरी धर्मपत्नि ने सहे और कभी मुंह से उफ तक नहीं निकला। सौम्यता, साहस और सहनशीलता की प्रतिमूर्ति मेरी धर्म पत्नि कठिन समयों में मेरी पथप्रदर्शक भी बनीं।  यही है भारतीय संस्कृति की विशेषता और गौरव ! में तो सिर्फ ऋणी हूं , अपनी धर्मपत्नि और उस परम पिता परमेश्वर का, जिनकी मुझ पर कृपा हुई। दुखः सुख , सब ईश्वर का प्रसाद है। - अरविन्द सिसोदिया 9414180151

 













टिप्पणियाँ

  1. भाग्यशाली होते हैं ऐसे लोग जो दोनों साथ-साथ चलते हैं, एक दूसरे का साथ किसी भी परिस्थिति में नहीं छोडते
    यूँ ही आपका वैवाहिक जीवन खुशहाल बना रहे , यही वर्षगांठ पर हार्दिक शुभकामनाएं हैं

    जवाब देंहटाएं
  2. भाग्यशाली होते हैं ऐसे लोग जो दोनों साथ-साथ चलते हैं, एक दूसरे का साथ किसी भी परिस्थिति में नहीं छोडते
    यूँ ही आपका वैवाहिक जीवन खुशहाल बना रहे , यही वर्षगांठ पर हार्दिक शुभकामनाएं हैं

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इन्हे भी पढे़....

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

भाजपा फिर जीत की हीरो, कांग्रेस फिर से जीरो पर - अरविन्द सिसोदिया

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

अहंकारी ट्रंप की तरह कांग्रेस का भी होगा राजनीतिक सफाया - अरविन्द सिसोदिया

'वोट बचाओ रैली' नहीं, बल्कि 'घुसपैठियों को बचाओ रैली' थी - अमित शाह

राजस्थान के व्याबर जिले में देवमाली गांव,कैंसर का 'झाड़ा'

‘फ्लॉप रैली’ की फजीहत से बचने को राहुल की बहस वाली नौटंकी: अरविंद सिसोदिया Rahul ki bahas

नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, मास्को जेल में..?

हमारा देश “भारतवर्ष” : जम्बू दीपे भरत खण्डे